त्रिशूल शिवगण वाहिनी द्वारा शिप्रा प्रदक्षिणा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह यात्रा 2 नवंबर को सुबह 8 बजे रामघाट से शुरू होगी और 5 नवंबर को शाम 5 बजे रामघाट पर ही ‘एक दिया शिप्रा के नाम’ अभियान के साथ संपन्न होगी। यात्रा जूना अखाड़ा के महामंडलेश्
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त्रिशूल शिवगण वाहिनी के संस्थापक आदित्य नागर और सुरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि प्रदक्षिणा का मुख्य उद्देश्य शिप्रा नदी को उसके पौराणिक स्वरूप में लौटाने और उसे निर्मल बनाने के लिए जन जागरूकता फैलाना है। साथ ही, आम नागरिकों को जल संवर्धन के लिए प्रेरित करना भी इसका लक्ष्य है।
समिति ने दिन वार कार्यक्रम जारी किया
यात्रा 2 नवंबर को रामघाट से संत-महंतों की उपस्थिति में प्रारंभ होकर ग्राम बोलासा और दकनासोडी होते हुए मुढ़ला दोसर स्थित शिप्रा उद्गम स्थल पर पहुंचेगी। इसके बाद 3 नवंबर को यह शिप्रा उद्गम से सिमरोड होते हुए दत्त अखाड़े पर पहुंचेगी।
4 नवंबर को यात्रा मेलेश्वर महादेव, उन्हेल, आलोट होते हुए ग्राम सिपावरा स्थित शिप्रा-चंबल संगम पर पहुंचेगी। अंतिम दिन 5 नवंबर को यह शिप्रा-चंबल संगम से महिदपुर और नारायणा धाम होते हुए शाम 5 बजे रामघाट आरती द्वार पर लौटेगी। यहां शिप्रा पूजन, चुनरी समर्पण के बाद ‘एक दिया शिप्रा के नाम’ अभियान की शुरुआत की जाएगी। यात्रा के सभी पड़ाव स्थलों पर भी दीपदान किया जाएगा।
धर्म चेतना सभाएं आयोजित की जाएंगी
प्रदक्षिणा के दौरान विभिन्न पड़ाव स्थलों पर सनातन पंचायत के माध्यम से धर्म चेतना सभाएं आयोजित की जाएंगी। इस यात्रा में 100 से अधिक यात्री शामिल होंगे। महामंडलेश्वर शैलेश आनंद गिरि महाराज ने बताया कि सनातन पंचायत के माध्यम से ‘नदी-नारी और न्याय’ जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
महंत ज्ञानदास महाराज ने शिप्रा को गंदगी से मुक्त करने और उसे प्रवाहमान बनाने के लिए विस्तृत योजना बनाने और आमजन में जागृति पैदा कर उसमें मिलने वाले नालों को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया। महंत विशालदास महाराज ने शिप्रा नदी के संरक्षण के लिए पौधारोपण और बड़े पेड़ों को न काटने के लिए जन जागरण की बात कही।