एमपी में 6 साल के लंबे इंतजार के बाद एसआई के 7 हजार पदों पर भर्ती परीक्षा निकली है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में आयु सीमा में छूट न देने के नियम की वजह से करीब 2 लाख उम्मीदवार परीक्षा नहीं दे पाएंगे।दरअसल, ये परीक्षा पहले साल 2019 में होना थी, लेकिन किन
.
भर्ती परीक्षाओं में आयु सीमा में छूट देने का प्रावधान सरकार ने ही किया था, एमपीपीएससी समेत कई भर्ती परीक्षाओं में ये भी लागू किया गया, लेकिन एसआई भर्ती परीक्षा से हटा दिया है। अब ओवरएज हो चुके कैंडिडेट्स सरकार को इस नियम की याद दिला रहे हैं। उन्होंने इस नियम को बदलने की मांग को लेकर डिप्टी सीएम से लेकर सरकार के मंत्रियों से मुलाकात की है।
हालांकि, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव का कहना है कि ऐसा कोई नियम बनाया था इसकी जानकारी नहीं है।
साल 2022 में सरकार ने जारी किया था आदेश साल 2019 में मध्य प्रदेश व्यवसायिक परीक्षा मंडल (MPPEB) यानी कर्मचारी चयन मंडल ने एसआई भर्ती परीक्षा को अपने कैलेंडर में शामिल किया था। उस समय कांग्रेस की सरकार थी और लोकसभा चुनाव भी चल रहे थे। लिहाजा, बिना कोई कारण बताए इस साल ये परीक्षा नहीं हो सकी।
इसके बाद कांग्रेस की सरकार गिर गई और एक बार फिर बीजेपी की सरकार बनी। तब तक कोविड-19 ने भी पैर पसार लिए थे। दो साल तक कोविड के चलते कोई भी परीक्षा आयोजित नहीं की गई। 18 सितंबर 2022 को मध्य प्रदेश सरकार ने एक आदेश जारी किया।
इसमें कहा गया था कि COVID-19 महामारी के कारण जो भर्तियां समय पर नहीं हो सकीं, उनमें उम्मीदवारों को 3 साल की अतिरिक्त आयु सीमा में छूट दी जाएगी। अब एसआई भर्ती परीक्षा का आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब MPPSC जैसी अन्य भर्तियों में यह छूट दी गई है।
ये भर्तियां अपेक्षाकृत नियमित रूप से आ रही थीं, तो SI भर्ती में यह छूट क्यों नहीं दी जा रही है, जो सात साल के लंबे अंतराल के बाद आई है? हाल ही में केंद्र सरकार ने भी अपनी भर्तियों में भी उम्मीदवारों को आयु सीमा में 3 साल की छूट दी है।

छात्रों का दावा- 2 लाख अभ्यर्थी बाहर हो जाएंगे छात्रों का दावा है कि मध्य प्रदेश के गृह मंत्रालय ने ही लगभग डेढ़ साल पहले SI भर्ती को लेकर ट्वीट किया था। उसमें लिखा था कि भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी प्रशासनिक स्तर पर हुई है। छात्रों का सवाल है कि इसका खामियाजा वो क्यों भुगते? पिछले कई सालों से एसआई भर्ती परीक्षा का इंतजार कर रहे राहुल भी ऐसा ही सवाल उठाते हैं।
वे कहते हैं कि अगर सरकार आयु सीमा में 3 साल की छूट नहीं देती है, तो प्रदेश के कम से कम 2 लाख युवा उम्मीदवार इस भर्ती प्रक्रिया से सीधे तौर पर बाहर हो जाएंगे। यह एक बहुत बड़ी संख्या है, और यह उन युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है जिन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष इस एक परीक्षा की तैयारी में लगा दिए हैं।
वे कहते हैं कि हमारी सारी उम्मीदें इसी भर्ती पर टिकी थीं। हम जैसे-तैसे गुजारा कर रहे थे और सोच रहे थे कि इस बार मेहनत करके नौकरी पा लेंगे। पर अब तो हम पूरी तरह से वंचित हो गए हैं, हमें मौका ही नहीं दिया गया।

मेरिट में बाहर हुआ था, इस बार पास होने का यकीन था पिछली बार भर्ती परीक्षा देने वाले प्रदीप सिंह का दर्द सबसे गहरा है। वह बताते हैं कि 2017-18 की SI भर्ती में वह मेरिट लिस्ट से बाहर हो गए थे। लेकिन उन्हें पूरा विश्वास था कि अगली बार वह यह परीक्षा जरूर पास कर लेंगे।
प्रदीप कहते हैं, पिछले 7-8 साल से मैं सिर्फ इसी नौकरी की तैयारी कर रहा था। व्यापमं( ईएसबी) का कैलेंडर बीच-बीच में अपडेट होता था, जिससे उम्मीद बंधी रहती थी कि भर्ती आएगी। अब जब आई है, तो छूट न मिलने से मुझे व्यक्तिगत रूप से बहुत नुकसान हुआ है।
अपने परिवार के बारे में बताते हुए प्रदीप भावुक हो जाते हैं। वे बताते हैं कि मेरे परिवार में तीन बहनें और पिता हैं, जो एक प्राइवेट नौकरी करते हैं। पहली बार मेरिट में बाहर होने के बाद मुझे पूरा आत्मविश्वास था कि अगली बार मैं सफल हो जाऊंगा।

मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों तक, हर दरवाजे पर लगाई गुहार इस परीक्षा की तैयारी करने वाले मिलन शर्मा भी कहते हैं कि अनारक्षित वर्ग के लिए अधिकतम आयु सीमा 33 साल है। मेरे साथ जो लोग इसकी तैयारी कर रहे थे वो ज्यादातर इस आयुसीमा को पार कर चुके हैं। कोरोना के बाद यह पहली SI भर्ती है, इसलिए हमें इसमें कम से कम एक मौका तो मिलना ही चाहिए।
छात्रों ने अपनी मांग को सरकार तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। प्रदीप सिंह बताते हैं कि वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को चार अलग-अलग मौकों पर ज्ञापन सौंप चुके हैं। इसके अलावा, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान कैबिनेट मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और वरिष्ठ मंत्री गोपाल भार्गव को भी ज्ञापन देकर अपनी पीड़ा बताई है।

अभ्यर्थियों को सरकार से उम्मीद है कि वह आयु सीमा में छूट देगी।
गृह विभाग के एससीएस को जानकारी नहीं छात्रों को अब भी उम्मीद है कि सरकार उनकी बात सुनेगी। प्रदीप कहते हैं, “हमें मुख्यमंत्री जी पर भरोसा है। वे युवाओं के लिए इतना कुछ कर रहे हैं, तो हमारी यह छोटी सी मांग भी जरूर सुनी जानी चाहिए।” इस मसले पर भास्कर ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) शिव शेखर शुक्ला से बात की, तो उन्होंने कहा,
यह विषय अभी मेरे संज्ञान में नहीं है। मैं इस बारे में जानकारी हासिल करूंगा और जो भी संभव प्रयास होगा, वह किया जाएगा।
