वैष्णोदेवी से काम कर लौट रहे बोरदेही क्षेत्र के हरन्या गांव के एक आदिवासी परिवार के एक वर्षीय मासूम बेटे की ट्रेन में मौत हो गई। आर्थिक तंगी के कारण माता-पिता के पास शव को घर ले जाने के लिए पैसे नहीं थे। ऐसे में बैतूल रेलवे स्टेशन पर मानवीय संवेदनाओं
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यह घटना 31 अक्टूबर की रात की है, जब परिवार कटरा से लौट रहा था। रास्ते में बच्चे की तबीयत बिगड़ गई। भोपाल पहुंचने पर माता-पिता ने उसे इंदिरा गांधी महिला एवं बाल्य चिकित्सालय में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद दंपती जयपुर एक्सप्रेस से बैतूल पहुंचे।
बैतूल स्टेशन पर आरपीएफ की प्रधान आरक्षक फरहा खान जागरूकता कार्यक्रम चला रही थीं, तभी पिता मनराज उईके ने उनसे मदद की गुहार लगाई। फरहा खान ने तुरंत आरपीएफ इंस्पेक्टर राजेश बनकर, स्टेशन मास्टर वी.के. वरकड़े और जीआरपी को सूचना दी।
इसके बाद बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति से संपर्क किया गया। संस्था की अध्यक्ष गौरी पदम ने यह मामला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खण्डेलवाल के संज्ञान में लाया। खण्डेलवाल ने बिना देर किए शव वाहन भेजने के निर्देश दिए, जिससे मासूम का शव उसके हरन्या गांव तक पहुंच सका।
समाजसेवी बंटी राठौर, आरपीएफ-जीआरपी और स्टेशन प्रबंधन ने भी परिवार को करीब 3500 रुपये की आर्थिक मदद सौंपी। उल्लेखनीय है कि वर्षों पहले एक आदिवासी की पीड़ा से प्रेरित होकर ही खण्डेलवाल ने बैतूल में शव वाहन सेवा शुरू की थी, जिससे अब तक हजारों परिवारों को लाभ मिल चुका है।
इस संवेदनशील घटनाक्रम में बैतूल रेलवे स्टेशन के कर्मचारियों, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों ने एकजुट होकर सहयोग किया, जिसके परिणामस्वरूप बेसहारा माता-पिता अपने मासूम की पार्थिव देह को सम्मानपूर्वक घर तक ले जा सके।