नर्मदापुरम वनमंडल के इटारसी परिक्षेत्र में ताखु प्रजाति के दुर्लभ सागौन पेड़ों की अवैध कटाई मामले की जांच रिपोर्ट वन मुख्यालय भोपाल आ गई है। यह सागौन फर्नीचर बनाने के काम में आता है। वन विभाग की जांच में सामने आया है था कि इस क्षेत्र में 1236 सागौन
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अब इसी मामले में विभाग ने 16 कर्मचारियों और अधिकारियों पर आरोप पत्र जारी कर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार बीट अधिकारियों ने गश्त और गणना नहीं की, जिससे लकड़ी तस्कर लगातार सक्रिय रहे।
मामले में मुख्य वनसंरक्षक अशोक कुमार ने जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई के आदेश देते हुए लिखा है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, उनके खिलाफ सख्त विभागीय दंड की प्रक्रिया जारी रहेगी। सभी से 15 दिन में जवाब तलब किया गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर निलंबन और वेतनवृद्धि रोके जाने की कार्रवाई की जाएगी।
तीन बार जारी किए जा चुके आरोप पत्र मामले में विभाग ने तीन बार में आरोप पत्र दिए। मान सिंह मरावी, सहायक वनरक्षक उप वनमंडलाधिकारी नर्मदापुरम, महेंद्र कुमार गौर उप वनक्षेत्रपाल प्रभारी इटारसी को 24 अक्टूबर को नोटिस दिए गए । वहीं वनक्षेत्रपाल हरिओम मनु और श्रेयांस कुमार जैन को जल्दी नोटिस दिया जाएगा।
तत्कालीन वनपाल, सहायक पांडरी परिक्षेत्र शिवकुमार तिवारी, अजय कुमार श्रीवास्तव, राजेंद्र कुमार नागवंशी, छीपीपखापा के वनरक्षक राजेश यादव, राजेश सरयाम व अजय कुमार गौर को 22 अक्टूबर को नोटिस दिए गए। इनमें शिवकुमार तिवारी और अजय कुमार श्रीवास्तव को 1 सितंबर को, राजेश यादव को 22 नवंबर 2024 और राजेश सरयाम को 30 जून 2025 को आरोप पत्र मिल चुका है।
उच्च स्तरीय जांच में तत्कालीन उप वनमंडल अधिकारी जगदीश प्रसाद बौरासी के साथ 5 वनरक्षक रामकुमार पटेल, संतोष योगी, राजकुमारी, नारायण सिंह वर्मा और राकेश वर्मा को नोटिस दिए ।
क्या है मामला सितंबर 2025 में इटारसी परिक्षेत्र के जंगलों में ताखु सागौन की अवैध कटाई की शिकायतें सामने आईं। वन विभाग ने जब क्षेत्र का सर्वे कराया तो पाया गया कि 700 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में 1236 पेड़ पूरी तरह गायब हैं। माफिया ने यह कटाई 2023 से 2024 के बीच की थी, जबकि क्षेत्रीय वन अमला मौके पर तैनात था। वन विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया कि इस लापरवाही से सरकारी राजस्व को 2.04 करोड़ का नुकसान हुआ।
यह है आरोप– 1. गश्त रिकॉर्ड अधूरे मिले, फील्ड में रिपोर्टिंग नहीं की गई। 2. क्षेत्रीय अधिकारी समय पर लकड़ी चोरी की सूचना नहीं दे पाए। 3. कई स्थानों पर काटे गए ठूंठ बिना रिपोर्ट के दर्ज रहे। 4. विभागीय फाइलों में पेड़ों की गणना और भौतिक स्थिति में भारी अंतर पाया गया।