ICC Womens World Cup 2025 Final: भारत और साउथ अफ्रीका के बीच विमेंस वर्ल्ड कप 2025 का फाइनल मुकाबला आज डीवाई पाटिल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा. भारत ने सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को और साउथ अफ्रीका ने इंग्लैंड को हराकर फाइनल में जगह बनाई है. भारतीय टीम इससे पहले साल 2005 और 2017 में वनडे वर्ल्ड कप का फाइनल खेल चुकी हैं. दोनों मौकों पर भारत को हार का सामना करना पड़ा था. आज हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली टीम इंडिया के पास नवी मुंबई में अपने दर्शकों के बीच पहला वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रचने का मौका होगा.
वर्ल्ड कप फाइनल में कैसा है भारत का रिकॉर्ड?
आईसीसी विमेंस वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में भारत का सफर दिल टूटने वाला रहा है. भारतीय महिला क्रिकेट टीम दो बार (साल 2005 और 2017) वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंची, लेकिन दोनों ही मौकों पर बुरी तरह हार गई. साल 2025 के फाइनल में भारत के पास पिछली सारी कसर को मिटाते हुए पहली बार वर्ल्ड कप की ट्रॉफी जीतने का बेहतरीन मौका है. साल 2005 में मिताली राज की अगुवाई में भारत ने अपने पहले वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया था. यह वर्ल्ड कप भारत में महिला क्रिकेट के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ.
2005 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत की 98 रनों से हार
हालांकि, सेंचुरियन में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2005 वर्ल्ड कप के फाइनल में भारत को 98 रनों से हार का सामना करना पड़ा था. बेलिंडा क्लार्क की अगुवाई में ऑस्ट्रेलिया ने कैरन रॉल्टन के नाबाद 107 रनों की बदौलत पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 4 विकेट पर 215 रन का स्कोर बनाया. जवाब में, भारतीय महिला क्रिकेट टीम दबाव में लड़खड़ा गई और 117 रन पर ढेर हो गई. भारत यह फाइनल मैच 98 रन से हार गया. इस तरह भारतीय महिला क्रिकेट टीम का वर्ल्ड कप जीतने का सपना टूट गया.
2017 वर्ल्ड कप फाइनल में मामूली अंतर से चूक गया भारत
12 साल बाद मिताली राज की अगुवाई में भारत एक बार फिर साल 2017 के वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचा. इंग्लैंड के खिलाफ खिताबी मुकाबले में, भारत अपना पहला वर्ल्ड कप जीतने के बेहद करीब था. इंग्लैंड के खिलाफ 229 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय महिला क्रिकेट टीम 219 रन पर ढेर हो गई. भारतीय महिला क्रिकेट टीम महज 9 रन से अपना पहला वर्ल्ड कप का खिताब जीतने से चूक गई. यह दिल तोड़ने वाला पल था, लेकिन भारतीय महिला क्रिकेट टीम के इस प्रदर्शन ने लाखों लोगों का ध्यान खींचा और भारत में महिला क्रिकेट के प्रति धारणा बदल गई.