दैनिक भास्कर खबर का बड़ा असर हुआ। इंदौर के सीएमएचओ (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने उन क्लिनिक पर कार्रवाई के निर्देश दिए है जिन्हें फर्जी डॉक्टर चला रहे हैं।
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दरअसल, भास्कर ने 29 अक्टूबर को अपनी खबर में खुलासा किया था कि इंदौर में इलेक्ट्रोहोम्योपैथी डिग्रीधारी एलोपैथी का इलाज कर रहे हैं।
इस खुलासे के बाद सीएमएचओ ने जिले के सभी चिकित्सा अधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देश दिए कि वे अपने क्षेत्र में आशा कार्यकर्ता, एएनएम की सहायता ऐसे डिग्रीधारियों की पहचान करें जो एलोपैथी का इलाज कर रहे हैं। ये भी कहा कि यदि वे अपने नाम के आगे डॉक्टर शब्द का प्रयोग कर रहे हैं तो भी उनपर कार्रवाई की जाए।
बता दें कि भास्कर में एमपी के तीन बड़े शहर भोपाल, उज्जैन और इंदौर में 20 दिन तक इन्वेस्टिगेशन किया था और ऐसे फर्जी डॉक्टरों की पहचान की जिनके पास एलोपैथी के इलाज का अधिकार ही नहीं है। इन्हें दवाएं देते हुए अपने खुफिया कैमरे में भी कैद किया था।
सीएमएचओ ने दिए इलेक्ट्रोहोम्योपैथी डिग्री धारकों के क्लिनिक के निरीक्षण के निर्देश।
भास्कर ने किया था चार क्लिनिक का खुलासा भास्कर ने अपने इन्वेस्टिगेशन में इंदौर के पटेल क्लिनिक, सांवेर का एस. एस. क्लिनिक और इंदौर के निरंजनपुर में संचालित श्री श्रृद्धा क्लिनिक और हर्ष क्लिनिक को दिखाया था। इन तीनों क्लिनिक के डॉक्टर के पास इलेक्ट्रोहोम्योपैथी की डिग्री है, जबकि ये मरीजों को एलोपैथी की दवाइयां दे रहे हैं। इन चारों क्लिनिक के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। द

दैनिक भास्कर ने एप पर 29 अक्टूबर को ये खबर पब्लिश हुई थीं…
35000 में डॉक्टर बनाने का धंधा…फर्जी क्लिनिक से मौतें:3 महीने में 10वीं पास को भी दे रहे डिग्री; भास्कर रिपोर्टर ने मरीज बनकर किया खुलासा

मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रोहोम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को मान्यता नहीं है। इसकी डिग्री को हासिल करने वाले लोग न तो खुद के नाम के आगे डॉक्टर लिख सकते हैं और न ही इलाज कर सकते हैं। लेकिन हकीकत ये है कि बाकायदा इनके क्लिनिक खुले हैं और ये मरीजों को कैप्सूल, गोलियां देने के साथ इंजेक्शन भी लगा रहे हैं।
दरअसल, पिछले दिनों इंदौर और उज्जैन में फर्जी डॉक्टरों के इलाज की वजह से लोगों की मौत हो गई थी। प्रशासन को जांच में इन फर्जी डॉक्टरों के पास बीईएमएस (बैचलर ऑफ इलेक्ट्रोहोम्योपैथी मेडिसिन एंड सर्जरी) की डिग्री मिली। प्रशासन ने इनके क्लिनिक सील कर दिए थे।
इन मामलों के सामने आने के बाद भास्कर ने इस पूरे मामले का इन्वेस्टिगेशन किया। करीब 10 दिन के इन्वेस्टिगेशन में भास्कर रिपोर्टर बीईएमएस डिग्रीधारी ‘फर्जी डॉक्टरों’ के क्लिनिक में मरीज बनकर पहुंचा, तो डिग्री देने वाले दलालों से भी संपर्क किया। साथ ही डिग्री को मान्यता देने वाले एक प्राइवेट काउंसिल के सेक्रेटरी से भी बात की तो पता चला कि काउंसिल ने 20 हजार लोगों का रजिस्ट्रेशन किया है।
किस तरह से बीईएमएस डिग्रीधारी ‘फर्जी डॉक्टर’ बनकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं? पढें पूरी खबर…