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Indore News: उन्होंने लोकल 18 से कहा कि देश का पहला पूरी तरह का ब्लैक टाइगर पैदा हो सके, इसके लिए यहां पहली बार ब्लैक मेलानिस्टिक टाइगर का सफेद बाघिन से क्रॉस कराया गया है. इसी तरह चिड़ियाघर में मौजूद येलो टाइगर की भी क्रॉस ब्रीडिंग कराई गई है, जिससे कि दुर्लभ रंगों वाले शावकों जा जन्म हो सके.
इंदौर. देश में गिने-चुने ही बाघ मौजूद हैं लेकिन उनमें भी ब्लैक मेलानिस्टिक टाइगर बहुत ही कम मौजूद हैं. ओडिशा के नंदनकानन अभयारण्य के अलावा केवल इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में ही आपको ऐसे ब्लैक टाइगर देखने को मिलते हैं, जिनमें से एक को नंदनकानन से लाया गया था जबकि एक का जन्म यही पर क्रॉस ब्रीडिंग के जरिए सफेद बाघिन के साथ मेटिंग के बाद हुआ था. इंदौर चिड़ियाघर के क्यूरेटर निहार पारुलेकर के अनुसार, इस बार जू में सफेद बाघिन और काले बाघ के बीच में मेटिंग हुई है, जिसकी वजह से एक बार फिर उम्मीद है कि इस बार ब्लैक मेलानिस्टिक बच्चे का जन्म हो सकता है.
उन्होंने कहा कि देश के पहले पूरी तरह ब्लैक टाइगर की उत्पत्ति हो सके, इसके लिए यहां पहली बार ब्लैक मेलानिस्टिक टाइगर का व्हाइट टाइग्रेस से क्रॉस कराया गया है. इसी तरह प्राणी उद्यान में मौजूद येलो टाइगर की भी क्रॉस ब्रीडिंग कराई गई है, जिससे कि दुर्लभ रंगों वाले शावकों को प्राप्त किया जा सके.
इनकी सबसे खास पहचान इनके शरीर पर मौजूद बहुत चौड़ी और मोटी काली धारियां हैं. ये धारियां अक्सर इतनी पास-पास और फैली हुई होती हैं कि नारंगी या पीले रंग का हिस्सा कम दिखता है, जिससे बाघ लगभग काला दिखाई देता है. ये बाघ लगभग विशेष रूप से ओडिशा के सिमलीपाल टाइगर रिजर्व और नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में पाए जाते हैं. यह दुनिया का एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां मेलानिस्टिक बाघों की इतनी बड़ी संख्या पाई जाती है.
दुनिया में कब आएगा शावक?
आमतौर पर बाघों में कंसीव करने के बाद तीन महीने के भीतर शावक का जन्म हो जाता है. इंदौर जू में टाइगर्स के बीच सितंबर में मेटिंग हुई थी. निहार पारुलेकर के मुताबिक, अगर सबकुछ सही रहता है और ब्लैक टाइगर का जीन डोमिनेटिंग जीन रहता है, तो दिसंबर से जनवरी के बीच ब्लैक मेलानिस्टिक शावक जन्म ले सकता है.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.