उद्यमियों के 8000 करोड़ रुपए डूबने की आशंका: कंपनियों ने खरीदी घटाई, मप्र के 24 एथेनॉल प्लांट संकट में – Ratlam News

उद्यमियों के 8000 करोड़ रुपए डूबने की आशंका:  कंपनियों ने खरीदी घटाई, मप्र के 24 एथेनॉल प्लांट संकट में – Ratlam News



केंद्र सरकार के प्रोत्साहन और छूट से तीन साल पहले मप्र में 24 एथेनॉल प्लांट लगे थे। अब इन पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने इस साल बड़ी कटौती की है। कुल 143 करोड़ लीटर उत्पादन क्षमता में से सिर्फ 63 करोड़ लीटर एथेनॉल ही

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ये सभी प्लांट मक्के से एथेनॉल बनाते हैं। इस कदम से उद्यमियों के लगभग 8000 करोड़ रुपए फंस सकते हैं। पिछले साल तक स्थिति सामान्य थी, लेकिन इस साल ओएमसी ने मप्र से खरीदी घटाकर कुल उत्पादन का केवल 44 प्रतिशत कर दिया है।

ग्रेन एथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सीके जैन का कहना है कि इतनी कम मांग से प्लांट साल में केवल 120 दिन ही चल पाएंगे। अधिकांश इकाइयां बैंक ऋण से लगी हैं, ब्याज चुकाना भी मुश्किल होगा। नीमच के उद्योगपति कैलाश धानुका ने बताया कि इतनी कम खरीदी में प्लांट चलाना संभव नहीं है।

धानुका ने बताया कि उनके दो प्लांट की क्षमता 27 करोड़ लीटर है, जबकि इस साल उन्हें केवल 10.5 करोड़ लीटर का कोटा मिला है। उनका कहना है कि ओएमसी ने 10 साल का अनुबंध किया था। उसी भरोसे हमने निवेश किया था।

  • 2024-25 में ग्रेन एथेनॉल का उद्घादन 650 करोड़ लीटर था। इसका उपयोग बीयर, वाइन के एक घटक, पॉलिश, परफ्यूम, सेनेटाइजर, अस्पतालों में कीटाणुनाशक, स्पिरिट व खाद्य प्रसंसकरण में भी होता है।
  • 24 प्लांट में से 13 प्लांट सिर्फ एथेनॉल बनाते हैं। बाकी 11 प्लांट एथेनों के साथ स्पिरिट और अन्य उत्पाद भी तैयार कर रहे हैं।

कुल उत्पादन का 44% एथेनॉल खरीदेंगे

ओएमसी ने मप्र से एथेनॉल खरीदना कम क्यों कियाः कई राज्यों में एथेनॉल प्लांट शुरू हो चुके हैं। ओएमसी अब उन्हीं राज्यों से खरीद रही है, जहां खपत अधिक है, ताकि ट्रांसपोर्टेशन खर्च घटाया जा सके। इसी वजह से मप्र से खरीद 44% रह गई।

क्या इससे ट्रांसपोर्टेशन खर्च कम होगाः

पूरी तरह नहीं, क्योंकि असम, गुजरात, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना औरतमिलनाडु में मक्का उत्पादन कम है। वहां मक्का मप्र से जाएगा, जिससे ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी। कीमत फिक्स होने से मक्का सस्ता खरीदा जाएगा।

सबसे ज्यादा नुकसान किसका हैः

इस नीति से मप्र के उद्यमियों और किसानों को सबसे बड़ा नुकसान है। 8000 करोड़ का निवेश एनपीए में बदलने की आशंका है और करीब 24 हजार मजदूरों की नौकरियां खतरे में हैं।

क्या है एथेनॉल ?

एथेनॉल मक्के के अलावा चावल व गन्ने से भी बनाया जाता है। 100 किलो मक्के से 38 लीटर एथेनॉल बनता है। इसका मुख्य उपयोग ईंधन के रूप में होता है, जिससे वायु प्रदूषण कम होता है। भारत में अब 20% पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है, जबकि 2014 में यह डेढ़ प्रतिशत था। ब्राजील में सबसे ज्यादा 30% एथेनॉल पेट्रोल में मिलाया जाता है। एथेनॉल उत्पादन में गन्ने की हिस्सेदारी 27%, मक्का व चावल 72% से ज्यादा है।



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