नार्थ ईस्ट से उड़ी ग्लोबल उड़ान, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारत-फ्रांस साझेदारी से रचा इतिहास

नार्थ ईस्ट से उड़ी ग्लोबल उड़ान, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारत-फ्रांस साझेदारी से रचा इतिहास


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केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया के पूर्वोत्तर के चार दिवसीय दौरे ने भारत-फ्रांस सहयोग में नया इतिहास रच दिया है. इस दौरान गुवाहाटी में आयोजित भारत-फ्रांस नॉर्थ-ईस्ट इन्वेस्टमेंट फोरम ने निवेश और नवाचार के नए द्वार खोले, जिससे नार्थ ईस्ट को “ग्लोबल इंडिया” की नई उड़ान मिल गई. सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) से लेकर एफिल टॉवर पर UPI की लॉन्चिंग तक, भारत-फ्रांस साझेदारी ने विकास और तकनीक की नई दिशा तय की है. अब यही सहयोग पूर्वोत्तर को स्वच्छ ऊर्जा, कृषि-तकनीक, डिजिटल नवाचार और सतत पर्यटन का “इनोवेशन हब” बनाने जा रहा है. मंत्री ने असम को दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की हरित राजधानी के रूप में उभरने की संभावना जताई. उन्होंने कहा— “भूपेन दा के संगीत की तरह, ब्रह्मपुत्र की धारा भी हमें सिखाती है कि दुख में भी गीत होता है.” गुवाहाटी में आयोजित भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में सिंधिया ने छह प्रतिष्ठित हस्तियों को सम्मानित किया और कहा कि “कला और करुणा भारत की आत्मा हैं.” इसके बाद उन्होंने ‘नन्हीं छांव’ राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता में शामिल देशभर के 50,000 से अधिक छात्रों को संबोधित किया. उन्होंने युवाओं से दयालु और समावेशी भारत बनाने का आह्वान किया और कहा— “विकसित भारत की असली ताकत तब दिखेगी जब हमारी बेटियां दर्शक नहीं, बदलाव की शिल्पकार बनेंगी.” कार्यक्रम का समापन भूपेन हजारिका के अमर गीत “दिल हूम हूम करे” की सामूहिक प्रस्तुति से हुआ, जिसने सभागार को भावनाओं से भर दिया. यह दौरा पूर्वोत्तर में निवेश, नवाचार और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन गया, जिसने भारत-फ्रांस संबंधों को नई ऊंचाई दी और विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया. (रिपोर्ट: सुमित वर्मा)

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने पूर्वोत्तर के अपने चार दिवसीय दौरे का सफलतापूर्वक समापन किया, जिसे भारत और फ्रांस के द्विपक्षीय संबंधों में एक मील का पत्थर माना जा रहा है. गुवाहाटी में आयोजित भारत-फ्रांस नॉर्थ-ईस्ट इन्वेस्टमेंट फोरम इस दौरे का मुख्य आकर्षण रहा, जिसने क्षेत्र के लिए निवेश और नवाचार के नए द्वार खोले.

मंत्री सिंधिया ने बताया कि भारत-फ्रांस का सहयोग पूर्वोत्तर के विकास का नया अध्याय लिख रहा है, जिसकी नींव 2015 में PM मोदी द्वारा शुरू किए गए अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), रक्षा और समुद्री साझेदारी पर टिकी है. डिजिटल नवाचार (जैसे एफिल टॉवर पर UPI) को पूर्वोत्तर में लागू करते हुए, ‘अष्टलक्ष्मी’ क्षेत्र को स्वच्छ ऊर्जा, कृषि-तकनीक और टिकाऊ पर्यटन में भारत-फ्रांस सहयोग की अग्रिम पंक्ति में बदला जा रहा है. असम दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रवेश द्वार के रूप में इंडो-पैसिफिक की हरित नवाचार राजधानी बनने को तैयार है.

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने असम को “उभरते पूर्वोत्तर की धड़कन” बताते हुए ₹635 करोड़ की विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ किया. आईआईटी गुवाहाटी में उत्तर पूर्वी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्लस्टर (NEST) का उद्घाटन किया . ₹22.98 करोड़ के निवेश से स्थापित यह NEST क्लस्टर, अब पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए वैज्ञानिक नवाचार और उद्यमिता का हब बनेगा.  

केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने दोहराया कि विकसित भारत की असली ताकत तभी उभरेगी जब बेटियाँ खुद को मूकदर्शक नहीं, बल्कि बदलाव की सूत्रधार (Architects of Change) समझेंगी. असम की वीरांगना कनकलता बरुआ से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने कहा कि साहस और दृढ़ निश्चय किसी उम्र या लिंग की परवाह नहीं करते. जब महिलाओं की सहानुभूति, लचीलापन और नेतृत्व क्षमता का युवा ऊर्जा से संगम होगा, तो विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना आसान हो जाएगा.

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज गुवाहाटी में दो प्रमुख कार्यक्रमों में भाग लिया. उन्होंने सरहद पुणे द्वारा आयोजित समारोह में भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए, जहाँ भारत की सांस्कृतिक विविधता और पूर्वोत्तर की विरासत का उत्सव मनाया गया. बाद में, उन्होंने 12वीं राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता – नन्हीं छाँव को संबोधित किया, जहाँ राष्ट्र निर्माण में महिलाओं और युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया.

सिंधिया ने राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता नन्ही छांव भाग लेने वाले पूरे भारत के 50,000 से ज़्यादा छात्रों को संबोधित किया.उन्होंने विजेताओं से बातचीत की और उनकी विचारों की स्पष्टता और देशभक्ति की भावना की सराहना की. केन्द्रीय मंत्री ने महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और सर्वधर्म सद्भाव के क्षेत्र में नन्ही छांव फाउंडेशन के कार्यों की सराहना की. “विकसित भारत की शक्ति” विषय पर विचार करते हुए, सिंधिया ने कहा कि ये निबंध इस बात की याद दिलाते हैं कि भारत का भविष्य का आधार युवाओं का आत्मविश्वास, करुणा और जिज्ञासा है.

सरहद पुणे द्वारा आयोजित समारोह में भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कला और एकता को एक सूत्र में पिरोने वाले भूपेन हजारिका को एक कवि, संगीतकार और राष्ट्र की आवाज़ के रूप में श्रद्धांजलि अर्पित की.

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भूपेन दा के नाम पर पुरस्कार प्रदान करना न केवल एक कलाकार का सम्मान है, बल्कि सहानुभूति और सांस्कृतिक समन्वय के एक युग का भी सम्मान है. साहित्य, संगीत, फिल्म, विद्वता और सांस्कृतिक संरक्षण में योगदान के लिए येशे दोरजी थोंगची (अरुणाचल प्रदेश), लैशराम मेमा (मणिपुर), रजनी बसुमतारी (असम), एलआर सैलो (मिज़ोरम), डॉ. सूर्यकांत हजारिका (असम), और प्रो. डेविड आर. सिमलीह (मेघालय) सहित छह प्रतिष्ठित हस्तियों को सम्मानित किया गया.

गुवाहाटी में ‘नन्हीं छाँव’ राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता को संबोधित करते हुए, मंत्री ने इसे प्रतिभाशाली युवा मस्तिष्कों और परिवर्तनकर्ताओं का जीवंत समागम बताया. उन्होंने कहा कि नन्हीं छाँव फाउंडेशन महिला सशक्तिकरण, प्रकृति संरक्षण और सामुदायिक सद्भाव की भावना को खूबसूरती से दर्शाता है. युवा निबंधकारों के साथ बातचीत के बाद उन्होंने ज़ोर दिया कि राष्ट्र का भविष्य युवाओं के आत्मविश्वास, करुणा और जिज्ञासा पर टिका है, जो “विकसित भारत की शक्ति” का मूल आधार हैं.

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