ICC ने चैंपियन टीम को 4.48 मिलियन डॉलर (करीब 38 करोड़ रुपये) का इनाम दिया, तो BCCI ने 51 करोड़ रुपये का ईनाम दिया. लेकिन ये जीत सिर्फ मैदान की नहीं, बल्कि दो दशकों के संघर्ष की जीत है. जहां कभी मिताली राज जैसी दिग्गजों को मैच फीस के नाम पर 1000 रुपये भी नहीं मिल पाते थे. आज वही टीम पुरुषों के बराबर कमाई कर रही है. ऐसे में महिलाओं की बोल्ड क्रिकेट कहानी को थोड़ा करीब से 7 पॉइंट में समझते हैं.
पुराने दिनों का दर्द: 1000 रुपये की जेब और अनगिनत चुनौतियां
20 साल पहले भारतीय महिला क्रिकेट का चेहरा बिल्कुल अलग था. पूर्व कप्तान मिताली राज ने हाल ही में ‘वुमन क्रिकेट’ पत्रिका और लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में खुलासा किया कि उस दौर में खिलाड़ियों को मैच फीस के नाम पर महज 1000 रुपये मिलते थे.
वह कहती हैं “घर का खर्च चलाना मुश्किल था. ट्रेन के जनरल कोच में सफर, फर्श पर सोना, प्लास्टिक के बर्तनों में खाना – ये हमारी रोजमर्रा की जिंदगी थी,”
2005 में वर्ल्ड कप के दौरान भी सुविधाएं नाममात्र की थीं. पूर्व भारतीय खिलाड़ी अंजुम चोपड़ा जैसी दिग्गजों को याद है कि 20 लड़कियां चार टॉयलेट शेयर करतीं, किट्स तक उधार लेनी पड़तीं. लेकिन इसी संघर्ष ने जुनून पैदा किया, जो आज फल दे रहा है.
अब जैसी कमाई पुरुष टीम की, वैसी ही महिला टीम की
2022 में बीसीसीआई का ऐतिहासिक फैसला आया – सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट वाली महिला और पुरुष खिलाड़ियों को बराबर मैच फीस. टेस्ट के लिए 15 लाख, वनडे के लिए 6 लाख और टी20 के लिए 3 लाख रुपये. मिताली राज ने उसी साल हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “BCCI का ये फैसला दिखाता है कि महिला क्रिकेट अब टिकाऊ करियर है.” आज लड़कियां बिना आर्थिक चिंता के खेल रही हैं, जो उनके प्रदर्शन को नई ऊंचाई दे रहा है.
WPL का तूफान: आईपीएल जैसा जादू
2023 में शुरू हुई वुमेंस प्रीमियर लीग (डबल्यूपीएल) ने सबकुछ बदल दिया. फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस लीग ने महिला क्रिकेट को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया, जहां टॉप प्लेयर्स को 3.4 करोड़ तक सैलरी मिल रही है. 2025 सीजन में मुंबई इंडियंस ने दिल्ली कैपिटल्स को हराकर दूसरी बार खिताब जीता, और दर्शकों की संख्या 30 मिलियन तक पहुंच गई. बीबीसी के मुताबिक, घरेलू खिलाड़ियां अब नेशनल टीम में आने से पहले ही बड़े स्टेज का अनुभव ले रही हैं. ये लीग ने न सिर्फ पैसे दिए, बल्कि कॉन्फिडेंस भी – स्मृति मंधाना जैसी स्टार्स ने यहां से नई आक्रामकता सीखी.
ट्रेनिंग का नया दौर: एनसीए से स्पोर्ट्स साइंस तक
बीसीसीआई ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया. इंडिया टुडे की रिपोर्ट बताती है कि महिलाओं के लिए अब नेशनल क्रिकेट एकेडमी (एनसीए) में स्पेशलाइज्ड कोच – बैटिंग, बॉलिंग, फील्डिंग, मेंटल कंडीशनिंग सब उपलब्ध है. डेटा एनालिटिक्स और स्पोर्ट्स साइंस से हर शॉट प्लान होता है. सुविधाएं मिलने के बाद खिलाड़ियों में तकनीकी सुधार आया है. मल्टी-डे मैच और टेस्ट क्रिकेट पर फोकस हो रहा है. इसी बदलाव ने टीम को वर्ल्ड क्लास बनाया, जहां चोटें कम और फिटनेस ज्यादा है.
ब्रांड क्वीन्स: मैदान से बाजार तक की छलांग
स्मृति मंधाना आज महिला क्रिकेट की चेहरा हैं. इंडिया टीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक उनकी नेट वर्थ 34 करोड़ पहुंच गई, जिसमें SBI, ह्युंडई, रेड बुल, हीरो मोटोकॉर्प, गार्नियर, मास्टरकार्ड, ए23 पोकर, एडित्या बिड़ला ग्रुप और हर्बलाइफ जैसे ब्रांड्स शामिल हैं. कप्तान हरमनप्रीत कौर की लिस्ट भी कमाल की है – एचडीएफसी लाइफ, आईटीसी, बूस्ट, सीईएटी, प्यूमा, टाटा सफारी, एशियन पेंट्स, जयपुर रग्स, ओमेक्स, अमेजन, हैपिपोला और क्रेक्स ऐप. जेमिमाह रॉड्रिग्स रेड बुल, हाइयुंडई और ड्रीम11 की ब्रांड एंबेसडर बनीं. ये लड़कियां अब लाखों लड़कियों की रोल मॉडल हैं, जो ब्रांड्स को करोड़ों का फायदा पहुंचा रही हैं.
विदेशी लीग्स से हर तरह का अनुभव
भारतीय लड़कियां अब दुनिया भर में खेल रही हैं. 2024-25 में स्मृति मंधाना और रिचा घोष ऑस्ट्रेलिया की डबल्यूबीबीएल में, जबकि दीप्ति शर्मा इंग्लैंड की द हंड्रेड में चमकीं. हरमनप्रीत पहली भारतीय महिला थीं जिन्हें विदेशी टी20 लीग में साइन किया गया. ये लीग्स ने नई तकनीकें और कॉन्फिडेंस दिया. ओलंपिक्स डॉट कॉम की रिपोर्ट में कहा गया कि ये अनुभव विश्व कप जैसी बड़ी चुनौतियों के लिए भारतीय महिला खिलाड़ियों को तैयार कर रहे हैं.
बैकस्टेज के सितारे: कोच और स्टाफ की भूमिका
टीम के पीछे प्रोफेशनल बैकस्टाफ है – कोच अमोल मुजुमदार, फिजियो और एनालिस्ट. जाने कितने ही लोग महिला टीम पर खूब मेहनत कर रहे हैं. कल की जीत के बाद आपको उन सबके चेहते पर आंसू और खुशी एक साथ दिखी होगी. कोट मुजुमदार ने ‘एग्रेसिव’ अप्रोच अपनाई, सेमीफाइनल से पहले तीन लगातार हार के बाद भी टीम को मजबूत बनाए रखा. इनकी स्ट्रैटेजी ने मेंटल स्ट्रेंथ बढ़ाई. बिना इनके ये सफर अधूरा होता.
आक्रामक माइंडसेट: 300+ चेज का जज्बा
पुराने दिनों में सतर्क बल्लेबाजी पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन अब आक्रामक माइंडसेट है. अब ‘ब्रेव क्रिकेट’ का जमाना है. हरमनप्रीत ने एक मैच के बाद खुद कहा, “अब हम डरते नहीं, बहादुरी से खेलते हैं.” 2025 विश्व कप फाइनल में शेफाली-हरमनप्रीत की आक्रामक पारियां, जेमिमाह, अमनजोत और हरलीन जैसे प्लेयर्स की नई आक्रामकता, मिडिल ऑर्डर का टिकाऊपन, जिसे हिंदुस्तान का ‘न्यू एरा’ कहा गया. इसी बदलाव ने भारत को विश्व विजेता बनाया.
ये कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं, बल्कि हमारी महिला टीम के सशक्तिकरण की है. मिताली के 1000 रुपये से हरमनप्रीत के विश्व कप तक – भारतीय महिला क्रिकेट ने साबित किया कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती. लाखों लड़कियां अब गलियों में बल्ला थाम रही हैं, सपने बुन रही हैं. और ये यात्रा अभी जारी है, नई ऊंचाइयों की ओर.