सीहोर में कलेक्टर बालागुरू के. की अध्यक्षता में जल उपयोगिता समिति की बैठक हुई। इसमें जिले में सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और जल संरक्षण की स्थिति की समीक्षा की गई।
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कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जल वितरण ऐसा हो जिससे हर किसान के खेत तक सिंचाई का पानी समान रूप से पहुंचे और कोई भी क्षेत्र असिंचित न रहे।
बैठक में पेयजल प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। कलेक्टर ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल स्रोतों की नियमित निगरानी, मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि जिले में पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।
बैठक में बताया गया कि सीहोर जिले में कुल 289 सिंचाई योजनाएं हैं। इनकी कुल उपयोगी जल भंडारण क्षमता 230.11 मिलियन घन मीटर (मि.घ.मी.) है। 13 अक्टूबर 2025 तक इन योजनाओं में 206.19 मि.घ.मी. जल का संग्रहण हुआ है, जो कुल क्षमता का 89.60 प्रतिशत है।
इन योजनाओं में जल संसाधन संभाग सीहोर के अधीन 4 मध्यम परियोजनाएं (दोराहा, रामपुरा खुर्द, बनेटा मध्यम उद्वहन, घोघरा परियोजना), 66 लघु सिंचाई तालाब, 10 लघु उद्वहन सिंचाई योजनाएं, 1 नहर और 223 स्टॉपडेम-बैराज शामिल हैं।
जिले की कुल 289 सिंचाई योजनाओं से 51,716 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध है। वर्ष 2025-26 के लिए जल वाष्पीकरण और पेयजल आरक्षण को ध्यान में रखते हुए 51,384 हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इसके अतिरिक्त, जिले में कोलार वृहद परियोजना और बारना वृहद परियोजना से भी सिंचाई की जाती है।