Laura Wolvaardt: महिला वनडे विश्व कप 2025 खत्म हो गया है. भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने 52 साल में पहली दफा खिताब जीता. इससे पहले वो दो मौकों पर चूक गई थी. वहीं पहली बार फाइनल में पहुंची साउथ अफ्रीका का सपना टूट गया. उसे फाइनल में 52 रनों से हार मिली. नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में हुए मुकाबले में 299 रनों के टारगेट को चेज करने उतरी अफ्रीका 45.3 ओवरों में 246 रनों पर सिमट गई. इस हार ने अफ्रीकी टीम को तोड़कर रख दिया.
कप्तान लौरा वोल्वार्ट तो टूटकर बिखर गईं. उन्होंने खूब मेहनत करते टीम को फाइनल में पहुंचाया था. खिताबी जंग में 98 बॉल पर 11 चौके और 1 छक्के के साथ 101 रनों की पारी खेली, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला पाईं, क्योंकि किसी दूसरी बैटर का उन्हें भरपूर साथ नहीं मिला. मैच के बाद उन्होंने ये माना कि 300 रनों का टारगेट चेज हो सकता था, शुरुआथ भी बढ़िया थी, लेकिन आखिर में कुछ विकेट गंवाने के चलते अफ्रीका को हार मिली.
हार के बाद क्या बोलीं लौरा वोल्वार्ट?
साउथ अफ्रीका की कप्तान ने लौरा वोल्वार्ट फाइनल में मिली हार पर कहा ‘मुझे लगता है कि एक अच्छे विकेट पर 300 का स्कोर चेज होने लायक था. हमें सचमुच लगा कि हम इसे हासिल कर सकते हैं. हम काफ़ी समय तक चेज में थे, बस बहुत ज्यादा विकेट गंवा दिए.’
‘हमारी टीम ने पूरे टूर्नामेंट में बहुत शानदार क्रिकेट खेली’
लौरा वोल्वार्ट ने फाइनल में मिली हार के बाद भी टीम की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा ‘हमारी टीम ने पूरे टूर्नामेंट में बहुत शानदार क्रिकेट खेली. आज भारत ने हमसे बेहतर प्रदर्शन किया और वे जीत के हकदार थे. हार का दुख है, लेकिन अपनी टीम पर गर्व है. हम इससे सीखकर आगे और मजबूत होकर आएंगे.
टीम की हिम्मत और वापसी पर मुझे बहुत गर्व है- लौरा वोल्वार्ट
साउथ अफ्रीका ने टूर्नामेंट का पहला मैच गंवा दिया था. फिर उसे ऑस्ट्रेलिया से भी हार मिली थी. इसके बाद उसने वापसी की और फाइनल तक का सफर तय किया, इसे लेकर कप्तान ने कहा ‘हमने उन खराब मैचों को पीछे छोड़ दिया. हमारा प्रदर्शन या तो बहुत अच्छा रहा या बहुत खराब, लेकिन अच्छी बात ये थी कि अच्छे मैच ज्यादा थे. कई खिलाड़ियों ने जिम्मेदारी उठाई और बेहतरीन प्रदर्शन किया. टीम की हिम्मत और वापसी पर मुझे बहुत गर्व है.
बैटिंग और कप्तानी को कैसे बैलेंस किया?
इस टूर्नामेंट में लौरा सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी रहीं. उन्होंने 9 मैचों में 2 शतक और 3 फिफ्टी के दम पर 571 रन बनाए. सेमीफाइनल और फाइनल में शतक ठोका. इस टूर्नामेंट में कप्तानी और बैटिंग को कैसे बैलेंस किया? इस सवाल पर उन्होंने कहा ‘विश्व कप से पहले मेरा साल खास नहीं था और टूर्नामेंट की शुरुआत भी अच्छी नहीं हुई, लेकिन ज्यादा सोचने से चीजें और खराब होती हैं, इसलिए मैंने खुद को समझाया कि ये बस एक और मैच है. कप्तानी और बल्लेबाजी को अलग-अलग संभालने की कोशिश की. उसी ने मुझे खुलकर खेलने का मौका दिया. टूर्नामेंट के आखिरी हिस्से में मैं अपने नैचुरल गेम के साथ खेल पाई.
फाइनल में पहले गेंदबाजी का फैसला क्यों?
साउथ अफ्रीकी कैप्टन ने बताया कि ‘हम शुरुआत में थोड़ी मदद की उम्मीद कर रहे थे. विकेट पर थोड़ी तेजी थी, इसलिए फैसला सही लगा. रन चेज के दौरान काफी समय तक हम मैच में थे, लेकिन विकेट ज्यादा गिरते गए.हम लगातार स्कोरकार्ड देख रहे थे, लग रहा था भारत 350 तक जा सकता है, लेकिन हमारी गेंदबाजों ने जबरदस्त वापसी की. पूरे टूर्नामेंट में हमने डेथ ओवर्स में अच्छा किया. 300 स्कोर इस विकेट पर ठीक था और हमें लगा कि हम चेस कर सकते हैं.
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