Who is Amol Muzumdar: महिला वर्ल्ड कप में भारतीय क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया. उसने वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में साउथ अफ्रीका को हराकर पहली बार खिताब जीत लिया. इस जीत के साथ ही दशकों का इंतजार खत्म हुआ. अंजुम चोपड़ा, मिताली राज और झूलन गोस्वामी जैसी दिग्गजों ने इसका लंबे समय तक सपना देखा, लेकिन कभी खिताब नहीं जीत पाई. टीम इंडिया 2005 और 2017 में फाइनल खेली थी. तब उसे हार का सामना करना पड़ा था. इस बार सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया जैसी धाकड़ टीम को हराकर फाइनल में पहुंची हरमन एंड कंपनी ने कोई गलती नहीं की और अफ्रीकी टीम को रोमांचक मैच में शिकस्त दी.
भारत की जीत का सूत्रधार
भारत की इस जीत में कप्तान हरमनप्रीत, उपकप्तान स्मृति मंधाना, जेमिमा रोड्रिग्ज, शेफाली वर्मा, प्रतिका रावल और दीप्ति शर्मा सहित कई स्टार खिलाड़ियों की चर्चा हो रही है. इन प्लेयर्स के अलावा एक और दिग्गज की जिनकी चारों तरफ बात हो रही है, वो अमोल मजूमदार हैं. वह टीम इंडिया के कोच हैं और उन्होंने इस पूरे टूर्नामेंट के दौरान शांति से अपना काम किया और देश को ट्रॉफी दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई. खिलाड़ियों ने मैदान पर जश्न मनाया, लेकिन सभी की निगाहें इस जीत के सूत्रधार अमोल मजूमदार पर टिकी रहीं. एक ऐसा नाम जो लंबे समय से भारतीय क्रिकेट में समर्पण, धैर्य और अधूरेपन के लिए जाना जाता है.
चमत्कारिक रिकॉर्ड लेकिन नहीं मिला मौका
घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाने वाले मजूमदार का करियर चमत्कारिक रहा. उन्होंने 171 प्रथम श्रेणी मैचों में 30 शतक की मदद से 11167 रन बनाए. इसके अलावा 113 लिस्ट ए मुकाबलों में उनके नाम 3 शतकों की मदद से 3286 रन है. इसके अलावा 14 टी20 मैचों में 174 रन बनाए. इस तरह तीनों फॉर्मेट को मिलाकर डोमेस्टिक क्रिकेट में उनके 14627 रन और 33 शतक हैं. इसके बावजूद उन्हें कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर नहीं मिला. अपनी शानदार बल्लेबाजी और तेज क्रिकेटिंग दिमाग के लिए जाने जाने वाले मजूमदार को अक्सर अपनी पीढ़ी की सबसे कम आंकी गई प्रतिभाओं में से एक माना जाता था.
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वो इंतजार जो कभी खत्म नहीं खत्म हुआ
मजूमदार के शुरुआती दिनों की सबसे मार्मिक कहानियों में से एक वह समय है जब हैरिस शील्ड मैच में सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली के बीच 664 रनों की प्रसिद्ध साझेदारी के दौरान उन्होंने पैड पहने हुए इंतजार किया था. दो दिन के इंतजार से शुरू हुआ यह इंतजारर भारतीय टीम के लिए दो दशक लंबे इंतजार में बदल गया. वह कभी टीम इंडिया के लिए नहीं खेल पाए और कहा जाता है कि अगर वह भारत के लिए खेलते तो हो सकता था कि सचिन तेंदुलकर जैसे महान खिलाड़ी बन जाते.
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भारत का इंतजार खत्म कराया
हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था. दशकों बाद अमोल मजूमदार ने आखिरकार भारत को गौरव दिलाया. बल्ले से नहीं, बल्कि एक कोच के रूप में. उनकी रणनीतिक सोच, शांत नेतृत्व और महिला क्रिकेट की समझ ने भारतीय टीम को विश्व चैंपियन बना दिया. टीम इंडिया पहली बार चैंपियन बन गई. अपनी बारी का अंतहीन इंतजार करने वाले इस दिग्गज ने महिला क्रिकेट में भारत के इंतजार खत्म करने में सबसे अहम भूमिका निभाई. जीत के बाद कप्तान हरमनप्रीत ने उनके पैर भी छुए और इस पल ने सबको भावुक कर दिया.