भारत की सेकंड टॉप-स्कोरर… 308 रन बनाए फिर भी नहीं मिला मेडल, आईसीसी ने किया अन्याय?

भारत की सेकंड टॉप-स्कोरर… 308 रन बनाए फिर भी नहीं मिला मेडल, आईसीसी ने किया अन्याय?


Womens World Cup Final India vs South Africa: भारत की महिला टीम के लिए आखिरकार वह ऐतिहासिक दिन आ ही गया जब हरमनप्रीत कौर और उनके साथियों ने नवी मुंबई में दक्षिण अफ्रीका को हराकर वर्ल्ड कप 2025 का खिताब अपने नाम कर लिया.  पिछले कई दिल टूटने के बाद एक आईसीसी खिताब के लिए इंतजार खत्म हुआ और भारत ने खिताब पर कब्जा कर लिया. डीवाई पाटिल स्टेडियम में मिली इस जीत ने पूरे देश को जश्न मनाने के लिए सड़कों पर उतार दिया. ‘वूमेन इन ब्लू’ के लिए यह रात यादगार बन गई. जीत का जश्न मनाते खिलाड़ियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं.

वायरल हो गई ये तस्वीर

स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर का गले मिलना और तिरंगे में लिपटी हुई उनकी तस्वीर वायरल हो गई. इसी बीच, जीत के बाद एक और तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा. चोटिल खिलाड़ी प्रतिका रावल व्हीलचेयर पर नजर आईं. यहां तक कि एक पल के लिए अपनी टीम के साथियों के साथ नाचने के लिए खड़ी भी हो गईं. प्रतिका ने टीम के साथियों के साथ जश्न की रात मनाई, लेकिन सलामी बल्लेबाज होने के बावजूद उन्हें वह मेडल नहीं मिला जो भारतीय महिला टीम को उनकी जीत के लिए दिया गया था.

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प्रतिका बाहर और शेफाली का कमाल

प्रतिका रावल ने टूर्नामेंट के लीग चरण में सात मैच खेले और छह पारियों में 308 रन बनाकर भारत की दूसरी सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी थीं. टूर्नामेंट के आखिरी लीग मैच में बांग्लादेश के खिलाफ बारिश से प्रभावित खेल के दौरान टखने में गंभीर चोट लगने के कारण ओपनर बल्लेबाज को नॉकआउट मैचों से बाहर होना पड़ा. प्रतिका की जगह मुख्य टीम में शेफाली वर्मा को शामिल किया गया था और हरियाणा की इस खिलाड़ी ने फाइनल में बल्ले से 87 रन बनाकर और गेंद से दो महत्वपूर्ण विकेट लेकर बड़ा प्रभाव डाला. वह फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच भी बनीं.

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प्रतिका को क्यों नहीं मिला मेडल?

शेफाली टूर्नामेंट के लिए न तो मुख्य टीम में थीं और न ही रिजर्व में, लेकिन प्रतिका की चोट के बाद उन्हें बुलाया गया. आईसीसी नियमों के अनुसार, विजेता पदक स्क्वाड के 15 खिलाड़ियों को दिए जाते हैं, न कि उस खिलाड़ी को जिसे बदल दिया गया हो. इसी वजह से प्रतिका को मेडल नहीं मिला. जब तक वह स्क्वॉड का हिस्सा थीं, वह भारत की लाइन-अप में एक महत्वपूर्ण कड़ी थीं और न्यूजीलैंड के खिलाफ एक शतक भी जड़ा था.

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चोट के बाद भी टीम के साथ

जब सलामी बल्लेबाज से भारत की वर्ल्ड कप जीत के बारे में पूछा गया तो वह बहुत भावुक थीं. भारत की 52 रन की जीत के बाद उन्होंने ब्रॉडकास्टर्स से कहा, ”मैं इसे व्यक्त भी नहीं कर सकती. मेरे पास शब्द नहीं हैं. मेरे कंधे पर यह झंडा मेरे लिए बहुत मायने रखता है. अपनी टीम के साथ यहां होना, यह अवास्तविक है. चोटें खेल का हिस्सा हैं, लेकिन मैं बहुत खुश हूं कि मैं अभी भी इस टीम का हिस्सा बन सकी. मुझे यह टीम बहुत पसंद है. मैं व्यक्त नहीं कर सकती कि मैं क्या महसूस कर रही हूं. हमने वास्तव में यह कर दिखाया. हम इतने लंबे समय के बाद वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली भारतीय टीम हैं. पूरे भारत को इसका श्रेय मिलना चाहिए. ईमानदारी से कहूं तो, खेलने से ज्यादा देखना मुश्किल था. ”



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