Agriculture News: धनिया भारतीय रसोई का एक ऐसा हिस्सा है, जो हर घर की खुशबू और स्वाद दोनों बढ़ा देता है. इसकी पत्तियों से बनी चटनी, सब्जियों में डाली हरियाली और बीजों से बने मसाले – सब कुछ हमारे भोजन को खास बना देते हैं. यही वजह है कि धनिया की मांग पूरे साल बनी रहती है, और इसी मांग ने इसे किसानों के लिए कमाई का शानदार जरिया बना दिया है.
धनिया की खेती खास इसलिए मानी जाती है क्योंकि यह कम समय में तैयार होने वाली, कम लागत और अधिक मुनाफा देने वाली फसल है. किसानों को इसके लिए ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं होती, बस सही मौसम और उचित सिंचाई का ध्यान रखना जरूरी होता है.
सिर्फ 35 दिन में तैयार फसल
खंडवा जिले के किसान भागीरथ पटेल बताते हैं कि धनिया की फसल लगभग 35 से 40 दिनों में तैयार हो जाती है. यह एक ऐसी फसल है जिसे साल में 3 से 4 बार बोया जा सकता है. यानी, एक बार नहीं बल्कि हर मौसम में किसान इससे अच्छी आमदनी कमा सकते हैं. भागीरथ बताते हैं, “धनिया की खेती में ज्यादा खर्च नहीं होता. अगर बाजार में कीमतें अच्छी मिल जाएं तो किसान कुछ ही दिनों में लखपति बन सकता है. हमारे गांव के मांगीलाल पटेल हर साल 3 से 4 बार धनिया की खेती करते हैं और हर बार उन्हें बढ़िया मुनाफा मिलता है.’’
सही मौसम और खेती का तरीका
धनिया की खेती के लिए ठंड का मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है. नवंबर से दिसंबर के बीच इसकी बुवाई करने पर पौधे अच्छी तरह बढ़ते हैं और बीजों की क्वालिटी भी बेहतर मिलती है.खेती के लिए रेतीली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है, जिसमें पानी की निकासी ठीक हो. बीज बोने से पहले खेत को अच्छी तरह जोतकर उसमें गोबर की खाद या जैविक खाद डालना चाहिए, ताकि मिट्टी की उर्वरता बढ़े.
सिंचाई और देखभाल
धनिया की खेती में अधिक पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन समय-समय पर हल्की सिंचाई जरूरी है. बुवाई के 3-4 दिन बाद पहली सिंचाई करनी चाहिए और इसके बाद हर 7-10 दिन में हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए.ध्यान रहे कि खेत में पानी भरने न पाए, वरना पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं. खरपतवार नियंत्रण के लिए शुरुआती 15 दिनों में दो बार निराई-गुड़ाई करना काफी होता है.
बीज चयन और उत्पादन
धनिया की अच्छी फसल के लिए लोकल या सुधरी हुई किस्मों जैसे “राजेन्द्र धनिया-1”, “को-1”, “जीसी-2” या “आरसीआर-41” का चयन किया जा सकता है. एक एकड़ खेत में करीब 8 से 10 किलो बीज की जरूरत होती है.फसल जब पूरी तरह पक जाए तो पौधों को काटकर 4-5 दिन तक धूप में सुखाएं, फिर बीज निकाल लें. ये बीज मसाले के रूप में बेचे जा सकते हैं या अगली बुवाई के लिए रखे जा सकते हैं.
कम लागत, ज्यादा मुनाफा
धनिया की खेती में प्रति एकड़ करीब 12 से 15 हजार रुपये तक का खर्च आता है. अगर फसल अच्छी रही और बाजार में 100 रुपये किलो तक रेट मिले, तो किसान एक एकड़ से 70 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा सकता है.इतना ही नहीं, अगर धनिया की पत्तियों की बिक्री अलग से की जाए तो शुरुआती दिनों में ही कुछ अतिरिक्त आमदनी भी हो सकती है.
जैविक खेती से बढ़ेगी कीमत
आजकल जैविक उत्पादों की मांग बढ़ रही है. अगर किसान जैविक तरीके से धनिया की खेती करें, तो बाजार में उन्हें 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक कीमत मिल सकती है. यह न केवल फायदेमंद है बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बनाए रखता है.
किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण
मांगीलाल पटेल जैसे किसान बताते हैं कि धनिया की खेती ने उनके जीवन में हरियाली ला दी है. वे कहते हैं, “पहले हम गेहूं और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे, जिनमें ज्यादा समय और लागत लगती थी. लेकिन जब से हमने धनिया लगाना शुरू किया, हमारी आमदनी में बड़ा बदलाव आया है. अब खेत भी हरे रहते हैं और जेब भी.” धनिया की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे घर की छत पर या छोटे खेत में भी किया जा सकता है. शहरी गार्डनिंग में भी लोग अब धनिया उगा रहे हैं क्योंकि यह जल्दी बढ़ता है और हर दिन ताजा उपयोग किया जा सकता है.
अगर आप किसान हैं और कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का तरीका ढूंढ रहे हैं, तो धनिया की खेती आपके लिए एक सुनहरा अवसर है. कम मेहनत, कम लागत और अधिक आमदनी – यही है धनिया की खेती की असली पहचान. बस सही मौसम, मिट्टी और सिंचाई का ध्यान रखें, और सिर्फ 35 दिन में आपकी आमदनी में भी हरियाली छा जाएगी.