Farming Tips: रबी सीजन की 3 ‘कमाऊ’ फसलें, नवंबर में बोएं और मालामाल हो जाएं! बस करें इन चीजों की खेती

Farming Tips: रबी सीजन की 3 ‘कमाऊ’ फसलें, नवंबर में बोएं और मालामाल हो जाएं! बस करें इन चीजों की खेती


विंध्य क्षेत्र में धान (खरीफ) की कटाई का काम अब लगभग खत्म हो चुका है. किसान भाइयों ने अब कमर कस ली है और रबी फसलों (Rabi Crops) की बुवाई की तैयारी शुरू कर दी है. लेकिन हर किसान के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कौन सी फसल बोई जाए जिससे सही उत्पादन भी मिले और जेब में अच्छा मुनाफा भी आए?

आपकी इसी समस्या का समाधान लेकर आए हैं अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कृषि विभाग में पदस्थ सहायक प्राध्यापक डॉ. अतेंद्र गौतम. उन्होंने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि रबी की फसल विंध्य क्षेत्र में अक्टूबर और नवंबर माह के दौरान बोई जाती है, जो कम तापमान में पनपती है, और जिसकी कटाई फरवरी-मार्च में की जाती है. रबी की प्रमुख फसलों में आलू, मसूर, गेहूं, जौ, चना, मटर व सरसों शामिल हैं. वहीं सब्जियों में टमाटर, बैगन, गोभी, गाजर, पालक आदि उगाई जाती हैं. डॉ. गौतम ने नवंबर में सबसे ज़्यादा मुनाफा देने वाली तीन मुख्य फसलों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है.

1. गेहूं (Wheat)

गेहूं विंध्य क्षेत्र की सबसे मुख्य फसल है, जो हमारे जीवनयापन का आधार है और प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत है. गेहूं की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय मध्य अक्टूबर से नवंबर तक का है. गेहूं की फसल में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए उन्नत किस्मों जैसे करण नरेन्द्र, करण वंदना, पूसा यशस्वी, करण श्रिया और डीडीडब्ल्यू 47 का प्रयोग करना चाहिए. इसकी बुआई करते समय कम तापमान और फसल के पकते समय शुष्क और गर्म वातावरण की ज़रूरत होती है. खेती के लिए मटियार दोमट भूमि को सबसे सर्वोत्तम माना जाता है, जिसका पीएच मान 6 से 8 तक होना चाहिए. बुवाई से पहले बीज की अंकुरण क्षमता की जांच और फफूंदी नाशक दवा से उपचार करना ज़रूरी है. गेहूं की फसल बुवाई के 20 से 25 दिन के बाद पहली सिंचाई करना चाहिए. कुल 3 से 4 सिंचाई की आवश्यकता होती है.

2. चना (Gram)

चना रबी सीजन की एक महत्वपूर्ण दलहनी फसल है. पोषक तत्वों से भरपूर चना का सबसे अधिक उत्पादन करने वाला राज्य मध्य प्रदेश ही है. चना की बुवाई करने के लिए मध्य अक्तूबर से नवंबर महीना सबसे उपयुक्त होता है. इसकी खेती मध्यम वर्षा (60-90 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा) और सर्दी वाले क्षेत्रों में अच्छी होती है. चना की खेती दोमटमटियारा मिट्टी में सफलतापूर्वक की जा सकती है, जिसका पीएच मान 6 से 7.5 उपयुक्त रहता है. अधिक उत्पादन के लिए उन्नत किस्मों जैसे पूसा-256, केडब्लूआर-108, डीसीपी 92-3, आधार (आरएसजी-936) आदि की बुवाई करें. ध्यान रखें, खेत में पानी का जमाव न होने दें और बुआई के 30 से 35 दिन बाद निराई-गुड़ाई अवश्य करें.

3. सरसों (Mustard)

सरसों रबी सीजन की मुख्य तिलहनी फसल है, जिसकी खेती सिंचित और असिंचित दोनों ही तरह के खेतों में की जा सकती है. खेती के लिए 25 से 30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान और दोमट भूमि सर्वोत्तम होती है. सरसों की उन्नत किस्मों में पूसा बोल्ड, क्रान्ति, पूसा जयकिसान (बायो 902) और पूसा विजय प्रमुख हैं. सरसों की फसल में पहली सिंचाई 25 से 30 दिन के बाद करना चाहिए. इसकी खेती में कुल 2 से 3 सिंचाई ज़रूरी होती है, लेकिन सबसे ज़रूरी बात यह है कि फलियों में दाना भरने की अवस्था में सिंचाई नहीं करनी चाहिए, वरना फसल उत्पादन प्रभावित होता है. खरपतवार नियंत्रण के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करना आवश्यक है.



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