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Sagar News: मध्य प्रदेश सरकार ने काले हिरणों और नीलगायों के संरक्षण के लिए अफ्रीका की रेस्क्यू टीम बुलाकर हेलीकॉप्टर से उन्हें सुरक्षित एरिया में छोड़ा. वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 150 काले हिरण छोड़े गए. काले हिरणों के लिए उपयुक्त घास के मैदान और भारतीय भेड़िया के कारण प्राकृतिक संतुलन बनाए रखा जाएगा. निगरानी टीम उनकी हर गतिविधि मॉनिटर करेगी.
सागर. एंटीलोप वंश के एकमात्र जीवित प्राणी काला हिरण को लेकर IUCN (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन का नेचर) ने चिंता जताई है. भविष्य में उनके अस्तित्व पर बड़ा संकट है. ऐसे में वन्य जीव संरक्षण की दृष्टि से मध्य प्रदेश में बड़ा काम किया जा रहा है, जिन क्षेत्रों में काले हिरण तेजी से कम हो रहे हैं. शिकारियों के निशाने पर है. उन क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है और यहां से विदेशी एक्सपर्ट टीमों के द्वारा हेलीकॉप्टर और बोमा की मदद से रेस्क्यू पर सुरक्षित अभ्यारण ,टाइगर रिजर्व एरिया में छोड़ा जा रहा है.
मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा वन्य जीवों की संरक्षण के लिए अफ्रीका से रेस्क्यू टीम बुलवाकर मालवा और निमाड़ क्षेत्र से काले हिरण और नीलगाय को हेलीकॉप्टर से खदेड़ा गया, जिन्हें बोमा में ले गए, और यहां से अलग-अलग प्रोटेक्टिव एरिया में छोड़ा जा रहा. इसी क्रम में प्रदेश के सबसे बड़े वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 150 काले हिरण छोड़े गए हैं. यहां पर घास के बड़े-बड़े और खुले मैदान होने की वजह से इस तरह के वन्य जीव को अनुकूल माहौल मिलता है. एक तरह से यह काले हिरणों का पुराना प्राकृतिक आवास भी है, तो दूसरा यहां पर भारतीय भेड़िया भी बड़ी तादाद में है, जो इनका पसंदीदा भोजन होते हैं साथ ही साल 2026 तक यहां पर चीता भी आने वाले हैं, जिनके आने से पहले भोजन का इंतजाम कर दिया गया है.
वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर ए ए अंसारी ने बताया मध्य प्रदेश शासन और मध्य प्रदेश वन विभाग वर्तमान समय में वन्य जीव संरक्षण और प्रबंधन में पूरे देश में अव्वल नंबर पर है, मालवा क्षेत्र में काले हिरणों को नुकसान पहुंचाया जा रहा, तो इसको लेकर शासन ने निर्णय लिया कि यहां काले हिरण और नीलगाय को पकड़कर सुरक्षित एरिया में छोड़ा जाएगा, इसके लिए अफ्रीका की टीम आई हुई है. रेस्क्यू के बाद नौरादेही रेंज में छोड़ा गया है.
एंटीलोप पापुलेशन हमारे यहां बड़े घास के मैदान है, घास छोटी है हाइट भी छोटी है. इसको काले हिरण पसंद करते हैं अगर बहुत पहले इसका इतिहास देखेंगे तो सेंट्रल मध्य प्रदेश का या सेंट्रल इंडिया का, तो यहां पर काले हिरण काफी संख्या में पाई जाती थी तो यह हमारे लिए अच्छा रहेगा कि उनकी पापुलेशन बढ़ेगी.
काले हिरण छोड़ने के बाद 6 टीम मॉनिटरिंग के लिए बनाई गई है जो इनके एरिया को देख रही है कि यह किस तरफ जा रहा है कौन से घास के मैदान उनके लिए पसंद आ रहे. एक महीने तक निगरानी की जाएगी.
Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two and Half Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has…और पढ़ें
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