महिलाओं ने लैंड पुलिंग बिल का विरोध किया।
उज्जैन सहित अन्य शहरों में लैंड पुलिंग को लेकर सरकार के फैसले के खिलाफ बुधवार को भारतीय किसान संघ की महिला विंग के साथ साथ 12 जिलों से आई महिला कार्यकर्ता ने करीब 300 से अधिक महिलाओं ने कार्तिक के स्नान के दौरान शिप्रा नदी किनारे राम घाट पर प्रदर्शन
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लैंड पुलिंग एक्ट के विरोध में महिलाएं प्रदर्शन करते हुए।
साल 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ कुम्भ मेले की जमीन पर आध्यात्मिक नगरी बनाने के लिए लैंड पुलिंग करने का मामला फिर से गरमा गया है। किसान लैंड पुलिंग का लगातार विरोध कर रहे हैं। हाल ही में उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने उज्जैन में खिलचीपुर गांव में 10 किसानों के साथ लैंड पुलिंग मॉडल पर सड़क-सीवरेज जैसी व्यवस्थाओं पर तैयारी शुरू कर दी है। शुरुआती तौर पर मेला क्षेत्र में 17 गावों की 2378 हेक्टेयर जमीन पर आध्यात्मिक सिटी बनाने का प्लान था।
लैंड पुलिंग का विरोध करने के लिए बुधवार को उज्जैन के रामघाट पर पहुंची महिलाओं ने विरोध में नारेबाजी की। यहां पर एक यज्ञ किया और सरकार से लैंड पुलिंग योजना को वापस लेने की मांग की। इसके बाद सभी भारतीय किसान संघ मालवा प्रांत का महिला सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें महिलाओं ने किसी भी कीमत पर अपनी जमीन देने से इन्कार कर दिया।
भारतीय किसान संघ की अखिल भारतीय महिला प्रमुख मंजू दीक्षित ने बताया कि मातृशक्ति सम्मेलन में हर बार हम दीप दान का कार्यक्रम करते आ रहे है। आज जो सम्मेलन हुआ है वो भूमि अधिग्रहण और लेंड पुलिंग को लेकर किया है। सरकार मनमानी कर किसानों के साथ अन्याय कर रही है। इसके विरोध में आज मातृ शक्ति इकट्ठा हुई है। हम यहाँ से चेतावनी दे रहे है की किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।
भारतीय किसान संघ महिला विंग की सयोंजिका वैशाली मालवीय ने बताया कि कार्यक्रम के बाद हम महाकाल मंदिर में ज्ञापन देने भी जाएंगे , किसानों को साथ सरकार अन्याय कर भूमि अधिग्रहण और लैंड पुलिंग कर रही हैं। हमारी मांगे नहीं मानी गई तो जल्द ही आंदोलन होगा।