समस्याओं का हल नहीं…जनसुनवाई में आवेदनों की माला पहन पहुंचा बुजुर्ग, फिर…

समस्याओं का हल नहीं…जनसुनवाई में आवेदनों की माला पहन पहुंचा बुजुर्ग, फिर…


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Ujjain News: अंबालाल परमार अपने गले में 25 आवेदनों की माला पहनकर जनसुनवाई में पहुंचे थे. माला के हर पन्ने पर जनता की समस्याएं लिखी थीं और इनके जरिए समस्याओं के हल की मांग की गई थी. वह जनसुनवाई में आवेदनों की माला इसलिए पहनकर पहुंचे थे ताकि जनता की आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंच सके और समस्याओं का समाधान हो सके.

उज्जैन. मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा तहसील में जनसुनवाई के दौरान एक अजीबोगरीब नजारा देखने को मिला. करीब 70 साल के समाजसेवी अंबालाल परमार ने अनोखे अंदाज में प्रशासन को जगाने की कोशिश की, जिससे पूरे शहर में अब अंबालाल की चर्चा होने लगी. दरअसल मामला उज्जैन जिले से करीब 50 किलोमीटर दूर नागदा तहसील का है, जहां जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जब बड़े-बड़े अफसर अपनी कुर्सी से खड़े हो गए. अंबालाल परमार एक समाजसेवी हैं और वह नागदा के पास भड़ला गांव के रहने वाले हैं. मंगलवार को उन्होंने जनसुनवाई के दौरान अपने गांव से नागदा तक 15 किलोमीटर की पदयात्रा की. वह नागदा के एसडीएम कार्यालय के बाहर पहुंचे. करीब डेढ़ घंटे तक धरने पर बैठने के बाद उन्होंने जनसुनवाई में मौजूद एसडीएम को एक खास आवेदन माला भेंट की.

दरअसल अंबालाल परमार गले में आवेदनों की माला पहनकर पहुंचे थे. यह कोई मामूली माला नहीं बल्कि वो माला थी, जिसके हर पन्ने पर जनता की समस्याएं लिखी थीं और इनके जरिए समस्याओं के हल की गुहार लगाई गई थी. जनसुनवाई के दौरान उन्होंने गले में 25 आवेदनों की माला पहनी थी ताकि जनता की आवाज प्रशासन तक पहुंच सके और समस्याओं का समाधान जल्द हो सके.

स्कूल भवन के निर्माण की मांग
अंबालाल परमार की 25 आवेदनों की माला में सबसे बड़ी मांग उनके अपने गांव भड़ला में नए स्कूल भवन के निर्माण की है. उनका कहना है कि आज भी गांव के बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं. वह चाहते हैं कि हर बच्चे को शिक्षा का हक मिले और वह भी सम्मानजनक माहौल में.

1965 से जारी है समाजसेवा का सफर
अंबालाल परमार ने समाजसेवा को ही अपनी जीवन यात्रा बना लिया है. साल 1965 से लेकर आज भी उनका यह सफर बदस्तूर जारी है. देश के 18 प्रांतों का भ्रमण कर चुके परमार ने 235000 किलोमीटर की पदयात्रा से समाज को जागरूक किया है. उनकी प्रेरणा से उज्जैन और इंदौर संभाग में 2000 से ज्यादा बेटियों की शादियां सामूहिक विवाह सम्मेलन के जरिए हुईं, वो भी कम खर्च और सामाजिक एकता के संदेश के साथ. उनका मानना है कि अगर आवाज नहीं उठाई जाएगी, तो परिवर्तन कैसे होगा. उनकी यह अनूठी माला केवल कागजों की नहीं बल्कि जनता की उम्मीदों की कहानी है.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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