आप भी करना चाहते हैं नर्मदा परिक्रमा? जान लें जल-तट परिवर्तन के साथ ये 10 नियम

आप भी करना चाहते हैं नर्मदा परिक्रमा? जान लें जल-तट परिवर्तन के साथ ये 10 नियम


खरगोन. भारत में नर्मदा ऐसी एकमात्र नदी है, जिसकी पूर्ण परिक्रमा (Narmada Parikrama) की जाती है. यह परिक्रमा देवउठनी एकादशी से शुरू होकर लगभग 8 महीने तक चलती है. हर साल लाखों श्रद्धालु और संतजन आस्था के साथ नर्मदा के दोनों तटों की परिक्रमा करते हैं. नर्मदा का उद्गम स्थल अमरकंटक है, जहां से यह नदी मध्य प्रदेश के मध्य के कई जिलों खंडवा, खरगोन और बड़वानी से होते हुए महाराष्ट्र फिर गुजरात की सीमा में प्रवेश करती है और अंततः अरब सागर में मिल जाती है.

क्या है जल परिवर्तन का नियम?
नर्मदा परिक्रमा के जानकार दिलीप कर्पे लोकल 18 को बताते हैं कि श्रद्धालु परिक्रमा प्रारंभ करते समय ओंकारेश्वर से नर्मदा का जल एक बोतल में भरते हैं. यह जल केवल मंदिरों में जलाभिषेक के लिए प्रयोग किया जाता है. नर्मदा के दक्षिण तट से परिक्रमा शुरू होती है. करीब 1600 किलोमीटर की यात्रा पूरी करने के बाद श्रद्धालु समुद्र तट तक पहुंचते हैं. यहां वे विमलेश्वर महादेव को बोतल का आधा जल अर्पित करते हैं और बदले में समुद्र का जल बोतल में भर लेते हैं. इसके बाद जब परिक्रमा अमरकंटक पहुंचती है, तो यहां भी कुंड में बोतल का आधा जल अर्पित किया जाता है और फिर नर्मदा का जल पुनः भर लिया जाता है. इसी प्रक्रिया को जल परिवर्तन कहा जाता है. अंत में परिक्रमा पूर्ण होने पर यह जल ममलेश्वर और ओंकारेश्वर महादेव को अर्पित किया जाता है. शेष जल आगे गंगा पूजन और परिवार को बांटने में उपयोग किया जाता है.

क्या है तट परिवर्तन की प्रक्रिया?
उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा में तट परिवर्तन की विशेष विधि होती है. नर्मदा प्रदक्षिणा पुस्तक के अनुसार, दक्षिण तट से परिक्रमा शुरू करने के बाद श्रद्धालु समुद्र तट तक पहुंचते हैं और वहां से उत्तर तट की यात्रा प्रारंभ करते हैं. यह परिवर्तन पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से किया जाता है. परंपरा के अनुसार, परिक्रमा के दौरान दो बार तट परिवर्तन होता है. पहला- ममलेश्वर से समुद्र तक दक्षिण तट और फिर दूसरा- समुद्र से अमरकंटक होते हुए पुनः ममलेश्वर लौटने पर उत्तर तट की और आते हैं.

नर्मदा परिक्रमा के जरूरी नियम

1. जहां से परिक्रमा शुरू करें, वहीं समाप्त करें. परिक्रमा पूर्ण होने पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में जल अर्पित करना आवश्यक है.

2. नदी पार करना वर्जित है. नर्मदा को लांघना या तैरकर पार करना परिक्रमा धर्म के विरुद्ध है.

3. सिर्फ दिन में यात्रा करें. परिक्रमा दिन के उजाले में की जाती है. सूर्यास्त के बाद परिक्रमा नहीं करते हैं.

4. संकल्प पूजन का पालन अनिवार्य है. जो नियम संकल्प के समय लिए गए हों, उनका पालन करना जरूरी है.

5. सुबह-संध्या नर्मदा स्नान, पूजन और आरती अनिवार्य मानी जाती है.

6. भिक्षा नहीं मांगनी है. यात्रा के दौरान किसी से कोई सामग्री नहीं मांगी जाती है.

7. सात्विक भोजन और भूमि पर विश्राम करें. परिक्रमावासी सात्विक आहार लेते हैं और जमीन पर ही सोते हैं.

8. बाएं तट से प्रारंभ करें. नर्मदा परिक्रमा हमेशा नदी के बाएं (दक्षिण) तट से शुरू होती है.

9. केवल तट, आश्रम या धर्मशाला में विश्राम करें. अन्य किसी स्थान पर रुकना वर्जित माना जाता है.

10. साधु-संतों के लिए तीन चातुर्मास हैं. परिक्रमा के दौरान तीन चातुर्मास का पालन आवश्यक है.



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