हादसे के बाद बुधवार को 78 वर्षीय शंकरलाल की मौत हो गई।
भोपाल की मानव बिहार कॉलोनी में हाईटेंशन की चपेट में आने से 78 वर्षीय शंकरलाल विश्वकर्मा की मौत हो गई थी। घर की दूसरी मंजिल पर हुई थी। हादसे के बाद उनके बेटे दीपक ने दैनिक भास्कर को बताया कि ग्यारस के दिन हर साल की तरह पिता पूजा के लिए गन्ने लेकर घर आ
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1 नवंबर की रात को करीब 8 बजे मैं, चार साल का बेटा विनय पिता के साथ छत पर गए थे। हमारे घर की दूसरी मंजिल स्थित छत के बेहद करीब से हाईटेंशन लाइन गुजरी है। पिता ने छत पर पूजा के लिए गन्नों को खड़ा किया। गन्ने का पत्ता लाइन से टकरा गया।
इससे अचानक तेज शार्ट सर्किट हुआ और आग की चिंगारियां गिरने लगीं। पिता तेज शॉक लगने के बाद करीब दो-तीन मिनट तक शॉक की चपेट में रहे। मैंने उन्हें बचाने का प्रयास किया। मेरे हाथ भी झुलस गए। मेरा 4 वर्षीय बेटा विनय पिता के करीब था, शॉक के से निकली चिंगारियां उसके चेहरे पर गिरीं। वह भी झुलस गया है।
हाईटेंशन लाइन घर के नजदीक से निकली है।
5 दिन बाद पिता की मौत, बेटा खतरे से बाहर दीपक ने बताया कि बुधवार को 5 दिन चले इलाज के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दी गई। उसकी हालत खतरे से बाहर है। हादसे के बाद बच्चा बेहद डरा हुआ है। लगातार घटना की याद कर रो रहा है।
बुधवार को पांच दिन चले इलाज के बाद पिता शंकरलाल की मौत हो गई। पूरा परिवार इस हादसे के बाद सदमे में हैं। बुधवार को पिता का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
जिस हाईटेंशन लाइन से हादसा हुआ, वह एक नहीं एक दर्जन से अधिक घरों के ऊपर से गुजरी है। इसे कवर करना अथवा शिफ्ट किया जाना बेहद जरूरी है। आगे भी इसी तरह की घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है।

शंकरलाल का बुधवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया।
इसी साल बेटे का स्कूल में कराया दाखिला हादसे में झुलसे विनय का इसी साल घर के करीब एक प्राइवेट स्कूल में दाखिला कराया गया है। नर्सरी में पढ़ने वाला विनय हादसे के बाद से सदमे में है, लगातार दादा की याद कर बिलख रहा है। वहीं, शंकरलाल के बेटे दीपक भी हादसे के बाद से सदमे में हैं, घटना के संबंध में याद कर उनकी आंखें नम हो जाती हैं।
दस फीट की दूरी पर है लाइन मृतक के भतीजे सुनील कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि बड़े पिता मदनलाल पूजा के लिए गन्ने की झोपड़ी बना रहे थे। तभी गन्ना हाइटेंशन से टकराया और हादसा हुआ। लाइन घर के बेहद करीब है, रहवासी पूर्व में कई बार इसे शिफ्ट करने एमपीएसईबी में शिकायत कर चुके हैं। लेकिन, इस लाइन को शिफ्ट नहीं किया गया है। जिस कारण हादसा हो गया।
फर्नीचर बनाने का काम करते थे शंकरलाल शंकर लाल पूर्व में फर्नीचर बनाने का काम करते थे। बीते करीब 15 सालों से उन्होंने पूरा कारोबार बेटे को सौंप दिया था। बेटे दीपक ने पिता के काम को आगे बढ़ते हुए फर्नीचर बनाने की ठेकेदारी शुरू की। वे ऑफिस और घरों के फर्नीचर बनाने का काम करते हैं।