इंदौर. मध्य प्रदेश की धड़कन है इंदौर और इस धड़कन में बसा है मालवा निर्माण सहित पूरे मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक खजाना, जिसमें दिखाई देती है यहां की अदभुत संस्कृति. हम बात कर रहे हैं इंदौर के केंद्रीय संग्रहालय की, जहां आपको सैकड़ों साल पुरानी सभ्यता का जीवंत अहसास होगा. यहां आपको कई पुरानी मूर्तियां, सिक्के, पाषाण काल के ताम्रपत्र और आदिमानवों के जीवन के बारे में पता चलता है. इस संग्रहालय को होलकर राजवंश के दौर में 1923 में ‘नररत्न मंदिर’ के रूप में शुरू किया गया था.
प्रागैतिहासिक काल के औजार
यहां प्रागैतिहासिक काल के औजार, जीवाश्म और सिंधु घाटी सभ्यता (मोहनजोदड़ो से प्राप्त) की दुर्लभ वस्तुएं प्रदर्शित हैं. यह गैलरी बताती है कि मानव सभ्यता ने मालवा क्षेत्र में कैसे आकार लिया. यहां पंच-मार्क सिक्कों से लेकर गुप्त, कुषाण, परमार, मुगल और होलकर काल तक की मुद्राओं का क्रमबद्ध संग्रह है. साथ ही पत्थर के शिलालेख और ताम्रपत्र रखे गए हैं, जो तत्कालीन सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक व्यवस्था के बारे में बताते हैं. राजा पत्थर पर लिख जमीन बांटते थे.
यहां होलकर राजाओं द्वारा उपयोग की गईं ढाल, तलवारें, भाले और अलग-अलग हथियार प्रदर्शित हैं, जो युद्ध कौशल और सैन्य इतिहास की झलक देते हैं. यह मध्य प्रदेश के समृद्ध अतीत का एक ऐसा आईना है, जिसे देखने के बाद आप इस क्षेत्र की सांस्कृतिक गहराई को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे. अगर आप इस संग्रहालय को देखना चाहते हैं, तो इंदौर GPO के पास ए.बी. रोड पर यहां आप रविवार से मंगलवार के बीच सुबह 10 से 5 बजे तक आ सकते हैं.