बालाघाट जिले में नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तैनात सीआरपीएफ और हॉकफोर्स के आधा दर्जन से अधिक जवान मलेरिया से बीमार हो गए हैं। इन सभी जवानों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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डॉक्टरों के अनुसार, उनकी हालत में सुधार हो रहा है। नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों को दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर उन्हें नक्सलियों से निपटना होता है, वहीं दूसरी ओर जंगली इलाकों में मच्छर और मधुमक्खी जैसे कीटों के हमले से वे बीमार पड़ रहे हैं।
मामला दक्षिण बैहर क्षेत्र का है
यह घटना दक्षिण बैहर क्षेत्र की है, जहां पुलिस चौकी के साथ-साथ हॉक फोर्स, सीआरपीएफ और कोबरा जवानों के कैंप स्थापित हैं। यह इलाका घने जंगलों और पहाड़ों से घिरा हुआ है। नक्सलियों की सूचना पर जवानों को अक्सर लंबी दूरी तक सर्चिंग अभियान पर जाना पड़ता है, जहां उन्हें भूख-प्यास के साथ-साथ मच्छरों के प्रकोप का भी सामना करना पड़ता है।
कुछ दिन पहले मधुमक्खी ने हमला किया था
हाल ही में, सर्चिंग के दौरान मधुमक्खी के काटने से कुछ जवानों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अब शुक्रवार को, आधा दर्जन से अधिक जवानों को मलेरिया के लक्षण पाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया है।
डॉ. निलय जैन ने बताया कि दक्षिण बैहर क्षेत्र के कई गांवों में भी मलेरिया का प्रकोप है, जिससे ग्रामीण भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने पुष्टि की कि भर्ती किए गए सुरक्षाबलों के जवानों की स्थिति स्थिर है और वे स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।
हालांकि, जवानों का इस तरह बीमारी की चपेट में आना नक्सल विरोधी सर्चिंग अभियानों को भी प्रभावित कर सकता है।
इन जवानों का चल रहा इलाज
अस्पताल में मलेरिया से पीड़ित जिन जवानों का इलाज चल रहा है, उनमें शिवशंकर यादव, अनेश उईके, गजानंद गोवारे, उमरकर धनंजय, शुभम, रवि कुमार और सचिन सिरसाठे शामिल हैं।