बिहार में RJD की बैसाखी पर टिकी कांग्रेस, क्या राहुल गांधी भूल गए पचमढ़ी का वादा?

बिहार में RJD की बैसाखी पर टिकी कांग्रेस, क्या राहुल गांधी भूल गए पचमढ़ी का वादा?


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Rahul Gandhi Pachmadhi Visit: बिहार चुनाव के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी दो दिन के दौरे पर मध्य प्रदेश के पचमढ़ी पहुंचे हैं. यहां वे कांग्रेस के जिला अध्यक्षों को सत्ता, संगठन और ‘कथनी-करनी’ के बीच संतुलन सिखाएंगे. यह वही पचमढ़ी है, जहां 1998 में कांग्रेस ने ‘एकला चलो’ की नीति अपनाई थी.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी पचमढ़ी शिविर में शामिल होंगे.

भाेपाल/पचमढ़ी.  कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बिहार चुनाव के बीच दो दिन के दौरे पर मध्य प्रदेश के पचमढ़ी पहुंचे रहे हैं. यहां वे कांग्रेस के जिला अध्यक्षों को सत्ता, संगठन और ‘कथनी-करनी’ के बीच संतुलन सिखाएंगे. यह वही पचमढ़ी है, जहां 1998 में कांग्रेस ने ‘एकला चलो’ की नीति अपनाई थी. अब राहुल गांधी उसी जगह पार्टी को मजबूती और वैचारिक स्पष्टता का पाठ पढ़ाने वाले हैं. हालांकि बिहार चुनाव में कांग्रेस, आरजेडी की बैसाखी पर टिकी हुई है; दूसरी तरफ पचमढ़ी में कांग्रेस ठीक विपरीत तेवर दिखा रही है.

बिहार चुनाव में गठबंधन की मजबूरी के बीच राहुल गांधी का यह प्रशिक्षण शिविर खास मायने रखता है. कांग्रेस 71 जिला अध्यक्षों को दस दिन तक संगठन सृजन कार्यक्रम के तहत रहकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है. अब सवाल यह है-क्या कांग्रेस फिर से अपने पैरों पर खड़ी हो पाएगी या गठबंधन की राजनीति उसका सहारा बनी रहेगी? पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी मध्य प्रदेश के पचमढ़ी पहुंच रहे हैं. यहां वे कांग्रेस के 71 जिला अध्यक्षों को संगठन, सत्ता और ‘कथनी-करनी’ में फर्क न करने का पाठ पढ़ाएंगे. वे दो दिनों तक प्रशिक्षण शिविर में रहेंगे. यह कांग्रेस के “संगठन सृजन” कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पार्टी की जमीनी संरचना को मजबूत करना है.

पचमढ़ी की विरासत और विरोधाभास, कांग्रेस का स्‍टैंड क्‍या होगा?
पचमढ़ी कांग्रेस के इतिहास में विशेष महत्व रखता है. यहीं 1998 में सोनिया गांधी के नेतृत्व में ‘पचमढ़ी संकल्प’ पारित हुआ था, जिसमें पार्टी ने ‘एकला चलो’ यानी बिना गठबंधन के आगे बढ़ने की नीति अपनाई थी. लेकिन 2003 के शिमला चिंतन शिविर में इस नीति में बदलाव करते हुए कांग्रेस ने समान विचारधारा वाले दलों से गठबंधन करने का निर्णय लिया.आज, राहुल गांधी उसी पचमढ़ी में ‘अडिग रहने’ और ‘सिद्धांतों पर टिके रहने’ की बात कर रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह एक दिलचस्प विरोधाभास है क्योंकि बिहार में कांग्रेस ने हाल ही में गठबंधन की मजबूरी के चलते आरजेडी के साथ सीमित सीटों पर चुनाव लड़ा.

बिहार चुनाव के सबक से कांग्रेस ने क्‍या सीखा?
बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा. पार्टी को आरजेडी की शर्तों पर सीमित सीटों पर उतरना पड़ा और उसकी छवि ‘जूनियर पार्टनर’ की बन गई. राहुल गांधी ने खुद कहा था कि कांग्रेस ‘अकेले लड़ेगी’, लेकिन संगठन की कमजोरी ने पार्टी को गठबंधन की बैसाखी थमाने पर मजबूर कर दिया.

पचमढ़ी प्रशिक्षण शिविर का एजेंडा
कांग्रेस का यह प्रशिक्षण शिविर जिला अध्यक्षों को वैचारिक रूप से तैयार करने और जनता से सीधा संवाद बढ़ाने की पहल है. राहुल गांधी सत्य, संविधान और जनविश्वास के मुद्दों पर पार्टी को फिर से केंद्रित करने की कोशिश कर रहे हैं. मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस के नेता यह दम भर रहे हैं कि संगठन सृजन कार्यक्रम को खुद राहुल गांधी की निगरानी में शुरू किया गया है. इसके बाद इसे पूरे देश में किया जाएगा.

Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प… और पढ़ें

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