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JNU Election Result 2025: जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव में दानिश अली ने जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर जीत हासिल की है. जिसके बाद वह सुर्खियों में हैं. आइए आपको बताते हैं कि ये दानिश अली हैं कौन और कहां की रहने वाली हैं?
JNU Election Result 2025: जेएनयू के स्टूडेंट्स यूनियन इलेक्शन 2025 के रिजल्ट आ गए हैं और लेफ्ट यूनिटी ने फिर कमाल कर दिया है.इस एलायंस में AISA, SFI और DSF शामिल हैं. लेफ्ट यूनिटी ने चारों बड़े पद जीत लिए. AISA की अदिति मिश्रा प्रेसिडेंट बनीं तो वहीं SFI की के गोपिका ने वाइस प्रेसिडेंट का चुनाव जीता.DSF के सूरज यादव ने जनरल सेक्रेटरी और AISA की दानिश अली जॉइंट सेक्रेटरी चुनी गईं. ABVP के जॉइंट सेक्रेटरी पद के प्रत्याशी अनुज दामरा को 1,762 वोट मिले, जबकि दानिश को 1,991 वोट.मतदान 6 नवंबर को हुआ था जिसमें 67 फीसदी मतदाताओं ने वोटिंग की थी.यह प्रतिशत पिछले साल से थोड़ा कम था.आइए आपको बताते हैं कि जॉइंट सेक्रेटरी का चुनाव जीतने वाली दानिश अली कौन हैं?
Who Is Danish Ali: छोटे गांव से जेएनयू की लीडर तक
अब आइए जानते हैं कि दानिश अली हैं कौन? तो आपको बता दें कि दानिश अली पहली साल की पीएचडी स्कॉलर हैं.वह सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज (CHS)से पढाई कर रही है.दानिश मूल रूप से मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के छोटे से गांव बंदरबरू की रहने वाली हैं. वहीं के पास के शहर गदरवाड़ा में ही उनकी स्कूलिंग हुई.इसके अलावा उन्होंने खेलों में भी नाम कमाया.थ्रोबॉल और क्रिकेट में वह स्टेट लेवल की प्लेयर रहीं.दानिश के पापा रिटायर्ड गवर्नमेंट स्कूल टीचर हैं और मम्मी अभी एक गवर्नमेंट स्कूल की प्रिंसिपल हैं.
इतिहास की पढ़ाई और पॉलिटिक्स का सफर
दानिश ने SGTB खालसा कॉलेज से हिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया फिर 2022-24 बैच में जेएनयू में मास्टर्स जॉइन की. अब वह यहां से पीएचडी कर रही हैं.दानिश हिस्टोरिकल नैरेटिव्स पर रिसर्च कर रही हैं, लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ स्टूडेंट पॉलिटिक्स में भी पूरी ताकत लगाती हैं. जेएनयू जैसे कैंपस में जहां फ्रीडम ऑफ स्पीच और इंटेलेक्चुअल डिबेट की परंपरा है वहां दानिश के इस बैकग्राउंड ने उन्हें मजबूत बनाया है.वो मानती हैं कि इतिहास सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि आज की स्ट्रगल में भी छिपा है.
229 वोटों से जीती चुनाव
दानिश लेफ्ट पॉलिटिक्स की सबसे रेडिकल ब्रांच की रिप्रेजेंट करती हैं.वह फ्यूडल स्ट्रक्चर्स और कास्ट सिस्टम के खिलाफ खुलकर बोलती हैं. सोशल और इंस्टीट्यूशनल डिस्क्रिमिनेशन के खिलाफ रेसिस्टेंस का सिंबल हैं. उनका कैंपेन स्टूडेंट्स को इंस्पायर करता है. जेएनयू को वो फ्रीडम, इक्वालिटी और डिसेंट का गढ़ मानती हैं. इस चुनाव में भी उनका मैसेज क्लियर था बैरियर तोड़ो, सबको बराबरी दो. स्टूडेंट्स ने इसे पसंद किया इसलिए उन्होंने 229 वोटों से जीत हासिल की.
लेफ्ट बनाम ABVP का रहा मुकाबला
इस बार जेएनयू का चुनाव लेफ्ट बनाम ABVP था. कैंपस में स्लोगन्स गूंजे, ढोल बजे और हर स्कूल के स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया. टोटल 9,043 स्टूडेंट्स वोटिंग के लिए रजिस्टर्ड थे. लेफ्ट की क्लीन स्वीप से ABVP को झटका लगा. असल में पिछले साल एबीवीपी ने यहां जॉइंट सेक्रेटरी का पद जीता था जिसके बाद उन्हें अन्य पदों पर जीत की आस थी लेकिन लेफ्ट ने उनकी इस उम्मीदों पर पानी फेर दिया.
न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. करीब 13 वर्ष से अधिक समय से मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व डिजिटल संस्करण के अलावा कई अन्य संस्थानों में कार्य…और पढ़ें
न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. करीब 13 वर्ष से अधिक समय से मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व डिजिटल संस्करण के अलावा कई अन्य संस्थानों में कार्य… और पढ़ें