समग्र आईडी में छोटी सी गलती की वजह से अर्धवार्षिक परीक्षा में बैठने से रोक दिए गए दो स्टूडेंट्स को राहत मिली है। मामला सामने आते ही कलेक्टर मृणाल मीणा ने तुरंत एक्शन लिया और अब इन दोनों बच्चों को वापस स्कूल में पढ़ने और परीक्षा देने की इजाजत मिल गई ह
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क्या था पूरा मामला?
यह पूरा ड्रामा 3-4 नवंबर को हुई परीक्षा से जुड़ा है। भीड़ी के सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल साहब ने समग्र आईडी में गलती का बहाना बनाकर एक बच्ची और देवराज उइके नाम के एक लड़के को परीक्षा हॉल में घुसने ही नहीं दिया। हद तो तब हो गई जब स्कूल ने उस बच्ची से योजना के तहत मिली साइकिल भी वापस ले ली।
परीक्षा छूटने के बाद बच्ची इतनी निराश हो गई कि उसने स्कूल जाने के बजाय खेत में धान के बोझे बांधना शुरू कर दिया और देवराज भी घर पर मायूस बैठा था। इस लापरवाही पर गांव वालों और बच्चों के पेरेंट्स ने स्कूल मैनेजमेंट पर जमकर गुस्सा निकाला। उनका साफ कहना था कि स्कूल ने आईडी सुधरवाने में मदद नहीं की और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।

कलेक्टर ने लिया एक्शन, बच्चों को मिली राहत
जब यह बात कलेक्टर तक पहुंची, तो उन्होंने तुरंत मामले को अपने हाथ में लिया। कलेक्टर के निर्देश पर आदिवासी विभाग की सहायक आयुक्त शकुंतला डामोर ने न सिर्फ स्कूल के प्रिंसिपल को कड़ा नोटिस थमाया है, बल्कि बच्चों को सबसे बड़ी राहत दी है।
सहायक आयुक्त शकुंतला डामोर ने बताया, “कलेक्टर साहब के कहने पर दोनों बच्चों को परीक्षा में बैठने की परमिशन दे दी गई है और वे अब एग्जाम दे रहे हैं। और हां, बच्ची की साइकिल भी उसे वापस लौटा दी गई है।
” उन्होंने यह भी साफ किया कि प्रिंसिपल के जवाब का इंतजार है और अगर जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, बच्चों के कागजी दस्तावेजों में भी सुधार कर दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, प्रशासन की इस तेज कार्रवाई से न सिर्फ बच्चों का साल बर्बाद होने से बच गया है, बल्कि यह भी साफ हो गया है कि सरकारी योजनाओं की खामियों के चलते बच्चों की पढ़ाई रुकनी नहीं चाहिए!