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Balaghat News: शिक्षक राकेश धुर्वे की कहानी प्रेरणादायक है. बालाघाट के बिरसा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले अति नक्सल प्रभावित गांव कोद्दापार के प्राइमरी स्कूल में पदस्थ हैं. उन्होंने 09 दिसंबर 2010 को कोद्दापा की शाला में ज्वाइन किया था, तब से लेकर अब तक वे इसी स्कूल में पढ़ा रहे हैं. वजह बेहद खास है…
Balaghat News: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले पर करीब 35 साल से नक्सलवाद का कलंक है. लेकिन, नक्सलवाद को खत्म करने की डेडलाइन 31 मार्च 2026 तय करने के बाद हर तरह से प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे नक्सलवाद खत्म हो. इस बीच नक्सलवाद से जुड़ी कहानियां भी चर्चा में आ रही हैं. एक ऐसी ही कहानी एक शिक्षक की है. बालाघाट के कोद्दापार में एक शिक्षक हैं, जो एक ही स्कूल में 15 साल से ज्यादा सेवा दे रहे हैं. शिक्षक राकेश धुर्वे जिस स्कूल में पढ़ा रहे हैं, वह कोर नक्सल एरिया में है. आमतौर पर कोई भी सरकारी कर्मचारी उस इलाके में काम नहीं करना चाहता है. ऐसे में शिक्षक राकेश धुर्वे की जिद और हिम्मत तारीफ के काबिल है.
जब से नौकरी मिली तब से वहां पदस्थ
बिरसा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले अति नक्सल प्रभावित गांव कोद्दापार के प्राइमरी स्कूल में पदस्थ है. उन्होंने 9 दिसंबर 2010 को कोद्दापा की शाला में ज्वाइन किया था, तब से लेकर अब तक वे इसी स्कूल में पढ़ा रहे हैं. उनमें बच्चों को पढ़ाने की इतनी लगन है कि उन्होंने अपना गांव छोड़ उसी गांव में रहना पसंद किया. वह पूरे समर्पण के साथ उन बच्चों को पढ़ाते हैं, जहां दूसरे शिक्षक टिकना पसंद नहीं करते. ऐसे में अपनी शाला के बच्चों का भविष्य संवारने के लिए हर जतन करते हैं.
बच्चों के लिए नहीं कराया ट्रांसफर
वैसे तो राकेश धुर्वे लांजी क्षेत्र के संदूका के रहने वाले हैं. उनके गांव से स्कूल की दूरी 50 किलोमीटर थी. ऐसे में वह अच्छे से जानते थे कि गांव घने जंगलों के बीच है. वहां पर सुविधाएं नहीं होंगी. उनके मन में आया कि वह छोड़कर चले जाएं, लेकिन उन्होंने उन बच्चों का ख्याल किया, जो बैगा समुदाय से आते हैं. उनके भविष्य के लिए उन्होंने सुविधाओं वाली जिंदगी को भी छोड़ दिया.
उसी गांव में घर, बच्चियां भी पढ़ती हैं सरकारी स्कूल में
अब उन्हें उस गांव से इतना लगाव हुआ कि उन्होंने कोद्दापार में ही घर बना लिया. अब वह पूरे परिवार के साथ उसी गांव में रहते हैं. एक तरफ सरकारी शिक्षक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाते हैं, लेकिन राकेश ने अपनी दोनों बच्चियों को उसी स्कूल में पढ़ाया. अब उनकी बड़ी बेटी शशि धुर्वे ने उसी स्कूल से इस साल पांचवी कक्षा में पहला स्थान हासिल किया है. अब वह 4 किलोमीटर दूर माध्यमिक शाला चारघाट में कक्षा 6 में पढ़ने जाती है. वहीं छोटी बेटी एवं बेटा भी कोद्दापार स्कूल में पढ़ रहे हैं.
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें