यहां उगती दुनिया की सबसे तीखी मिर्च! विदेशों में डिमांड, किसान भाई नोट करें…

यहां उगती दुनिया की सबसे तीखी मिर्च! विदेशों में डिमांड, किसान भाई नोट करें…


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Worlds hottest chilli: खरगोन में उगाई जाने वाली मिर्च की सबसे बड़ी खासियत है इसका गहरा लाल रंग और तेज तीखापन है. यहां की मिर्च एक जिला एक उत्पाद में भी शामिल है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मिर्च की इन वैरायटियों को उगाकर बेहतर मुनाफा कमा रहे है. हर साल लाखों टन मिर्च विदेशों एक्सपोर्ट की जाती है.

खरगोन: मध्य प्रदेश का खरगोन जिला आज देश में ही नहीं, दुनिया में भी सबसे तीखी मिर्च के उत्पादन के लिए जाना जाता है. मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा मिर्च की खेती यही होती है. यहां की लाल मिर्च इतनी तीखी होती है कि इसका नाम दुनिया की सबसे तीखी मिर्चों में शामिल है. यही कारण है कि खरगोन की मिर्च की डिमांड विदेशों तक रहती है. किसान यहां रबी सीजन में बड़े पैमाने पर मिर्च की खेती करते हैं और अच्छा मुनाफा कमाते हैं.

खरगोन में उगाई जाने वाली मिर्च की सबसे बड़ी खासियत है इसका गहरा लाल रंग और तेज तीखापन है. यहां की मिर्च एक जिला एक उत्पाद में भी शामिल है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मिर्च की इन वैरायटियों को उगाकर बेहतर मुनाफा कमा रहे है. हर साल लाखों टन मिर्च विदेशों एक्सपोर्ट की जाती है.

इन किस्मों की विदेशों में है डिमांड
कृषि विज्ञान केंद्र खरगोन के वैज्ञानिक डॉ. एसके त्यागी बताते हैं कि, काशी अर्ली और काशी सुध दो ऐसी वैरायटियां हैं, जिन्हें भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी ने तैयार किया है. ये किस्में स्वाद और तीखापन दोनों में बेहतरीन हैं. आरका हरित, आरका गगन, आरका ख्याति और आरका हरिता. इन किस्मों की खासियत है कि इनमें अधिक उत्पादन देती है. जिन्हें भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु ने तैयार की हैं. इन वैरायटियों की खेती से प्रति एकड़ 80 से 100 क्विंटल तक उत्पादन संभव है.

ये वैरायटी भी लोकप्रिय
इसी के साथ निजी कंपनियों महिको, राशी, स्वाति हाई चिली रेशम, हाइब्रिड SW-426 और स्वाति 7300 F1 हाइब्रिड जैसी वैरायटियां भी खूब पसंद की जा रही हैं. किसान इन वैरायटियों की मिर्च भी लगा सकते है. लाल सुर्ख रंग ओर तीखेंपने के लिए ये किस्में भी बेहतर दाम देते है.

कैसे करे मिर्च की खेती?
विशेषज्ञ बताते हैं कि किसान मृदा परीक्षण के अनुसार खाद और उर्वरक का प्रयोग करें. पौधों को लगाने के लिए रेस्ट बेड तकनीक (चार फीट की दूरी पर उठी हुई क्यारी) का इस्तेमाल करें. इससे पौधों को हवा और पानी सही मात्रा में मिलता है और फसल मजबूत बनती है. किसान अगर ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक अपनाएं, तो पानी की बचत के साथ उत्पादन भी बढ़ जाता है.

Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह… और पढ़ें

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