Explained: क्या है आईपीएल ट्रेड? सैमसन-जडेजा स्वैप में लागू होगा ये नियम, इस तरह होता है पैसों का खेल

Explained: क्या है आईपीएल ट्रेड? सैमसन-जडेजा स्वैप में लागू होगा ये नियम, इस तरह होता है पैसों का खेल


IPL Trade Rule: आईपीएल 2026 के लिए खिलाड़ी की नीलामी 15 दिसंबर को हो सकती है. इस मिनी-ऑक्शन का आयोजन होगा. जैसे-जैसे मिनी-ऑक्शन पास आ रहा है, सभी की नजरें अभी खुले हुए ट्रेड विंडो पर हैं. ट्रेडिंग फेज ने पहले ही काफी ड्रामा खड़ा कर दिया है. संजू सैमसन के चेन्नई सुपरकिंग्स में जाने की खबरों ने क्रिकेट जगत को हिला दिया है. वह राजस्थान रॉयल्स को छोड़कर महेंद्र सिंह धोनी की टीम में जा सकते हैं. हालांकि, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है.

पर्दे के पीछे का एक्शन

अब सबसे बड़ा सवाल यह है प्लेयर ट्रेड काम कैसे करता है? हर साल ऑक्शन पर सबकी नजर सबसे ज्यादा होती है, लेकिन असली पर्दे के पीछे का एक्शन ट्रेड विंडो में ही होता है. इस दौरान खिलाड़ी एक टीम से दूसरे टीम में जाते हैं. यह एक ऐसा नियम है जिसने हमेशा से फैंस को हैरान किया है. हार्दिक पांड्या के ट्रेड को कौन भूल सकता है. वह गुजरात टाइटंस से वापस मुंबई इंडियंस में आए थे. अब रवींद्र जडेजा वापस अपनी पुरानी टीम राजस्थान रॉयल्स में जा सकते हैं.

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IPL में ट्रेडिंग कैसे होती है?

IPL में प्लेयर ट्रेड का मतलब है कि कोई क्रिकेटर बिना दोबारा ऑक्शन में जाए टीम बदल लेता है. यह आमतौर पर दो तरीकों में से एक से होता है – प्लेयर स्वैप (जहां टीमें प्लेयर्स की अदला-बदली करती हैं) या कैश डील (जहां एक टीम प्लेयर के ट्रांसफर के लिए पैसे देती है).  ट्रेडिंग विंडो आमतौर पर आईपीएल सीजन खत्म होने के लगभग एक महीने बाद खुलती है और अगले ऑक्शन से एक हफ्ते पहले तक चलती है. यह बाद में फिर से खुलती है और टूर्नामेंट शुरू होने से लगभग एक महीने पहले तक एक्टिव रहती है. वन-वे ट्रेड में प्लेयर खरीदने वाली फ्रेंचाइजी क्रिकेटर की पिछली ऑक्शन वैल्यू के बराबर फीस देती है. अगर यह स्वैप है, तो दोनों टीमें दोनों प्लेयर्स की कीमतों के बीच के अंतर पर सहमत होती हैं.

 

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इन ट्रेड ने चौंकाया

इसका एक बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला जब हार्दिक पांड्या आईपीएल 2024 से पहले गुजरात टाइटन्स से मुंबई इंडियंस में वापस आ गए. खबरों के मुताबिक, मुंबई ने गुजरात को ऑलराउंडर की ओरिजनल ऑक्शन रकम के साथ-साथ ट्रांसफर फीस भी दी. इसी तरह, लखनऊ सुपर जाएंट्स और राजस्थान रॉयल्स ने आवेश खान और देवदत्त पडिक्कल के बीच एक टू-वे ट्रेड किया, जिसमें लखनऊ ने डील को बैलेंस करने के लिए एक्स्ट्रा2.25 करोड़ रुपये भी दिए.

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खिलाड़ियों की सहमति जरूरी क्यों है?

किसी भी खिलाड़ी को उसकी लिखित अनुमति के बिना ट्रेड नहीं किया जा सकता. यह नियम यह पक्का करता है कि ट्रांसपेरेंसी बनी रहे और किसी भी खिलाड़ी पर ऐसा कदम उठाने के लिए दबाव न डाला जाए जो वह नहीं चाहता।. एक बार जब खिलाड़ी सहमत हो जाता है, तो दोनों फ्रेंचाइजी शर्तों पर बातचीत करती हैं- चाहे वह स्वैप हो, कैश डील हो, या दोनों का मिक्स हो. भले ही टेक्निकली फ्रेंचाइजी के पास किसी खिलाड़ी को रिलीज़ करने या रिटेन करने का आखिरी अधिकार होता है, लेकिन सहमति पहला और सबसे ज़रूरी कदम है. इसके बिना ट्रेड पर बातचीत शुरू भी नहीं हो सकती. उदाहरण के लिए, गुजरात टाइटंस के डायरेक्टर विक्रम सोलंकी ने एक बार कन्फर्म किया था कि हार्दिक पांड्या ने खुद 2024 सीजन से पहले मुंबई वापस जाने का अनुरोध किया था. इसी तरह रिपोर्ट्स बताती हैं कि संजू सैमसन ने राजस्थान रॉयल्स छोड़ने की इच्छा जताई है, यही वजह है कि CSK बातचीत के लिए मैदान में आई.



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