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Agriculture Tips: किसानों के लिए सरसों की खेती गेहूं से कहीं ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही है. यह फसल कम सिंचाई, कम खाद और कम खर्च में तैयार होती है, जबकि रिटर्न 6 से 8 गुना तक बढ़ जाता है.
Agriculture Tips: मध्य प्रदेश के किसान अब रबी सीजन में गेहूं छोड़ सरसों की खेती की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं. कम लागत, ज्यादा मुनाफा और कम जोखिम. कृषि अधिकारी का कहना है कि सरसों की फसल में न केवल खर्च कम आता है, बल्कि जानवरों से भी कोई नुकसान नहीं होता. वहीं सरकार की ओर से तय एमएसपी भी गेहूं की तुलना में लगभग ढाई गुना ज्यादा है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं.
वरिष्ठ कृषि अधिकारी संजय सिंह न्यूज़ 18 को जानकारी देते हुए बताया कि एक बीघा खेत में गेहूं का उत्पादन लगभग 15 -17 क्विंटल होता है, जबकि सरसों की पैदावार 8 से 10 क्विंटल तक पहुंच जाती है. खास बात यह है कि सरसों की फसल को सिर्फ एक या दो सिंचाई की जरूरत होती है, जबकि गेहूं में बार-बार पानी देना पड़ता है. इस तरह पानी की बचत के साथ खेती लागत भी घट जाती है.
सिंह के मुताबिक, गेहूं की खेती में प्रति बीघा लगभग ₹17000 की लागत आती है, जिसमें किसानों को अधिकतम ₹25,000 तक की आमदनी होती है. जबकि सरसों की खेती मात्र ₹10,000 में ₹40,000 तक का रिटर्न देती है. यानी लगभग 6 से 8 गुना तक का मुनाफा. यही वजह है कि विंध्य क्षेत्र समेत कई इलाकों में किसान अब सरसों को बेहतर विकल्प मानने लगे हैं.
सरसों की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसे जंगली या छुट्टा जानवर नहीं खाते, जबकि गेहूं और चने की फसल को नीलगाय और सूअर जैसे जानवर भारी नुकसान पहुंचाते हैं. इसके अलावा सरसों में न तो कोई बड़ी बीमारी लगती है और न ही ज्यादा खाद की जरूरत होती है. एक बार छिड़काव करने पर फसल पूरी तरह तैयार हो जाती है.
वर्तमान में सरसों का बाजार भाव ₹6,000 से ₹7,000 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है. ऐसे में कम खर्च, कम मेहनत और ज्यादा मुनाफे वाली यह फसल किसानों के लिए सोने की खान साबित हो रही है. अब मध्य प्रदेश के किसान सरसों की खुशबू से अपनी तकदीर लिख रहे हैं.
Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two and Half Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has…और पढ़ें
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