सतना. अगर आप खेती में कुछ नया करना चाहते हैं और कम मेहनत में ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो इस महीने बांस की खेती शुरू करने का सही मौका है. बांस एक ऐसी फसल है, जो एक बार लगाने के बाद 40 सालों तक उत्पादन देती है. इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, चाहें वो फर्नीचर उद्योग हो, पेपर इंडस्ट्री या फिर घरेलू उपयोग. यही वजह है कि आज बांस किसानों के लिए स्थायी आय का जरिया बन गया है. विशेषज्ञों के मुताबिक, नवंबर का महीना बांस की खेती शुरू करने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है. इस समय मौसम न ज्यादा ठंडा होता है और न ज्यादा गर्म, जिससे पौधों को जमने और जड़ें फैलाने का पर्याप्त समय मिल जाता है.
कम खर्च में ज्यादा फायदा
बांस की खेती के लिए न ज्यादा जमीन चाहिए और न भारी पूंजी. किसान इसे खेत की मेड़, खाली जगह या खेतों की बाउंड्री वॉल के रूप में लगा सकते हैं. बस एक छोटा गड्ढा खोदकर उसमें बांस का राइजोम (जड़ का हिस्सा) लगा दें. इस तरह की खेती में पानी और निराई का खर्च भी बहुत कम आता है क्योंकि बाकी फसलों के साथ ही बांस को सिंचाई और देखभाल मिल जाती है. नवंबर के मौसम में दीमक या कीटों का प्रकोप भी न के बराबर रहता है. यही वजह है कि शुरुआती महीनों में बांस तेजी से बढ़ता है और एक मजबूत पौधे के रूप में विकसित होता है.
किसानों को 50 फीसदी सब्सिडी
भारत सरकार ने बांस की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय बांस मिशन की शुरुआत 2006-07 में की थी. इस योजना के तहत मध्य प्रदेश सरकार किसानों को 50 फीसदी सब्सिडी देती है. सरकार प्रति पौधा तीन साल तक 120 रुपये देती है, जो इंस्टॉलमेंट के हिसाब से तय होता है, पहले साल 60 रुपये, दूसरे साल 36 रुपये और तीसरे साल 24 रुपये. किसान इस योजना का लाभ उठाने के लिए अपने नजदीकी वनमंडल अधिकारी कार्यालय जाकर आवेदन कर सकते हैं. खेती के लिए रेतीली, मुरमदार या ढलान वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. बांस के पौधे राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित नर्सरियों से भी प्राप्त किए जा सकते हैं.
कैसे करें उत्पादन और कमाई का हिसाब?
बांस की खेती में एक एकड़ जमीन में करीब 400 घिर्रे (पौधे) लगाए जा सकते हैं. लगभग पांचवें साल में पौधों से कटाई शुरू की जा सकती है. एक पौधे से सालाना औसतन 6–7 बांस निकलते हैं. इस तरह एक एकड़ से 2400 से 2500 बांस तैयार होते हैं. वर्तमान बाजार भाव के अनुसार, किसान एक एकड़ से 70000 से एक लाख रुपये तक की आय कमा सकते हैं. सबसे खास बात यह है कि यह फसल 40 वर्षों तक उत्पादन देती रहती है, यानी एक बार की मेहनत सालों तक मुनाफा देती है.
उद्योग और संभावनाएं
आज बांस का उपयोग केवल घर बनाने या टोकरी-सूपा तैयार करने तक सीमित नहीं है. इसका इस्तेमाल फर्नीचर, कागज, सजावटी सामान और पर्यावरण आदि से जुड़े अनुकूल उत्पाद बनाने में तेजी से बढ़ रहा है. सतना और बघेलखंड क्षेत्र के कई युवा अब बांस आधारित लघु उद्योग खोलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.