शिवपुरी का 300 साल पुराना चमत्कारी मंदिर, होते हैं अद्भुत चमत्कार

शिवपुरी का 300 साल पुराना चमत्कारी मंदिर, होते हैं अद्भुत चमत्कार


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Shivpuri bijasen Temple News: शिवपुरी से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित मां बिजासेन माता मंदिर आस्था और चमत्कार का प्राचीन केंद्र है. माना जाता है कि करीब 300 साल पुराने इस मंदिर में मांगी गई हर सच्ची मुराद पूरी होती है. यहां हर तीन साल में विशाल मेला लगता है. भक्त उल्टे हाथ जोड़कर मनोकामना मांगते हैं और पूरी होने पर दोबारा आकर प्रणाम करते हैं.

शिवपुरी. मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित मां बिजासेन माता मंदिर सैकड़ों वर्षों से लोगों की आस्था का प्रतीक बना हुआ है. यह मंदिर लगभग 300 से 400 वर्ष पुराना माना जाता है और यहां मां बिजासेन माता की पूजा पीढ़ियों से होती आ रही है. मंदिर के पुजारी गिरीश पाठक के पास आज भी 200 साल पुराने अभिलेख मौजूद हैं, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं. स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि मां बिजासेन माता सच्चे भक्तों की हर मुराद पूरी करती हैं. वर्षों पहले पिछोर क्षेत्र में जब हैजा जैसी बीमारी फैली थी, तब पूरे गांव ने मां के चरणों में अर्जी लगाई थी. कहा जाता है कि माता के आशीर्वाद से पूरा गांव स्वस्थ हो गया और तब से हर तीन साल में यहां भव्य मेला आयोजित किया जाता है.

मंदिर की सबसे खास परंपरा “उल्टे हाथ जोड़ने” की है. भक्त अपनी इच्छा पूर्ण होने की कामना से उल्टे हाथ जोड़कर माता से मन्नत मांगते हैं. जब उनकी मनोकामना पूरी होती है तो वे फिर मंदिर आकर सीधे हाथों से प्रणाम करते हैं. यह मंदिर आसपास के गांवों बाचरौन, सिरसा, भरतपुर और इमलिया की कुलदेवी का स्थान भी है. इन गांवों की बेटियों का विवाह कहीं भी हो, शादी के बाद दूल्हा-दुल्हन को बिजासेन माता मंदिर में “पाटा भरवाने” आना जरूरी माना जाता है.

मंदिर में हुए कई चमत्‍कार, लोग आज भी सुनाते हैं नेत्रहीन बच्‍चे की कहानी 
मंदिर से जुड़ी कई चमत्कारी घटनाएं आज भी लोगों की आस्था को मजबूत करती हैं. कहा जाता है कि एक माली, जो जन्म से नेत्रहीन था, माता की सेवा करते-करते देखने लगा. वहीं बाचरौन गांव का एक बालक अचानक मंदिर पहुंच गया. उसने बताया कि दो कन्याएं उसे यहां लेकर आईं, झूले पर झुलाया और प्रसाद खिलाया. लोगों का विश्वास है कि वे कन्याएं स्वयं मां बिजासन का दिव्य रूप थीं.

हजारों श्रद्धालु माता से मांगते हैं मन्‍नत 
हर तीन साल में यहां हाड़ा परिवार की परंपरा के अनुसार बलि दी जाती है. यह परंपरा तब शुरू हुई जब परिवार के लोग गंभीर बीमारी से ठीक हुए थे. आज भी हजारों श्रद्धालु माता के चरणों में अपनी मन्नत लेकर पहुंचते हैं और माता के चमत्कारों पर अटूट विश्वास जताते हैं.

Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प… और पढ़ें

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