मुरैना जिले में खाद के लिए किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। अन्नदाता रात से सुबह और फिर सुबह से शाम तक खाद वितरण केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। किस्मत वाले किसानों को दो बोरी खाद मिल जाती है, नहीं तो उन्हें अगली सुबह के लिए फिर से ला
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खाद वितरण केंद्रों पर दलाल भी सक्रिय हैं, जो किसानों से ज्यादा पैसे लेकर खाद बेच रहे हैं। दलाल किसानों से डीएपी खाद के एक कट्टे के लिए 1350 रुपए की जगह 1550 रुपए ले रहा था। वहीं, दो खाद रिटेलर्स डीएपी और यूरिया को निर्धारित मूल्य से अधिक रुपए में बेच रहे थे। वीडियो सामने आने के बाद कलेक्टर ने दोनों रिटेलर्स फार्मों पर FIR कर लाइसेंस कैंसिल कर दिए थे।
किसानों का कहना है कि उन्हें खाद के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है, लेकिन फिर भी उन्हें खाद नहीं मिल रही है। उनका आरोप है कि खाद वितरण केंद्रों पर कालाबाजारी हो रही है और अधिकारियों की मिलीभगत से दलाल खाद बेच रहे हैं। किसानों ने सरकार से खाद की कालाबाजारी रोकने और उन्हें समय पर खाद उपलब्ध कराने की मांग की है।
दैनिक भास्कर की टीम ने कालाबाजारी करने वाले ऐसे ही कुछ दलालों को खोजा। पढ़िए यह रिपोर्ट…
खाद वितरण केंद्र, जो खाली पड़ा हुआ है।
सबसे पहले कालाबाजारी के दो किस्से…
केस-1
खाद वितरण केंद्र पर दलाल कैमरे में हुआ कैद
यह वीडियो जिले के मुख्य खाद वितरण केंद्र कृषि उपज मंडी का है। यहां युवक किसान अंकित कंसाना और उसके साथी खाद लेने कृषि उपज मंडी केंद्र पर पहुंचे। सुबह से ही अंकित खाद की लंबी लाइन में लगा था। खाद की लाइन तो लंबी थी ही। डीएपी खाद के दो कट्टे ही एक व्यक्ति को मिल रहे थे, उसके लिए भी तमाम फॉर्मेलिटीज।
परेशान किसानों से लाइन में मिलने एक पंडित नामक शख्स आया। उसने खाद जल्द दिलाने की बात कही। वह भी जितनी मात्रा में चाहिए, उतनी। इस पर तीन किसान उसके साथ चले गए। पंडित ने अंकित एवं उसके साथ के किसानों से डीएपी खाद तुरंत उपलब्ध कराने की बात कही, वह भी न कोई दस्तावेज, न फिंगर। शर्त बस इतनी थी कि डीएपी के एक कट्टे का मूल्य 1350 के स्थान पर उन्हें 1550 रुपए चुकाने होंगे। पढिए, दलाल पंडित और किसान अंकित कंसाना की बातचीत के अंश…
पंडित : डीएपी मिल जाएगी, लेकिन 1550 में मिलेगी। अंकित : कुछ कम कर लो, 1500 रुपए में दे दो। पंडित: नहीं पड़ता। अंकित : पंडित जी हाथ जोड़ रहा हूं। पैर छू रहा हूं। बाप कसम भाई कसम पैसे नहीं हैं। पंडित : किसी से फोन पर बात करता है। वह सामने वाले को सेठ करके संबोधित करता है। दोनों के बीच खाद ब्लैक में लेन-देन की बात होती है। अंकित: इसी बीच अंकित 1500 प्रति कट्टे के हिसाब से 12 कट्टे डीएपी के पैसे 18000 रुपए पंडित को देता है। पंडित: 18000 नहीं, बिल्कुल नहीं पड़ रहा। अंकित: 100 और ले लो। पंडित: नहीं पड़ता। अंकित: 500 रुपए और निकाल कर देता है। पंडित: 1500 में नहीं, 1550 में ही दूंगा। दलाल इससे कम में किसी को नहीं देता। हमको पड़ता नहीं है। कुछ दिन बाद डीएपी मारा-मारा फिरेगा।

खाद की कालाबाजारी जमकर हो रही है, जबकि किसानों को नहीं दिया जा रहा है।
केस – 2 किसान और खाद रिटेलर्स के बीच खाद को लेकर बातचीत
दो रिटेलर्स फर्म रतिराम ट्रेडिंग कंपनी और राजेश ट्रेडिंग कंपनी के संचालक और दो किसानों के बीच खाद को लेकर बात हुई। संचालक डीएपी और यूरिया को निर्धारित मूल्य से अधिक रुपए में बेच रहे थे। वे किसानों को डीएपी 1350 के स्थान पर 1650 रुपए और यूरिया 270 रुपए के स्थान पर 340 रुपए प्रति बोरी बेच रहे थे।
जीवाजी गंज खाद वितरण केंद्र और निजी खाद रिटेलर्स के पास पहुंचे दुकानदार और किसान के बीच खाद को लेकर रेट तय करने बातचीत हुई तो दुकानदार ने मूल्य से अधिक रुपए किसान से मांगे।
राजेश ट्रेडिंग कंपनी संचालक और किसान नितेश शर्मा … किसान : भैया, यूरिया और डीएपी खाद चाहिए। संचालक: खाद तो है, लेकिन… किसान: लेकिन क्या, क्या रेट है? संचालक: यूरिया 340 रुपए और डीएपी 1650 रुपए। किसान: यूरिया तो 270 रुपए का है और डीएपी 1355 रुपए का! संचालक: हमारे यहां यही रेट है।
रतिराम ट्रेडिंग कंपनी संचालक और नितेश शर्मा… किसान: यूरिया खाद मिल जाएगा? संचालक: हां, मिल जाएगा। किसान: क्या रेट है? संचालक: यूरिया 350 रुपए का है। डीएपी तो नहीं है, टीएसपी है। किसान: टीएसपी का क्या रेट है? संचालक: 1400 रुपए। किसान: यह तो 1300 रुपए का आता है। संचालक : हमारे यहां यही रेट है।

खाद के लिए किसान परेशान हो रहे है, जबकि गोदाम भरे हुए हैं।
कलेक्टर के आदेश पर लाइसेंस कैंसिल और FIR
किसान और संचालक के बीच बातचीत का यह वीडियो कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ तक पहुंचा तो कलेक्टर ने तत्काल मामले को संज्ञान में लिया। उनके आदेश पर दोनों रिटेलर्स फार्मों पर FIR हुई, साथ ही लाइसेंस कैंसिल किए गए।
संचालक ज्यादा रुपए लेकर ब्लैक में खाद बेच रहे थे। प्रशासन की सख्ती को देखते हुए इन्होंने ब्लैक का नया तरीका खोज लिया था। इन्होंने सभी खाद वितरण केंद्रों के पास अपने दलाल एक्टिव कर दिए थे।
ये दलाल उन किसानों के हमदर्द बनकर खाद उपलब्ध कराते हैं जो किसान लाइन में लगने में सक्षम नहीं हैं या फिर दूर गांव से आए हैं।
ऐसे ही किसानों को खोजकर ये 1350 रुपए का डीएपी खाद का कट्टा 1550 रुपए में उपलब्ध करा देते हैं। खाद भी एक-दो बोरी नहीं, जितना किसान चाहे, उतने कटट्टे देते हैं।

खाद वितरण केंद्र के प्रभारी का नाबालिग बेटा भी काम कर रहा था।
खाद वितरण केंद्र में मनमानी: नाबालिग बेटे से काम, खुद वसूली कृषि उपज मंडी स्थित खाद वितरण केंद्र के मुख्य गोदाम के प्रभारी अभिषेक शर्मा का भी एक कारनामा सामने आया है। उन्होंने तो खाद केंद्र पर अपने नाबालिग बेटे को ही बिठाकर जिम्मेदारी सौंप दी है। बेटा केंद्र संभाल रहा है, वे कालाबाजारी के पैसों की वसूली में जुटे हैं।
कलेक्टर के आदेश को ताक पर रखकर अभी भी मैन्युअल पर्ची किसानों को दे रहे हैं। अनियमितताओं के चलते इनका ट्रांसफर भी यहां से हो चुका था, लेकिन उसी दिन ट्रांसफर कैंसिल ही नहीं हुआ, इन्हें वापस इसी केंद्र का प्रभारी भी बनाया गया। नाबालिग बेटे से कार्य करवाते वीडियो भी सामने आया है। किसानों का आरोप है कि इन्हीं के केंद्र पर दलाल सबसे अधिक सक्रिय हैं।
खाद वितरण केंद्र प्रभारी अभिषेक शर्मा के नाबालिग बेटे का वीडियो सामने आने के बाद सफाई आई कि केंद्र पर स्टाफ निजी कार्य से चला गया था। बेटा वहां पहुंचा था तो उससे केंद्र का काम करवा लिया।
अब किसानों का दर्द…अफसरों और सरकार के खिलाफ आक्रोश
जिले भर में किसी भी खाद वितरण केंद्र पर चले जाओ नजारा किसानों की लंबी लाइन का ही दिखेगा । सुबह से ही लाइन में दिन भर भूखे-प्यासे रहने के बाद भी किसान को खाद उपलब्ध नहीं हो रही हैं । किसान खाद के लिए तड़के ही खाद वितरण केंद्र पर लाइन में लग जाता है । भूखा प्यासा दिन भर लाइन में रहने के बाद किसी किसान को खाद मिलता है किसी किसान को दूसरे दिन फिर लाइन में लगना पड़ता है । किसानों का यही क्रम पिछले तीन माह से चल रहा है । दिन भर लाइन में लगने के बाद किसान को महज दो बोरी खाद ही मिलता है । लेकिन अगर आप ब्लैक में खाद खरीदते है तो आपको जितना खाद चाहिए उतना मिलेगा ।
हाल ही में कलेक्टर लोकेश कुमार रामचंद्र जांगिड़ के द्वारा खाद वितरण केंद्रों का निरीक्षण कर मैन्युअल पर्ची प्रतिबंधित कर मशीन की पर्ची दिए जाने के निर्देश देते हुए । ब्लैक में खाद बेच रहे दो खाद रिटेलर्स पर एफआईआर कर लाइसेंस कैंसिल किए थे । फिर भी खाद की कालाबाजारी नहीं रुक रही । अधीनता अधिकारियों की मिलीभगत से खाद की कालाबाजारी हो रही है ।




खाद का उठाव पिछले साल से ज्यादा
| खाद का उठाव | वर्ष 2024-25 | वर्ष 2025 -26 |
| यूरिया | 28577 मैट्रिक टन | 31877 मैट्रिक टन |
| डीएपी | 7534 मैट्रिक टन | 12829 मैट्रिक टन |
| एपीके | 5843 मैट्रिक टन | 16635 मैट्रिक टन |
| एसएसपी | 1102 मैट्रिक टन | 3361 मैट्रिक टन |
अब तक खाद के लिए क्या-क्या हुआ
- पिछले तीन महीने से किसान खाद के लिए लाइन में लग रहा है।
- किसानों ने खाद के लिए एक-दूसरे पर लाठियां भांजी।
- खाद नहीं मिली, परेशान किसानों पर पुलिस की लाठी पड़ी।
- किसानों ने कैलारस नेशनल हाईवे 552 को जाम किया।
- किसान तय कीमत से अधिक में खाद खरीदने को मजबूर।
