खरगोन के चोली गांव के 20 वर्षीय पीयूष कर्मा ने बेंगलुरु में खेले गए दूसरे नेशनल कल्चरल पाइथम गेम कैंप में गोल्ड मेडल जीता। पीयूष के गोल्ड मेडल जीतकर गांव लौटने पर ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से उनका भव्य स्वागत किया।
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यह राष्ट्रीय प्रतियोगिता 7 से 9 नवंबर 2025 तक बेंगलुरु में आयोजित की गई थी। इसमें देशभर के कई राज्यों से आए प्रतिभाशाली प्रतिभागियों ने अलग-अलग कला वर्गों में भाग लिया। चित्रकला वर्ग में 20 प्रतिभागियों के बीच कड़ी टक्कर में पीयूष ने पहला स्थान हासिल किया।
ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी पेंटिंग बनाई थी
पीयूष ने अपनी प्रस्तुति में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ विषय पर एक प्रभावशाली पेंटिंग बनाई थी। इस पेंटिंग में भारतीय सेना के पराक्रम और बलिदान को दर्शाया गया था। निर्णायक मंडल ने उनकी कलाकृति की गहराई, रंग संयोजन और संदेश की सराहना करते हुए उन्हें स्वर्ण पदक विजेता घोषित किया।
गोल्ड मेडल मिलने के बाद पीयूष के गांव चोली में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया और परिवार को बधाई दी।
पीयूष ने ये पेंटिंग बनाई थी।
पिता दर्जी का काम करते हैं
पीयूष के पिता लखन कर्मा गांव में दर्जी का काम करते हैं और कपड़े सीलकर परिवार की आजीविका चलाते हैं। उन्होंने बेटे की सफलता पर गर्व जताते हुए कहा कि बेटे ने जो हासिल किया है, वह हमारे लिए बड़ी बात है। उसने हमारी मेहनत को सार्थक कर दिया।
पीयूष ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हुए कहा कि पिता की मेहनत और मां के आशीर्वाद ने ही मुझे यहां तक पहुंचाया है। मैं चाहता हूं कि आगे चलकर अपने क्षेत्र के बच्चों को कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करूं। इस उपलब्धि से न केवल चोली गांव, बल्कि पूरे खरगोन जिले में खुशी की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि सीमित साधनों में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना युवाओं के लिए प्रेरणा है।

पीयूष का गांव में जोड़दार स्वागत किया गया।