मऊगंज कलेक्ट्रेट सभागार में बुधवार शाम कलेक्टर संजय कुमार जैन ने किसानों की समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों से संवाद करते हुए किसान संघ की सभी मांगों और सुझावों पर समुचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
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कलेक्टर ने बताया कि जिले में राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसमें फौती नामांतरण और बंटवारे के मामलों को प्राथमिकता से निपटाया जाएगा। उन्होंने खाद के डबल लॉक सिस्टम और सहकारी समितियों के माध्यम से नियमित वितरण की जानकारी दी, साथ ही अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
1 दिसंबर से समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू होगी
सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के प्रयास जारी हैं। जल संसाधन विभाग ने नहरों की सफाई और मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है, ताकि दिसंबर से किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सके। धान खरीदी केंद्रों का निर्धारण हो चुका है और 1 दिसंबर से समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू होगी। इसके अतिरिक्त, अति वर्षा से फसलों को हुए नुकसान का सर्वे जारी है, जिसके पूरा होने पर किसानों को सरकारी मापदंडों के अनुसार राहत राशि प्रदान की जाएगी।
पदाधिकारियों ने विभिन्न मुद्दों पर प्रशासन से किए सवाल
इस बैठक में कृषि, सिंचाई, बिजली, बैंक और वन सहित कई विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। कलेक्टर ने बैठक की अध्यक्षता की, लेकिन चर्चा आगे बढ़ने के साथ ही किसान संगठन के पदाधिकारियों ने विभिन्न मुद्दों पर प्रशासन से तीखे सवाल किए।
बैठक में भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री वंशगोपाल सिंह, प्रवक्ता परमजीत सिंह, संभागीय अध्यक्ष हर्षवर्धन सिंह तिवारी के साथ-साथ जिला और तहसील स्तरीय पदाधिकारी भी मौजूद थे।
बैठक में जिन मुख्य मुद्दों पर बहस हुई, उनमें रासायनिक उर्वरक की कमी, धान खरीदी की तारीख, केंद्रों और लक्ष्य की स्पष्ट जानकारी की मांग, तथा बारिश से हुई फसल क्षति के अधूरे सर्वे और मुआवजे को लेकर अनिश्चितता शामिल रहे।
राष्ट्रीय किसान संगठन के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर से मुलाकात कर सरकारी कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। संगठन ने स्पष्ट किया कि वे केवल “सुनने नहीं, बल्कि जवाब लेने” आए हैं।

किसानों की मुख्य चिंताएं और मागें
फसल बीमा योजना: किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नियमों और मिलने वाली राशि के बारे में जानकारी नहीं है।
बिजली बिलों में अनियमितता: संगठन ने बिजली विभाग को चेताया कि वे “मोटर की क्षमता से अधिक बिल नहीं देंगे” और बिलों में सुधार की मांग की।
बीज वितरण में देरी: मांग की गई कि किसानों को समय पर और सही वेरायटी (किस्म) के बीज उपलब्ध कराए जाएं।
औसत उत्पादन आंकड़े: संगठन ने सरकारी औसत उत्पादन आंकड़ों को वास्तविकता से पीछे बताया और इन्हें नए सिरे से तय करने की मांग की।
गोशाला संचालन: गायों की संख्या और उन पर होने वाले खर्च के संबंध में पारदर्शिता की मांग की गई।
भूमि विवाद: पूर्णकालिक एसडीएम की नियुक्ति करके सीमांकन (भूमि की हदबंदी) के कार्य में तेजी लाने पर जोर दिया गया।
किसान प्रतिनिधियों ने सिंचाई और मुआवजे पर चेतावनी
सिंचाई योजनाएं: संगठन ने साफ चेताया कि “अगर जून 2026 तक खेतों तक पानी नहीं पहुँचा, तो आंदोलन तय है।”
फसल क्षति और मुआवज़ा: किसानों ने फसल क्षति सर्वे के अधूरा होने पर नाराज़गी जताई और जंगली जानवरों से फसल नुकसान की भरपाई पर विभागों की चुप्पी से असंतुष्ट दिखे।
राष्ट्रीय किसान संगठन के प्रदेश प्रवक्ता परमजीत सिंह ने स्पष्ट कहा, “किसानों की समस्याओं पर केवल बैठकें नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। अगर सर्वे के अनुसार मुआवज़ा नहीं मिला, तो राष्ट्रीय किसान संगठन सड़क पर उतरेगा।