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Bhopal Smart City Ground Report: सरकार ने स्मार्ट सिटी के नाम पर भोपाल की जनता को किस तरह पागल बनाया है इसका खुद बोपालजनता ने पोल खोल किया है. आइए देखते हैं ये खास ग्राउंड रिपोर्ट.
भोपाल. भोपाल के मध्य में बाणगंगा से जवाहर चौक तक फैली करोड़ों रुपये मूल्य की स्मार्ट सिटी अब केवल कागजों में सिमट कर रह गई है .जिस क्षेत्र को स्मार्ट बनना था वह अब विकसित होने की जगह खंडार बन चुका है. जिसे कभी शहर की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी परियोजना का केंद्रबिंदु माना जाता था, अब कचरे का ढेर बन गया है. हालांकि इस दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई कर हरियाली का भी गला घोंटा गया.
बता दें, केंद्र सरकार ने लगभग 10 साल पहले स्मार्ट सिटी मिशन की शुरुआत की थी. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को 28 जनवरी 2016 को पहले चरण में स्मार्ट सिटी के रूप में चयनित किया गया. इस दौरान शहर के विकास के लिए करीब 1 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए. वहीं करीब 7 माह पहले 31 मार्च 2025 को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए केंद्र से फंडिंग बंद कर दी गई. हालांकि इतनी राशि खर्च होने के बाद भी न तो शहर स्मार्ट हुआ न ही फंड का सही इस्तेमाल हुआ.
वादें सिर्फ कागजों तक सीमित
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की शुरुआत में कई तरह के बड़े-बड़े वादे किए थे जो अब धरातल पर पूरे होते हुए नहीं दिख रहे हैं. इसमें खास तौर पर नॉलेज हब, स्टार्ट हब और हेल्थ एजुकेशन हब जैसे काम अधूरे हैं. साथ ही पब्लिक एड्रेस सिस्टम और फ्री वाई-फाई जैसे वायदे भी कागजों से बाहर नहीं आ सके हैं. स्मार्ट कंपनी ने खुद की आमदनी के लिए जो प्रोजेक्ट तैयार किया वह भी अब वीरान है.
टीटीनगर में उजाड़ी हरियाली
दूसरी ओर टीटी नगर एरिया बेस्ड डेवलपमेंट के नाम पर हरियाली और मकानों को तोड़कर बनाया गया ये प्रोजेक्ट जीआइएस में नुमाइश किया गया. मगर उद्योग समूहों को इसमें कोई स्कोप नजर नहीं आया. पूरे स्मार्ट सिटी एरिया में 6 हजार से ज्यादा पेड़ थे, जिनमें से अधिकतर पेड़ यहां रहने वाले सरकारी कर्मचारियों ने ही लगाए थे. बताया जाता है कि इनमें से 2 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं.
धरे रह गए सारे वादे
स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन ने केंद्र से वादा किया था कि अगले पांच साल में नार्थ और साउथ टीटी नगर की 333 एकड़ जमीन को पीपीपी मोड पर विकसित करेंगे. साथ ही यहां की जमीन बेचकर 6644 करोड़ की आमदनी होगी. डेवलपमेंट कॉस्ट 3444 करोड़ रुपए आएगी. मगर टीटी नगर उजड़ा और वीरान पड़ा है. यहां बनाई गई दुकानें भी बंद ही पड़ी हुई है.
Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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