‘घूसखोर तहसीलदार’ को ‘लोकायुक्त’ दफ्तर से फोन: बोला- केस खत्म कराना है तो 50 हजार लगेंगे, तहसीलदार ने बातचीत रिकॉर्ड कर पुलिस को दी – Madhya Pradesh News

‘घूसखोर तहसीलदार’ को ‘लोकायुक्त’ दफ्तर से फोन:  बोला- केस खत्म कराना है तो 50 हजार लगेंगे, तहसीलदार ने बातचीत रिकॉर्ड कर पुलिस को दी – Madhya Pradesh News


‘मैं लोकायुक्त भोपाल से बोल रहा हूं… तुम्हारे खिलाफ जो EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण संगठन) ने कार्रवाई की है, वो फाइल अब हमारे पास आ गई है। अगर उसे खत्म करवाना है, तो कुछ व्यवस्था करनी पड़ेगी।’ ये देवास के नायब हर्षल बहरानी हर्षल बहरानी के मोबाइल पर आए

.

उसने बहरानी से 50 हजार रुपए की डिमांड की। इसे सुनकर बहरानी कुछ देर लिए सकते में आ गए, क्योंकि दो दिन पहले ही बहरानी को ईओडब्ल्यू ने 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था।बहरानी ने कहा कि उसे फंसाया गया है, तो उस शख्स ने ये भी कहा कि उसकी ऊपर तक पहचान है और वो ईओडब्ल्यू का केस भी रफा दफा करवा सकता है।

बहरानी ने इस बातचीत को रिकॉर्ड कर देवास एसपी को शिकायत की है। मामले की जांच की जा रही है। पुलिस मानकर चल रही है कि ये साइबर ठगों का कारनामा है, जिन्होंने लोकायुक्त अफसर बनकर पैसे ऐंठने की कोशिश की है। पढ़िए रिपोर्ट

रिश्वत के तीन दिन बाद… ‘लोकायुक्त’ का फोन EOW की कार्रवाई के ठीक तीन दिन बाद, 4 नवंबर की सुबह, हर्षल बहरानी के फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। उन्होंने पहले तो फोन नहीं उठाया, लेकिन जब उसी नंबर से लगातार व्हाट्सएप पर मैसेज आने लगे, तो उन्होंने जवाब दिया। कॉलर आईडी पर नंबर के आगे ‘लोकायुक्त भोपाल’ लिखा हुआ था, जिसने बहरानी की चिंता और बढ़ा दी।

बहरानी बताते हैं कि मैंने फोन उठाया तो सामने वाले शख्स ने खुद को भोपाल लोकायुक्त का एक वरिष्ठ अधिकारी बताया और वो सीधे मुद्दे की बात पर आ गया। उसने केस दर्ज न करने के एवज में 50 हजार रुपए की मांग की।

वो शख्स बोला- मैं कार्रवाई रद्द करवा सकता हूं यह बातचीत व्हाट्सएप कॉल पर होती रही। कथित अफसर ने बड़ी चालाकी से बहरानी को यकीन दिलाया कि वह सिस्टम में इतना ऊंचा बैठा है कि EOW की कार्रवाई को भी रफा दफा करवा सकता है। उसने कहा, ‘हम तुम्हारा मामला यहीं क्लोज करवा देंगे, बस तुम व्यवस्था करो।’ बहरानी को इस बातचीत में कुछ गड़बड़ महसूस हुई, लेकिन वे डरे हुए भी थे।

उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए कथित अफसर से हुई पूरी बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया। इसके बाद उन्होंने तुरंत लोकायुक्त एसपी, ईओडब्ल्यू एसपी और देवास एसपी से संपर्क कर इस फर्जी कॉल की शिकायत दर्ज कराई। देवास एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत को जांच के लिए सीएसपी को सौंप दिया है।

लोकायुक्त अफसर बनकर बातचीत करने वाले शख्स की बातचीत बहरानी ने रिकॉर्ड कर ली।

लोकायुक्त अफसर बनकर बातचीत करने वाले शख्स की बातचीत बहरानी ने रिकॉर्ड कर ली।

पढ़िए कथित अफसर और हर्षल बहरानी के बीच हुई पूरी बातचीत

कथित अफसर: हैलो, मैं लोकायुक्त भोपाल से बोल रहा हूं।

हर्षल बहरानी: जी सर, आप क्लियर बताइए, मेरे खिलाफ शिकायत है क्या?

कथित अफसर: हां, शिकायत EOW वाली ही है।

हर्षल बहरानी: EOW ने गलत कार्रवाई की है सर।

कथित अफसर: (भरोसा दिलाते हुए) तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होगी। मैं सब करवा दूंगा।

हर्षल बहरानी: क्या करना है, आप बता दीजिए सर।

कथित अफसर: बताओ, कितना करोगे?

हर्षल बहरानी: सर, आप ही बताइए।

कथित अफसर: अपने हिसाब से कर दो।

हर्षल बहरानी: 20 हजार…?

कथित अफसर: नहीं, 50 लगेंगे।

हर्षल बहरानी: ठीक है सर, मैं व्यवस्था करता हूं।

कथित अफसर: (दबाव बनाते हुए) अब व्यवस्था करोगे?

हर्षल बहरानी: मैं बताता हूं सर। आप बताएं रुपए कैसे भेजना है तो उस हिसाब से व्यवस्था करूं। कोई व्यक्ति आकर ले ले।

कथित अफसर: व्यक्ति के जरिए तो मैं नहीं ले पाऊंगा, फंस जाऊंगा। रहने दो। फोन पर (ऑनलाइन) कर दो।

हर्षल बहरानी: जी सर।

कथित अफसर: मैं परसों इंदौर में मिल लूंगा।

हर्षल बहरानी: मैं बताता हूं सर।

कुछ घंटों बाद कथित अफसर ने दोबारा कॉल किया….

वॉटसएप कॉल से बढ़ी ठगी की घटनाएं साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक अब ठग सिर्फ बैंक ओटीपी या लॉटरी का लालच नहीं दे रहे बल्कि वे बाकायदा रिसर्च कर वारदात को अंजाम दे रहे हैं। वे इंटरनेट, सोशल मीडिया और समाचारों से ऐसे सरकारी अफसरों या कर्मचारियों की लिस्ट बनाते हैं, जो हाल ही में किसी जांच, ट्रैप या विवाद में फंसे हों।

इसके बाद वे किसी भी कॉलर आईडी एप या व्हाट्सएप डीपी पर किसी बड़े अधिकारी का नाम, पद और सरकारी विभाग का लोगो लगाकर अपनी फर्जी पहचान बनाते हैं। इससे पीड़ित को यकीन हो जाता है कि कॉल किसी असली अफसर का ही है। वे पीड़ित को नौकरी जाने, सम्मान खोने और कानूनी कार्रवाई का हवाला देकर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते हैं। एक तरह से उसे डराते हैं।

इंदौर की पुलिस अधिकारी को ठगने की कोशिश डर के साथ-साथ वे खुद को बचाने वाले मसीहा के तौर पर भी पेश करते हैं। वे कहते हैं, “मैं सब संभाल लूंगा,” जिससे डरा हुआ व्यक्ति उन पर भरोसा करने लगता है। इसी तरह से इंदौर की एडिशनल डीसीपी सीमा अलावा भी ठगी का शिकार होने से बच गई। अलावा बताती हैं कि उनके पास एक शख्स का कॉल आया उसने खुद को पेंशन डिपार्टमेंट का कर्मचारी बताया।

पहले तो वह मुझसे पेंशन की बातें करता रहा और जब उसने मुझसे पूछा कि आप रिटायर कब हुईं। तब मुझे समझ आ गया कि ये फर्जी व्यक्ति है।

रिटायर्ड अधिकारी भी बन रहे शिकार यह ट्रेंड सिर्फ सेवारत अधिकारियों तक ही सीमित नहीं है। रिटायर्ड अधिकारी और कर्मचारी, जो अपनी पेंशन और सम्मान को लेकर चिंतित रहते हैं, वे भी आसान निशाना बन रहे हैं।

केस 1: ट्रेजरी अफसर बनकर रिटायर्ड DSP से ठगी 13 अक्टूबर को इंदौर के रिटायर्ड डीएसपी ध्यानूराव बच्चन (65) के पास एक फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को भोपाल ट्रेजरी ऑफिस का अफसर डी.के. तिवारी बताया। उसने कहा कि आपकी पेंशन फाइल में कुछ गड़बड़ी है, जिसे ठीक करने के लिए पैन और आधार कार्ड चाहिए।

इसके बाद उसने व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजी और कहा कि इस पर क्लिक करने से आपका रुका हुआ एरियर निकल जाएगा। जैसे ही ध्यानूराव ने लिंक खोली, कथित अफसरों ने उनके खाते से 2.25 लाख रुपए उड़ा लिए।

केस 2: CBI अफसर बनकर 68 लाख की साइबर ठगी भोपाल में भेल से रिटायर्ड सुपरवाइजर विनोद कुमार गुप्ता (71) डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुए थे। ठगों ने खुद को टेलिकॉम और सीबीआई का अधिकारी बताकर उन्हें दो महीने तक बंधक बनाए रखा। उन्होंने बुजुर्ग को डराया कि उनका नाम मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग केस में आया है।

विश्वास दिलाने के लिए फर्जी नोटिस और सरकारी लोगो वाले दस्तावेज भी व्हाट्सएप पर भेजे। इस डर से, विनोद कुमार ने दो महीनों में 9 अलग-अलग बैंक खातों में 68.30 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।



Source link