मोतियों और डायमंड जड़ी राजपूतानी पोशाक में सजेगा राम–सीता का दिव्य विवाह

मोतियों और डायमंड जड़ी राजपूतानी पोशाक में सजेगा राम–सीता का दिव्य विवाह


मध्य प्रदेश के खरगोन में मां नर्मदा नदी के किनारे बसे पवित्र नगर मंडलेश्वर को मिनी अयोध्या कहा जाता है. चुंकि, यहां हर साल अयोध्या, मिथिला और ओरछा की तरह रामानंदी परंपरा के अनुसार श्रीराम-जानकी का विवाह महोत्सव मनाया जाता है. इस साल यह महोत्सव 21 से 25 नवंबर तक चलेगा. आयोजन की तैयारियां इस समय पूरे जोर पर हैं.

वहीं, नगर की वैश्य समाज की महिलाएं हर साल की तरह इस बार भी भगवान के लिए वस्त्र तैयार कर रही हैं. खास बात यह है कि सभी पोशाकें महिलाएं अपने खर्चे पर बनाती हैं और फिर मंदिर समिति को भेंट कर देती हैं. इस बार पांच महिलाएं लगातार काम में जुटी हैं. वह अलग-अलग रस्मों के लिए अलग-अलग ड्रेस बना रही हैं. लग्न के लिए राम-सीता की खास पोशाक तैयार हो रही है.

15 दिन में तैयार होंगी 15 पोशाखे
वस्त्र तैयार करने वाली रानी अग्रवाल और रागिनी कानूनगो ने बताया कि भगवान की पोशाके तैयार करने में 10 से 15 दिन लग जाते हैं. पूरा दिन काम करें तो दो दिन में एक ड्रेस बन जाती है. इन पोशाकों के लिए इंदौर से खास सिल्क, वेलवेट और मोतियों की सामग्री मंगाई गई है. अर्चना पाटीदार ने बताया, पहले मशीन पर ड्रेस बनाते हैं, फिर हाथों से मोती और डायमंड और हीरे की जड़ाई करते हैं. राम-जानकी और राम दरबार के लिए कुल 5 पोशाकें बन रही हैं और ये केवल एक बार, एक रस्म में ही पहनाई जाती हैं.

सबसे खास लग्न का जोड़ा
सलोनी अग्रवाल कहती है कि, तीन दिनों के मुख्य कार्यक्रम के लिए कुल 15 पोशाकें तैयार की जा रही हैं. एक पोशाक में करीब 22 वस्त्र शामिल है. इनमें लग्न की पोशाक सबसे महंगी और विशेष है, जिसकी कीमत 10 से 12 हजार रुपये तक पड़ती है. इसके साथ ही हल्दी, मंडप और अन्य विवाह रस्मों के लिए भी ड्रेस बन रही हैं. उन्होंने कहा कि, भगवान के वस्त्र बनाना हमारे लिए सेवा और सौभाग्य है.

नि:शुल्क सेवाएं दे रही महिलाएं
वस्त्र निर्माण में 72 वर्षीय मधुबाला कानूनगो भी लंबे समय से निःशुल्क सेवा दे रही हैं. अन्य तीज त्योहारों पर भी वह देवी देवताओं के लिए वस्त्र बनाती है. शीतल पाटीदार उनका साथ देती हैं. अब मधुबाला ने यह जिम्मेदारी अपनी बहू रागिनी को सौंप दी है, जो इस बार भी राजपूताना शैली की वेशभूषा तैयार की जा रही है, जो लग्न के दौरान पहनाई जाएगी.

 20 नवंबर को निकलेगी पोशाक यात्रा
वहीं, तैयार वस्त्रों की 20 नवंबर को नगर में यात्रा निकाली जाएगी और फिर उन्हें राम मंदिर में समर्पित कर दिया जाएगा. पिछले साल से वैश्य समाज की रानी अग्रवाल का परिवार भगवान के सभी वस्त्रों का पूरा खर्च उठा रहा है. रानी बताती हैं कि इस बार लग्न के लिए लाल रंग की राजपूताना शैली की वेशभूषा तैयार की जा रही है. एक जोड़ी की कुल लागत 10 हजार रुपये आती है, जबकि सामान्य पोशाकें 3 हजार रुपये तक में बन जाती हैं.

350 साल पुराना राम मंदिर
गौरतलब है कि, मंडलेश्वर के लगभग 350 साल पुराने पेशवा कालीन जूना श्रीराम मंदिर में श्री सीताराम शिव संकल्प संस्था और वैदेही सेवा प्रकल्प द्वारा विगत 5 वर्षों से विवाह महोत्सव आयोजित किया जाएगा. इस साल महोत्सव 21 नवंबर से शुरू होगा और 25 नवंबर को अभिजीत मुहूर्त में भगवान श्रीराम और जानकी का विवाह पूरे विधि-विधान से संपन्न होगा. यहां विवाह की सभी रस्में ठीक उसी प्रकार निभाई जाती हैं जैसे त्रेतायुग में भगवान का विवाह हुआ था.



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