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हिन्दू धर्म मे हर शुभ कार्य करने से पहले मुहूर्त देखा जाता है. अगरवास्तु शास्त्र के हिसाब से सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को गृह प्रवेश करा जाए तो यह बड़ा मंगल कारी रहता है. आइए जानते है ग्रह प्रवेश से जुड़े और भी कई नियम.
हिन्दू धर्म मे मांगलिक कार्य करने से पहले शुभ मुहूर्त पर जरुर विचार किया जाता है. शुभ संयोग और खास मुहूर्त में किए गए काम जैसे विवाह, मुंडन, पूजा-पाठ, मुंडन, गृहप्रवेश, सगाई आदि सफल होते हैं. लंबे समय तक शुभ परिणाम देते हैं. देवउठनी ग्यारस के बाद शुभ व मांगलिक कार्य की शुरुआत हो चुकी है.

इन दिनों सबसे ज्यादा शादी और ग्रह प्रवेश देखनें को मिलता है. लेकिन ग्रह प्रवेश करने के भी शास्त्रों मे कई नियम बताए गए है. देवउठनी ग्यारस के बाद भी कई ऐसे दिन रहते है. जब ग्रह प्रवेश करने से बचना चाहिए. ग्रह प्रवेश अगर सही दिन शुभ मुहूर्त मे हो तो हमेशा घर मे खुशियों का वास बना रहता है.

शास्त्रों मे वास्तु शास्त्र को विशेष महत्व दिया जाता है. इसी शास्त्र के अनुसार, गृह प्रवेश तभी फलदायी होता है, जब इसे शुभ मुहूर्त, तिथि, वार और नक्षत्र के अनुसार किया जाए. गलत समय पर गृह प्रवेश करने से जीवन में नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए नियमों का पालन आवश्यक है.

वास्तु शास्त्र के अनुसार, अब अगर ग्रह प्रवेश के शुभ मुहूर्त व दिन के साथ नक्षत्र की बात करी जाए तो, सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार के दिन गृह प्रवेश के लिए अत्यंत शुभ होते हैं. इसके अलावा माघ, फाल्गुन, वैशाख और ज्येष्ठ मास को गृह प्रवेश के लिए सर्वोत्तम माना गया है.

अगर इन्ही दिनों मे से शुभ तिथियों की बात करे तो, शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी गृह प्रवेश के लिए अत्यंत शुभ होती हैं. इन दिनों किए गए प्रवेश से घर में सुख, शांति और धन की वृद्धि होती है. और सदा घर मे खुशहाली बनी रहती है.

शास्त्रों के अनुसार शुभ दिन के साथ अशुभ दिन भी बताए गए है. जिसमे इन दिनों ग्रह प्रवेश नही करना चाहिए.वास्तु के अनुसार, मंगलवार और शनिवार को गृह प्रवेश करना नही करना चाहिए. साथ ही चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और पूर्णिमा जैसी तिथियां भी गृह प्रवेश के लिए सही नहीं मानी जातीं है. आषाढ़, सावन, भाद्रपद, आश्विन और पौष महीने में प्रवेश से बचना चाहिए. सबसे जरूरी, राहुकाल के दौरान किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए.

शास्त्रों के अनुसार कोई भी मांगलिक कार्य मे भगवान की पूजा करने का विशेष महत्व है. भगवान पूजा-पाठ से प्रसन्न होकर शुभ फल प्रदान करते है. भगवान को प्रसन्न करंव के लिए ग्रह प्रवेश के दौरान घर मे मुख्य द्वार पर अशोक के पत्तों का तोरण लगाना शुभ होता है.

घर मे भगवान के मंदिर के आगे और घर के दरवाज़े पर दीपक जलाएं, कपूर और धूप से वातावरण शुद्ध करें और सभी कमरों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें. नए घर में प्रवेश करते समय वास्तु पूजा अवश्य कराएं सबसे पहले दाहिना पैर रखकर प्रवेश करें. यह समृद्धि और शुभ फल का संकेत माना गया है.