150 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड में थी फॉर्च्यूनर: तीन भाइयों में इकलौता वारिस था प्रिंस; अगले साल पिता देख रहे थे शादी का सपना – Gwalior News

150 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड में थी फॉर्च्यूनर:  तीन भाइयों में इकलौता वारिस था प्रिंस; अगले साल पिता देख रहे थे शादी का सपना – Gwalior News


इतनी स्पीड में टकराई कार की चालक कौशल के पेट में घुसकर स्टेयरिंग तक टूट गई।

ग्वालियर में रविवार सुबह एक फ़ॉर्च्यूनर कार अचानक आगे चल रही रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली में जा घुसी। हादसे में कार में सवार सभी पांच युवाओं की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में जान गंवाने वाला 24 वर्षीय प्रिंस, कारोबारी उमेश राजावत के तीन भाइयों में

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तीन भाइयों में वह इकलौता चिराग था, जो आज इस हादसे में बुझ गया। पता चला कि प्रिंस की शादी की तैयारी भी चल रही थी। उसके लगातार रिश्ते आ रहे थे और अगले साल उसकी शादी होना थी, पर पिता का उसे घोड़ी पर बैठाने का सपना उसकी जान के साथ ही टूट गया। प्रिंस की मौत की खबर के बाद पूरा परिवार गहरे सदमे में है।

हादसे में मृतक ब्लैक सूट में प्रिंस राजावत व उसका दोस्त आदित्य जादौन

150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार में थी फॉर्च्यूनर

ग्वालियर में रविवार सुबह हुए सड़क हादसे में कार की रफ्तार को लेकर पता चला है कि दुर्घटना के समय फॉर्च्यूनर लगभग 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। इसी वजह से वह रेत से भरी ट्रॉली से इतनी जोरदार टकराई कि उसका पूरा आगे का हिस्सा मिट गया।

कार का पूरा इंजन चकनाचूर हो गया। स्टीयरिंग टूट गई, स्पीड मीटर उड़ गया और एयरबैग भी फट गया। स्पीड मीटर में अंतिम स्पीड 151 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज हुई थी। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इतनी तेज रफ्तार में गाड़ी को कंट्रोल करना बेहद मुश्किल होता है।

पिता को बिना बताए लेकर निकला था कार

बता दें कि हादसे में मृतक प्रिंस राजावत के पिता उमेश राजावत शहर के बड़े कारोबारी हैं। उनका शनिचरा के पास तेल मिल कारखाना है। रात आठ बजे वह इसी फॉर्च्यूनर कार से शनिचरा से घर लौटे थे। उसके बाद प्रिंस अपने दोस्तों के साथ जाने के लिए इसी कार से निकल गया। उसने किसी को कुछ बताया भी नहीं था। प्रिंस सभी का लाडला था और उमेश राजावत के घर लग्जरी गाड़ियों का काफिला होने पर किसी को कोई परेशानी भी नहीं हुई थी।

कौशल जो हादसे के समय कार ड्राइव कर रहा था, अभिमन्यू सिंह तोमर।

कौशल जो हादसे के समय कार ड्राइव कर रहा था, अभिमन्यू सिंह तोमर।

रातभर इधर से उधर घूमते रहे सुबह हुआ हादसा

प्रिंस की आखिरी बार बात विकास शर्मा से हुई, जो रात के 10 बजे उसके साथ ही था। विकास ने बताया कि 10 बजे वह और बाकी दोस्त दीनदयाल नगर में सिंधिया स्टैच्यू के पास उतर गए थे और दूसरे दोस्त फॉर्च्यूनर में सवार हो गए थे। हमारे बाद, जो सवार हुए, वह साल दो साल में एक बार ही मिलते थे।

विकास ने बताया कि रातभर वह लोग कहां गए, कहां घूमे, इसकी जानकारी तो नहीं हैं, बस इतना पता चला है कि सुबह 4 बजे जौरासी मंदिर के सामने जो, चाय-नाश्ते की दुकानें लगती हैं। वहां सभी लोग चाय पीने गए थे। इससे पहले भी कई बार जौरासी मंदिर पर सुबह-सुबह चाय-नाश्ते के लिए जा चुके हैं।

दोस्त की बर्थडे के लिए छुट्टी लेकर गुड़गांव से ग्वालियर आया था शिवम

ऐसा पता लगा है कि शनिवार को किसी दोस्त का बर्थडे था। जिसे सेलिब्रेट करने के लिए यह सभी दोस्त निकले थे। पूरी रात इन लोगों ने जश्न मनाया है। रविवार सुबह जब नाश्ते की तलब मची तो जौरासी घाटी स्थित हनुमान मंदिर के सामने नाश्ता करने पहुंच गए। यहां से लौटते समय मालवा कॉलेज के सामने फॉर्च्यूनर कार हादसे का शिकार हो गई। जिसमें आदित्यपुरम निवासी शिवम राजपुरोहित की भी मौत हुई है।

शिवम के बारे में पता लगा है कि वह गुड़गांव से इंजीनियरिंग कर रहा था। पिता का सपना था कि वह एक सफल इंजीनियर बने। शिवम हाल ही में एक दोस्त के बर्थडे के लिए गुड़गांव से ग्वालियर आया था। रास्ते में प्रिंस, आदित्य, अभिमन्यु और कौशल मिल गए। जिनके साथ में रात को जश्न मनाने निकल पड़ा और हादसे में अपनी जान गंवा दी। शिवम के पिता राकेश नारायण भागवत आचार्य हैं।

मृतक शिवम राजपुरोहित, जिसकी हादसे में मौत हो गई।

मृतक शिवम राजपुरोहित, जिसकी हादसे में मौत हो गई।

हादसे के समय कौशल चल रहा था कार

घटना के समय कार की स्पीड और चालक को लेकर कई बातें सामने आई हैं। घटना के बाद जब पुलिस स्पॉट पर पहुंची तो चालक की सीट पर, जो व्यक्ति फंसा मिला। उसकी पहचान कौशल भदौरिया के रूप में हुई है। इससे साफ है कि घटना के समय गाड़ी कौशल भदौरिया चल रहा था।

मृतकों के दोस्तों से पता लगा है कि कौशल को स्पीड में गाड़ी दौड़ने का बहुत शौक था। वह जब भी गाड़ी चलाता था तो स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटे से कम नहीं होती थी। सभी पांच दोस्त, जिनकी मौत हुई है, उनमें कौशल अकेला ही ऐसा था जिसकी शादी हो चुकी है। कौशल की तीन साल पहले शादी हुई थी। पत्नी का नाम निशी है और एक डेढ़ साल की बिटिया भी है। दो महीने पहले कौशल के पिता को कैंसर हुआ है।

घर से बिना बताए निकला था अभिमन्यु

रविवार को हुए हादसे में एक मौत 21 वर्षीय अभिमन्यु सिंह तोमर की हुई है। अभिमन्यु के पिता लोकेंद्र सिंह तोमर स्वास्थ्य विभाग में अधिकारी हैं और अभी पांडिचेरी में पदस्थ हैं। मूल रूप से अंबाह-पोरसा (मुरैना) के रहने वाले अभिमन्यु अपनी मां, छोटा भाई के साथ भगत सिंह नगर में किराए पर रहता था।

शनिवार रात को वह भी मां को बिना बताए घर से निकला था, जो फिर कभी वापस नहीं लौटा। घटना के बाद अभिमन्यु की मां और छोटा भाई पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, उनका रो-रो कर बुरा हाल था। मां बार-बार यही कह रही थी इसके बिना अब मैं कैसे रहूंगी।

अपने घर में इकलौता था आदित्य हादसे में जान गंवाने वाले 22 वर्षीय आदित्य बीसीए का छात्र था। वह भी अपने पिता का इकलौता बेटा था। घटना के वक्त वह कार में अपने अन्य दोस्तों के साथ ठीक ड्राइवर के पीछे वाली सीट पर बैठा हुआ था।

हादसे में जान गंवाने वाले रेगुलर दोस्त नहीं थे

मृतक प्रिंस और आदित्य के दोस्तों ने बताया कि प्रिंस और आदित्य के साथ तीन लड़कों की डेथ हुई है। उनके साथ उसका रोज उठना बैठना नहीं था, यह रेगुलर फ्रेंड नहीं थे। यह कभी-कभी मिलते थे। कल किसी का बर्थडे था, जिस कारण यह सभी एक साथ जश्न मनाने निकले थे। रात 9:00 तक प्रिंस उन्हीं के साथ था। इसके बाद अपने पिता की कार लेकर अन्य दोस्तों के साथ जश्न मनाने गया था।

समोसा पार्टी करने पहुंचे थे जौरासी ऐसा पता लगा है कि सभी मृतक रात भर साथ थे और ड्रिंक भी की थी, सुबह भूख लगी तो समोसा खाने के लिए जौरासी घाटी स्थित हनुमान मंदिर पहुंचे थे। यहां मंदिर के सामने नाश्ते की दुकान पर समोसे खाए हैं और फिर वापस घर आने के लिए निकले थे। अभी 10 मिनट भी नहीं चले थे कि फॉर्च्यूनर गाड़ी हादसे का शिकार हो गई।

एक साथ निकले पांच दोस्तों के शव ग्वालियर में रविवार दोपहर को पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जो मंजर था वह दिल दहला देने वाला था। जिस तरह एक साथ शनिवार की रात को पांचों दोस्त जश्न मनाने निकले थे। इस तरह एक के बाद एक दोस्त के शव को उनके परिजन पोस्टमार्टम के बाद एम्बुलेंस से ले जाते निकल रहे थे।

रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर हुई कार्रवाई रेत से भरी ट्रॉली से टकराकर पांच युवकों की मौत होने की सूचना मिलते ही माइनिंग विभाग की टीम सुबह ही सड़कों पर उतर आई। रेत से भरे ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर धड़ाधड़ कार्रवाई होने लगी। माइनिंग व प्रशासन की टीम देखकर रेत से भरी ट्रॉलियां सड़क से गायब हो गई।



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