नर्सिंग प्रवेश में तीसरे चरण की काउंसलिंग बीएससी तक सीमित: ​​​​​​​अन्य कोर्स बाहर होने से स्टूडेंट प्रभावित, एनएसयूआई ने लगाया पक्षपात का आरोप – Bhopal News

नर्सिंग प्रवेश में तीसरे चरण की काउंसलिंग बीएससी तक सीमित:  ​​​​​​​अन्य कोर्स बाहर होने से स्टूडेंट प्रभावित, एनएसयूआई ने लगाया पक्षपात का आरोप – Bhopal News



मध्यप्रदेश की नर्सिंग प्रवेश प्रक्रिया पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बीएससी नर्सिंग को छोड़कर जीएनएम, पीबीबीएससी और एमएससी नर्सिंग को तीसरे चरण की काउंसलिंग से बाहर रखे जाने के फैसले ने हजारों छात्रों की उम्मीदों को झटका दिया है।

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एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने इसे छात्रहित के खिलाफ, संदेहास्पद और पक्षपातपूर्ण निर्णय बताते हुए प्रमुख सचिव से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का कहना है कि पहले दो चरणों में सभी कोर्सों की काउंसलिंग साथ हुई, फिर तीसरे चरण में सिर्फ एक कोर्स को शामिल करन के पीछे कारण स्पष्ट किए जाए।

परमार ने कहा, विभाग ने 17 नवंबर से शुरू हो रही तीसरे चरण की काउंसलिंग केवल बीएससी नर्सिंग तक सीमित कर दी है। जीएनएम, पीबीबीएससी और एमएससी नर्सिंग के हजारों छात्र, जो सीटों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, अब इस चरण में शामिल नहीं किए गए।

काउंसिल का पक्ष- कोर्ट केस के कारण रोकी गई काउंसलिंग मामले में नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार मुकेश सिंह ने बताया कि जीएनएम, पीबीबीएससी और एमएससी नर्सिंग को लेकर एक मामला अदालत में लंबित है। काउंसिल ने इसमें Interlocutory Application (IA) दायर की है, जो कोर्ट से अंतरिम अनुमति मांगने की प्रक्रिया है। कोर्ट की अनुमति मिलते ही अन्य कोर्सों को भी काउंसलिंग में शामिल किया जाएगा।

एनएसयूआई ने लिखा पत्र संगठन ने प्रमुख सचिव के नाम इस विषय को लेकर पत्र लिखा है। जिसमें सवाल किए गए हैं कि क्या सभी नर्सिंग कोर्सों के लिए समान काउंसलिंग प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए, तीसरे चरण से अन्य कोर्सों को बाहर रखने का क्या आधार है और क्या यह निर्णय निजी नर्सिंग कॉलेजों के हित में लिया गया है?

जिलाध्यक्ष अक्षय तोमर ने आरोप लगाया कि यह निर्णय छात्रों के नहीं, बल्कि निजी कॉलेजों के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया लगता है। हजारों योग्य छात्र सीट के इंतजार में बैठे हैं और उन्हें अवसर से वंचित किया जा रहा है।



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