मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के छोटे से गांव तलवाडिया में जन्मे तरुण पटेल ने वो कर दिखाया जो कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है. एक गरीब किसान का बेटा होकर भी उन्होंने अपने हौसले और मेहनत के दम पर चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनकर नई मिसाल कायम की है. तरुण की यह कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि संघर्ष, त्याग और निरंतर प्रयास की कहानी है.
मामा के घर रहकर की पढ़ाई
तरुण पटेल की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी. उनके पिता त्रिलोक पटेल एक छोटे किसान हैं. मिस्री का काम भी करते हैं. घर की आमदनी इतनी नहीं थी कि शहर जाकर पढ़ाई कर सकें. ऐसे में तरुण ने अपने मामा CA शोभाराम पटेल के गांव मलगांव में रहकर पढ़ाई करने का निर्णय लिया. मामा खुद एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं.उन्होंने तरुण को प्रेरित किया कि अगर हिम्मत रखो और मेहनत करो तो कुछ भी असंभव नहीं है. तरुण बताते हैं कि बचपन से ही मामा और नाना के सानिध्य में रहे हैं. गांव के सादे माहौल में पले-बढ़े तरुण रोजाना 10 से 12 घंटे तक पढ़ाई करते थे. उनके दिन की शुरुआत किताबों से होती है. अंत भी किताबों के साथ ही होता था.
संघर्ष से सफलता तक का सफर
CA बनने का सफर आसान नहीं था. तरुण ने 7 साल तक लगातार मेहनत की. बीच में कई बार असफलताएं मिलीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. हर बार वे और मजबूती से आगे बढ़ते गए. तरुण कहते हैं कि कई बार मन टूट जाता था, लेकिन मामा के शब्द याद आते थे. हार मत मानो, मंजिल जरूर मिलेगी. वही हौसला मुझे आगे बढ़ने की ताकत देता था.
परिवार की प्रेरणा बनी ताकत
तरुण की मां ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। घर की आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. पिता खेतों में दिनभर मेहनत करते ताकि बेटे के सपने पूरे हो सकें. तरुण कहते हैं कि मेरे पिता के पसीने की हर बूंद मेरी सफलता में शामिल है.
गांव के युवाओं के लिए मिसाल
आज तरुण पटेल चार्टर्ड अकाउंटेंट बन चुके हैं. उनका नाम पूरे इलाके में चर्चा का विषय है. गांव के बच्चे उन्हें देखकर प्रेरित हो रहे हैं. अगर गांव के बच्चे दृढ़ निश्चय के साथ मेहनत करें, तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है.शहर में पढ़ाई के साधन अधिक हैं, लेकिन गांव के बच्चों में लगन और जज्बा ज्यादा होता है. मैं चाहता हूं कि मेरे जैसे हर बच्चे को पढ़ाई का मौका मिले, ताकि कोई भी अपनी गरीबी को अपनी कमजोरी न समझे.
शिक्षा ही असली संपत्ति
तरुण की कहानी यह साबित करती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर मेहनत और विश्वास हो तो मंजिल जरूर मिलती है. उन्होंने अपने गांव, परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। आज वे कई युवाओं के रोल मॉडल बन चुके हैं.मेरी यह सफलता सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि उन सभी माता-पिता की मेहनत का परिणाम है जो अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष करते हैं. अगर मेरे जैसे किसान का बेटा CA बन सकता है, तो कोई भी बन सकता है.
निष्कर्ष
तरुण पटेल की यह सफलता कहानी हमें यह सिखाती है कि संघर्ष ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है. उन्होंने 7 साल तक बिना थके मेहनत की, और अंततः अपने सपनों को हकीकत में बदला. गांव का साधारण लड़का आज एक सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट है यह बात खुद में एक प्रेरणा है कि “अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है