Ground Report: पहले पैसे दो फिर इलाज होगा, नहीं तो…जानें कैसे काम करता है मेडिकल माफिया

Ground Report: पहले पैसे दो फिर इलाज होगा, नहीं तो…जानें कैसे काम करता है मेडिकल माफिया


मध्य प्रदेश का बालाघाट का जिला अस्पताल इन दिनों चर्चाओं में है. दरअसल, महीने भर में दो बार सीजर के लिए पैसे मांगे जाने और एंबुलेंस से मरीजों को लाने के लिए पैसे मांगे जाने का मामला सामने आया है. ऐसे में दो मरीजों की मौत हुई है. ताजा मामला 12 नवंबर का है, जहां पर एक प्रसूता के सीजर करने के लिए सरकारी अस्पताल में पैसे मांगे जाने का मामला सामने आया है. यह पहली बार नहीं है, जिसमें मरीजों के परिजनों से पैसे मांगे गए हो. दरअसल, लोकल 18 के हाथ दो साल पुराना वीडियो भी लगा, जिसमें मरीज बता रहे हैं कि किस तरह मरीजों के परिजनों को पैसे देने के लिए मजबूर किया जा रहा है…

सबसे पहले जानिए क्या है ताजा मामला
लोकल 18 टीम जिला अस्पताल पहुंची, वहां मरीजों के परिजनों से मुलाकात की. ऐसे में रट्टापायली की रहने वाली किरण डोंगरे भर्ती थी. उनकी मां इंद्रकला मेश्राम ने बताया कि 12 नवंबर की दोपहर में उनकी बेटी को लेकर अस्पताल पहुंचे थे. ऐसे में शाम चार बजे उनकी बेटी किरण को प्रसव पीड़ा शुरू हुई. इसके बाद आशा कार्यकर्ता को जानकारी दी और उन्होंने प्रसव कक्ष में ले जाया गया. लेकिन रात 10 बजे पेट का दर्द बंद हो गया. फिर उन्होंने कोई इंजेक्शन लगाया.

दर्द बंद हुआ था, परिजनों ने मांग की कि उनका सीजर करवा दिजीए. लेकिन डॉक्टरों ने ध्यान नहीं दिया. वहीं, बार-बार मरीज को चेक करने का अनुरोध किया, तो डॉक्टर ने 7000 रुपए मांगे. मरता क्या न करता…उन्होंने हामी भर दी और पैसे का इंतजाम करने की बात कही. लेकिन डॉक्टरों ने लापरवाही बरती. फिर सुबह जानकारी दी की बच्चा पेट में शांत हो गया. इसके बाद भी स्टाफ ने ध्यान नहीं दिया और परिजनों से कहने लगे हम हमारे टाइम पर करेंगे. नतीजन, परिजनों ने हंगामा किया और मामला उजागर हुआ. इतना ही नहीं अस्पताल पहुंचने के लिए, जिस एंबुलेंस को बुलाया था उन्होंने भी 300 रुपए लिए थे.

पहले भी आए ऐसे मामले
5 नवंबर को भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जो कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचा था. दरअसल, दक्षिण बैहर में मलेरिया फैला हुआ है. ऐसे में कई लोग इससे प्रभावित हो रहे है. दरअसल, 8 महीने की गर्भवती रतनी मरकाम भी मलेरिया से पीड़ित थी. ऐसे में वह जिला अस्पताल में इलाज के लिए आई लेकिन स्टाफ ने सीजर के नाम पर उनसे पांच हजार रुपए अवैध तरीके से वसूल लिए. हालांकि, बाद में पता चलने के बाद उन्हें पैसे भी वापस दिए गए. लेकिन मामले की शिकायत कलेक्टर कार्यालय तक पहुंची. इसके बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर गीता बारमाटे सहित अन्यों पर कार्रवाई की बात की गई लेकिन अब तक कोई खास कार्रवाई नहीं हुई.

27 अक्टूबर को एंबुलेंस संचालक ने मांगे थे रुपए
27 अक्टूबर को भी एक ऐसा मामला सामने आया था, जब ग्राम रट्टा की रहने वाली 20 साल की गायत्री उइके की मौत हो गई. दरअसल, सामुदायिक केंद्र बिरसा से अस्पताल रेफर किया गया. फिर रात के 10 बजे एंबुलेंस बिरसा पहुंची थी. फिर 10 बजे वहां से एंबुलेंस निकली. ऐसे में वह डेढ़ घंटे में बालाघाट पहुंच सकते थे लेकिन ड्राइवर ने तेंदुआ देखने के बहाने एंबुलेंस जंगल में ही रोक दी और फिर 700 रुपए मांग लिए. ऐसे में गरीब आदिवासियों ने उनसे गुहार लगाई की आप पहले अस्पताल चलिए फिर आपकी व्यवस्था कर देंगे लेकिन वो दोनों नहीं माने. इसके बाद परिजनों ने 600 रुपए दिए, जिसके बाद एंबुलेंस आगे बढ़ी. ऐसे में मरीज को अस्पताल लाने में देर हो गई और उसने दम तोड़ दिया. हालांकि, दोनों आरोपियों पर कार्रवाई हुई लेकिन स्त्री रोग विशेषज्ञ विभाग से बार-बार ऐसे मामले आने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई.
“लोकल 18 के हाथ लगा दो साल पुराना वीडियो, जिसमें महिला बता रहीं कि किस तरह पैसे देने के लिए स्टाफ मजबूर करता है, जानिए पूरा मामला”

लोकल 18 को एक महिला ने नाम उजागर न करने की शर्त पर वह वीडियो दिया. वहीं, बताया कि  उन्होंने दो साल पहले यह वीडियो बनाया था. इसमें महिला पूछती है कि साढ़े पांच हजार रुपए दिए, तो जल्दी इलाज होता है. वहीं, नहीं दिए तो…तब दूसरी महिला कहती है कि पैसे नहीं दिए, तो दो से चार दिन इंतजार करती है. वहीं, पैसे दे  दिए तो जिस दिन लाए उसी दिन इलाज होगा. पैसे कैसे देते हैं, छिप कर देते हैं, सरकारी है मुफ्त इलाज होता है. वहीं, इसमें पहली महिला कहती है ये है बूढ़ी हास्पिटल जहां पर 5000 रुपए दो तो इलाज होता है.

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि संविधान में जीवन जीने का अधिकार है, इसी के तहत राज्य की. जिम्मेदारी बनती है कि वह हर एक नागरिक को गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सुविधाएं दे लेकिन सरकारी अस्पतालों में ही ऐसी लूट मचेगी तो आम नागरिक कहा जाएं. सरकारी अस्पताल में ज्यादातर वहीं लोग आते हैं जो सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े होते हैं. ऐसे में आम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए.

कलेक्टर का दौरा और कार्रवाई का आश्वासन
गर्भ में बच्चे की मौत का मामला उजागर होने के बाद प्रशासन हरकत में आया. इसके बाद सीएमएचओ डॉक्टर परेश उपलव ने आरोपी स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन भेजने की बात कहीं लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. वहीं, जिला कलेक्टर मृणाल मीना ने भी अस्पताल का दौरा किया और इस मामले में कार्रवाई के लिए प्रस्ताव मंगाने की बात कही हैं.

परिजनों को न्याय की उम्मीद
पीड़िता  किरण डोंगरे की सास और मां दोनों ने एक स्वर में कहा कि अस्पताल में आए दिए ऐसे मामले आते हैं, जिसके बाद तमाशा भी होता है लेकिन किसी का कुछ नहीं बिगड़ता है. फिर भी वह सिस्टम पर भरोसा करती है और उम्मीद करती है कि जो किसी जान से खिलवाड़ कर रहे है उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग करती है.



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