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जीतने की इच्छा टेस्ट क्रिकेट की कीमत पर नहीं हो सकती. भारत भले ही जीत जाए, लेकिन टेस्ट क्रिकेट एक ब्रांड के रूप में हार सकता है.कुछ भी हो, हमें एक संतुलन बनाने की ज़रूरत हैमैच जीतने की चाहत और यह सुनिश्चित करने के बीच कि टेस्ट मैच दो दिन में खत्म न हों. दुनिया भर के क्यूरेटर्स को अपनी बात रखने का अधिकार और आज़ादी मिलनी चाहिए और ICC को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए.
नई दिल्ली. टीमें जीतने के लिए खेलती हैं, और अंत में वही मायने रखता है. उदाहरण के लिए, कोई यह याद नहीं रखता कि जनवरी 2025 में सिडनी की पिच बेहद ख़राब थी. बहुत कम लोगों को याद है कि जनवरी 2024 में केप टाउन का मैच दो दिनों में खत्म हो गया था. जो याद रहता है वह यह कि ऑस्ट्रेलिया ने एससीजी में जीत दर्ज कर सीरीज़ 3-1 से अपने नाम की, और भारत ने न्यूलैंड्स में दक्षिण अफ्रीका को पहली पारी में 55 रन पर ऑल आउट कर हराया. एससीजी की विकेट ने कुछ भौहें ज़रूर उठाईं, जबकि न्यूलैंड्स की पिच को ‘अनसैटिस्फैक्टरी’ रेटिंग मिली. इसके बावजूद टीमें अपनी पसंद की पिचें तैयार करवाती रही हैं, जिससे पांच दिन के टेस्ट मुकाबले तीन दिनों में सिमट जाते हैं.
घरेलू परिस्थितियों से होने वाले फ़ायदे से किसी को कोई दिक्कत नहीं है. यही टेस्ट क्रिकेट की खूबसूरती है. मुझे टर्नर पिचों या हरे मैदानों से भी आपत्ति नहीं लेकिन मुझे गंभीर आपत्ति है जब टेस्ट मैच ढाई दिन में खत्म हो जाते हैं. ईडन गार्डन्स की भीड़ को ही ले लीजिए. पहले दिन 36,000 से अधिक दर्शक थे, और दूसरे दिन लगभग 42,000. वे हर गेंद पर उत्साहित थे, हर अच्छे शॉट या गेंदबाज़ी पर तालियां बजाते थे.
क्यूरेटर आईसीसी के बीच सीधा संवाद हो
हाल ही में भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज़ शानदार इसलिए थी क्योंकि हर मैच पांचवें दिन तक गया. कम से कम मैच चौथे दिन तक तो पहुँचना ही चाहिए. यही खेल को 150 वर्षों से बनाए हुए है, और इसे छेड़ना नहीं चाहिए.
कुछ भी हो, मैच जीतने की चाह और टेस्ट को दो दिन में खत्म होने से बचाने के बीच संतुलन ज़रूरी है. दुनिया भर के क्यूरेटर्स को यह अधिकार होना चाहिए कि अगर उन पर दबाव डाला जा रहा हो तो वे अपनी बात रख सकें, और ICC को आगे आकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि तीन दिन से कम चलने वाले टेस्ट मैच टीमों के खिलाफ गिने जाएं. खासतौर पर WTC में जो ICC के बैनर तले खेला जाता है उनका क्यूरेटर होना चाहिए ताकि जवाबदेही तय हो सके.
टेस्ट का फ्यूचर हैं फैंस
किसी भी स्थिति में फैन को वंचित नहीं किया जा सकता. वे इस खेल की जान हैं और इसे जीवित रखते हैं. ईडन गार्डन्स आज फिर 45,000 दर्शकों की मेजबानी कर सकता था, अगर पूरे दिन के खेल की उम्मीद होती. तभी यह देखकर दुख होता है कि मैच ढाई दिन में खत्म हो जाते हैं. जहाँ तक भीड़ का सवाल है, मैं चाहता हूँ कि फैंस बड़ी संख्या में आएं. भले ही सिर्फ दो सेशन हों. मुझे याद है 1993 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मैच में लोग तब भी आए थे जब अंतिम दिन सुबह सिर्फ एक घंटे का खेल बाकी था और तब भी ईडन खचाखच भरा था. तीन महीने पहले द ओवल में भी ऐसे ही नज़ारे देखने को मिला. चूंकि ईडन गार्डन्स में अगला रेड-बॉल टेस्ट शायद देर से ही हो, इसलिए दर्शकों के लिए यह ज़रूरी है कि वे इसका पूरा लुत्फ़ उठाएँ.