गाय की ये नस्ल पशुपालकों को बना देगी मालामाल, रोजाना देती है 10 से 15 लीटर दूध

गाय की ये नस्ल पशुपालकों को बना देगी मालामाल, रोजाना देती है 10 से 15 लीटर दूध


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साहीवाल नस्ल भारत की श्रेष्ठ देसी गायों में गिनी जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह रोजाना औसतन 10 से 15 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है. इतना ही नहीं, इसका दूध हाई-फैट और हाई-प्रोटीन होने के कारण बाज़ार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है.

ग्रामीण भारत में पशुपालन सदियों से जीवनयापन का मजबूत आधार रहा है. समय के साथ खेती के साथ-साथ डेयरी व्यवसाय भी तेजी से बढ़ा है. खासकर छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों के बीच ऐसे में अगर किसी किसान को ऐसी गाय मिल जाए, जो कम देखभाल में ज्यादा दूध दे, बीमार कम पड़े. बाजार में अच्छे दाम दिलाए इससे बेहतर सौदा क्या हो सकता है? आज हम बात कर रहे हैं. एक ऐसी ही अद्भुत देसी नस्ल की जो देशभर के छोटे पशुपालकों के लिए वरदान साबित हो रही है

साहीवाल नस्ल भारत की श्रेष्ठ देसी गायों में गिनी जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह रोजाना औसतन 10 से 15 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है. इतना ही नहीं, इसका दूध हाई-फैट और हाई-प्रोटीन होने के कारण बाज़ार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. आमतौर पर देसी गाय का दूध 50 से 60 रुपये प्रति लीटर तक आसानी से बिक जाता है, ऐसे में एक साहीवाल गाय अकेली ही किसान को रोज की अच्छी कमाई दे सकती है.

साहीवाल गाय क्यों है खास
साहीवाल गाय का शरीर मजबूत होता है और रंग हल्का लाल-भूरा या महोगनी शेड का होता है. यह गाय ज्यादा गर्मी होने पर भी आसानी से रह लेती है. यही कारण है कि यह भारत की जलवायु में बिना किसी दिक्कत के खूब फलती-फूलती है. दूसरी नस्लों की तुलना में इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है, जिससे इलाज और दवाइयों पर होने वाला खर्च कम हो जाता है. साहीवाल गाय का घी और दूध दोनों आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर माने जाते हैं. देसी नस्ल होने के कारण इसका दूध A2 प्रोटीन की श्रेणी में आता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी है। यही वजह है कि बाजार में लोग इसे साधारण दूध से ज्यादा प्राथमिकता देते हैं.

अधिक लाभ का फार्मूला
छोटे पशुपालक आमतौर पर उन नस्लों की तलाश करते हैं, जिनकी देखभाल आसान हो और चारा-पानी में ज्यादा खर्च न हो. साहीवाल गाय इसी कारण बेहद लोकप्रिय है. यह गाय मोटे तौर पर सामान्य चारे में भी अच्छे से टिक जाती है. इसकी प्रजनन क्षमता भी बेहतर मानी जाती है, जिससे पशुपालकों के लिए नस्ल विस्तार करना आसान होता है. अगर किसी किसान के पास 2 से 3 साहीवाल गाय हैं, तो वह सिर्फ दूध बेचकर ही महीने का अच्छा मुनाफा कमा सकता है. यही नहीं, इनके बछड़े भी बाज़ार में अच्छी कीमत पर बिक जाते हैं.

मलगांव के किसान राकेश पटेल की सफलता
खंडवा जिले के मलगांव गांव के किसान राकेश पटेल पिछले कई वर्षों से डेयरी व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. उनके परिवार में दो पीढ़ियों से दूध का कारोबार चलता आ रहा है. राकेश के पास अभी करीब 7 से 8 गायें हैं, जिनमें साहीवाल के साथ-साथ गिर और HF जर्सी नस्ल की गायें भी शामिल हैं.राकेश बताते हैं कि although HF और जर्सी गाय ज्यादा दूध देती हैं, लेकिन साहीवाल गाय का दूध सबसे ज्यादा पौष्टिक होता है. बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. उनके अनुसार—“साहीवाल गाय कम बीमार पड़ती है, देखभाल भी आसान है और इसका दूध बहुत अच्छा दाम देता है। छोटे किसानों के लिए यह सबसे बढ़िया नस्ल है.

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