नक्सलियों की रीढ़ टूटी! पहले बसवा राजू, अब खूंखार कमांडर हिडमा ढेर… नक्सल संगठन का क्या होगा?

नक्सलियों की रीढ़ टूटी! पहले बसवा राजू, अब खूंखार कमांडर हिडमा ढेर… नक्सल संगठन का क्या होगा?


Top Naxal Commander Madvi Hidma Death: छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश की सीमा से नक्सल मूवमेंट के लिहाज से एक बड़ी खबर सामने आई है. सुरक्षाबलों ने 6 हार्डकोर नक्सलियों को मार गिराया है. इसमें भी खास बात ये है कि नक्सली हिडमा और उसकी पत्नी राजे उर्फ रज्जका के मारे जाने की खबर सामने आई है. इस मुठभेड़ में 6 नक्सली मारे गए हैं. अब भी सुरक्षा बल अभी मोर्चा संभाले हुए हैं.

कौन था हिडमा?
हिडमा छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से ताल्लुक रखता था. वह 1996 में नक्सल संगठन में शामिल हुआ था.  वह पीएलजीए बटालियन-1 का कमांडर था. पीएलजीए यानी पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी का प्रमुख था. वह AK-47 सहित कई आधुनिक हथियारों का जानकार था. साथ ही गुरिल्ला वारफेयर और जंगल की लड़ाई में एक्सपर्ट था. वह कई बड़ी घटनाओं का मास्टरमाइंड था. इनमें 76 सीआरपीएफ जवानों की हत्या भी शामिल है. इसके अलावा झीरम घाटी हत्याकांड में भी उसकी संदिग्ध भूमिका थी. उस पर एक करोड़ रुपए का ईनाम घोषित था.

उसकी मां ने की थी अपील
हाल ही में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने उसकी मां से मुलाकात की थी. इसके बाद उसकी मां ने हिडवा से अपील की थी कि लौट आ बेटा. इस लड़ाई में कुछ नहीं रखा है. ऐसे में अब उसके एनकाउंटर की खबर सामने आई है.

अब जानिए, नक्सली हिडमा की मौत से मूवमेंट पर क्या असर होगा
1967 में नक्सलबाड़ी से शुरू हुई सशस्त्र क्रांति अब अपने अंतिम दौर से गुजर रही है. दरअसल, इसी साल CPI (माओवादी) के महासचिव बसवाराजू की मौत के बाद से ही नक्सलियों के बड़े काडर में हलचल मच गई थी. शीर्ष नक्सलियों के आपसी कनेक्शन टूट से गए थे. संगठन को संवारने का मौका भी नहीं मिला. ऐसे में सभी सीसी मेंबर अपने हिसाब से संगठन को चला रहे थे.

हाल ही में दो बड़े नक्सलियों ने किया सरेंडर
बीते महीने पहले महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में सीसी मेंबर सोनू दादा सहित 60 नक्सलियों ने सरेंडर किया था. उसके ठीक बाद दूसरे सीसी मेंबर रुपेश ने 210 नक्सलियों के साथ सरेंडर किया था. ऐसे में मूवमेंट पर बड़ा असर हुआ था. वहीं, बाकी सीसी मेंबर ने आपत्ति जताते हुए उन्हें गद्दार घोषित किया था. ऐसे में बाकी शीर्ष नक्सलियों ने साफ कर दिया था कि सरेंडर करने वाले को गद्दार घोषित किया जाएगा. यह भी एक वजह है कि हिडवा ने सरेंडर नहीं किया.

शीर्ष नेतृत्व की कमी से जूझ रहा सगंठन
बड़ी संख्या में शीर्ष नक्सलियों के मारे जाने के बाद और कुछ के सरेंडर करने के बाद नक्सली संगठन शीर्ष नेतृत्व की कमी से जूझ रहा है. दरअसल, बसवाराजू के मारे जाने के बाद से सेंट्रल कमेटी में महासचिव भी नहीं बन पाया है. ऐसे में नक्सल संगठन बेलगाम और कमजोर हो चुका है. अब उनके पास सरेंडर करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है. इसलिए धीरे-धीरे नक्सली बड़ी संख्या में सरेंडर कर रहे हैं.

सीसी मेंबर रामदेर अभी भी एक्टिव
सीसी मेंबर रामदेर
मध्य प्रदेश के बालाघाट में महज 25 से 30 नक्सलियों के साथ एक्टिव है. हाल ही में एमएमसी जोन के तीन नक्सली संगठन छोड़ चुके हैं, जिसमें सुनीता और एक महिला नक्सली ने सरेंडर किया है. वहीं, रोहित भी संगठन छोड़ कर चला गया है. इसके अलावा सीसी मेंबर देवा और गणपति के भी आपसी कनेक्शन की खबरें सामने नहीं आ रही है. ऐसे में ज्यादातर नक्सली अब लड़ना नहीं चाहते, वह सरेंडर के मूड में हैं.

हिडमा के मारे जाने से कितना असर
हिडमा के मारे जाने के बाद नक्सली मूवमेंट का क्या होगा ये जाानने के लिए लोकल 18 की टीम ने बालाघाट नक्सल ऑपरेशन के एडिशनल एसपी आदर्शकांत शुक्ला से बातचीत की. उन्होंने बताया कि हिडमा हथियार पसंद नक्सली था. उसकी मौत से मार्च 2026 की डेडलाइन को हासिल करने में मदद मिलेगी. वहीं, नक्सल मूवमेंट पर बड़ा डेंट भी बढ़ेगा. ये एक बड़ी सफलता है. ऐसे में बाकि सीसी मेंबर सोचने पर मजबूर होंगे कि उन्हें सरेंडर कर लेना चाहिए, नहीं तो किसी न किसी ऑपरेशन में उन्हें अपनी जान गवानी पड़ेगी.

सरेंडर करें पॉलिसी का लाभ लें
बालाघाट नक्सल ऑपरेशन के एडिशनल एसपी आदर्श कांत शुक्ला ने बताया कि हिडमा की मौत के बाद सरेंडर की संभावना बढ़ गई है. हाल ही में सुनीता ने सरेंडर किया था. ऐसे में उन्हें सरेंडर कर सरकारी की सरेंडर पॉलिसी का फायदा मिलेगा. वहीं, सरकार भी मुख्यधारा में लौटने में मदद करेगी.

MMC जोन में संयुक्त ऑपरेशन जारी
मिली जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार एमएमसी जोन में संयुक्त रूप से ऑपरेशन चला रही है. ऐसे में रामदेर और उसके 25 से 30 साथियों के सरेंडर न करने पर उन्हें भी खामियाजा भूगतना पड़ सकता है.



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