Indore News: इंदौर शहर वैसे तो अपने खाने-पीने के लिए पूरे देश में मशहूर है, लेकिन अब यहां के फूडीज के लिए एक और नया, अलग और बेहद हेल्दी ऑप्शन जुड़ गया है अप्पे. जो कभी सिर्फ महाराष्ट्रीयन घरों के नाश्ते में दिख जाते थे, अब वे इंदौर की सड़कों पर भी अपना स्वाद बिखेर रहे हैं. इस डिश को इंदौर में फिर से पॉपुलर बनाने का श्रेय एक ऐसी बहू को जाता है जिसने न सिर्फ अपने हुनर से कमाल किया, बल्कि अपनी सास का सपना भी पूरा कर दिखाया.
LIG–पाटनीपुरा रोड पर लगे ‘आई के अप्पे’ नाम के स्टॉल ने फूडीज का दिल जीत लिया है. यह स्टॉल चलाती हैं नेहा कुलकर्णी, और जितना प्यारा इस स्टॉल का नाम है, उतना ही मजेदार और दिल छू लेने वाला इसका सफर. “आई” यानी मां नाम में ही प्यार, आशीर्वाद और होम-फीलिंग है. शायद इसी वजह से यहां बनने वाले अप्पों में घर जैसा स्वाद और अपनापन महसूस होता है.
नेहा बताती हैं कि यह सिर्फ एक बिज़नेस नहीं, बल्कि उनकी सास शीला कुलकर्णी का सपना है. शीला जी को शुरू से खाना बनाने का शौक था और वे छोटे से टिफिन सेंटर में काम भी करती थीं, लेकिन मन में हमेशा एक इच्छा थी कुछ अपना करना… कुछ ऐसा जो अलग हो. वे चाहती थीं कि अमेरिका की तरह यहां भी फूड ट्रक या स्पेशल फूड स्टॉल का एक नया कल्चर बने.
जब नेहा शादी करके इस घर में आईं, तभी उन्हें पहली बार यह सपना पता चला. धीरे-धीरे उन्होंने देखा कि सासू मां के हाथ के बने अप्पे बेहद स्वादिष्ट होते हैं. बस यहीं से शुरू हुआ एक नया सफर. नेहा ने ठान लिया कि वह सास का सपना पूरा करेंगी. उन्होंने नौकरी छोड़कर “अप्पे स्टॉल” शुरू किया और कुछ ही महीनों में यह स्टॉल लोगों के बीच बेहद पॉपुलर हो गया. खास बात यह कि अब उनके पति भी इस काम में उनके साथ खड़े हैं.
उनके स्टॉल पर 15 तरह के अप्पे मिलते हैं कॉर्न, आलू, पनीर, बेसिक चावल-उड़द दाल वाले, और कई फ्लेवर्स जो इंदौर की स्वादप्रेमी जनता को खूब भा रहे हैं. अप्पों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पूरी तरह हेल्दी होते हैं ना मैदा, ना ग्लूटेन, सिर्फ चावल और उड़द दाल का बैटर. इन्हें खास सांचे में पकाया जाता है और नारियल, लहसुन-टमाटर, धनिया की चटनी या सॉस के साथ परोसा जाता है.
नेहा कहती हैं कि इंदौर की जनता हमेशा कुछ नया चाहती है. उसी ने मुझे मोटिवेट किया कि हम अलग-अलग तरह के अप्पे बनाएं और लोगों तक पहुंचाएं. आज ‘आई के अप्पे’ न सिर्फ एक स्टॉल है, बल्कि एक ऐसा उदाहरण है कि घर के सपने, मेहनत और परिवार का सपोर्ट मिल जाए तो छोटी सी शुरुआत भी बड़ा मुकाम हासिल कर सकती है.