सागर पुलिस, अपराधियों के दिलों में दहशत पैदा करने के लिए जानी जाती है, लेकिन अब खुद वह एक अजीब डर से जूझ रही है…भूतों का डर। सुरखी में बने पुलिस क्वार्टर पिछले 22 सालों से खाली पड़े हैं, क्योंकि कोई भी पुलिसकर्मी यहां रहने को तैयार नहीं है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि इन क्वार्टरों पर भूतों का साया है और इस डर से पुलिस भी खौफजदा है। हालांकि पुलिस अफसर आधिकारिक तौर पर यहां सुविधाओं की कमी बताकर शिफ्ट न होने की बात कहते हैं, लेकिन दबी जुबान में वे भी भूत-प्रेत की बात मानते हैं। यही कारण है कि पुलिसकर्मी थाने से सिर्फ एक किलोमीटर दूर स्थित इन क्वार्टरों में शिफ्ट नहीं हो पा रहे हैं।
दैनिक भास्कर की टीम ने इन क्वार्टरों में रात बिताई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
वर्ष 2003 में सुरखी में बनाए गए थे पुलिस क्वार्टर।
सबसे पहले जान लीजिए यहां बने सरकारी क्वाटर्स के बारे में…
सुरखी में पुलिस क्वार्टर का निर्माण 2003-04 में हुआ था। इसका उद्देश्य सुरखी थाने के पुलिसकर्मियों को आवास प्रदान करना था। क्वार्टर सुरखी नगर से करीब 1 किलोमीटर दूर सुनसान इलाके में बनाए गए। हालांकि, क्वार्टर के निर्माण और आरक्षण के बाद भी, कोई भी पुलिसकर्मी यहां रहने के लिए नहीं गया।
क्वार्टर में 8 परिवारों के रहने की व्यवस्था थी। दो मंजिल भवन में नीचे 4 और ऊपर 4 पुलिसकर्मी रह सकते हैं। जिसमें प्रत्येक क्वार्टर में दो रूम, किचन, बाथरूम और गैलरी बनाई गई है। इसके अलावा पीछे तरफ वाहन पार्किंग के लिए रूम बनाया गया है। जहां पुलिसकर्मी अपनी बाइक रख सकते थे।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इन क्वार्टरों पर शैतानी ताकतों का पहरा है, जिसके कारण पुलिसकर्मी यहां रहने से डरते हैं। इसके विपरीत, सुरखी थाने के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि भूत-प्रेत जैसी कोई चीज नहीं होती है और जब से वे यहां आए हैं, क्वार्टर खंडहर पड़े हैं।

खिड़कियों और सीढ़ियों पर पौधे उग आए हैं।
दीवारों पर स्लोगन, बिजली बोर्ड उखड़े मिले इस क्षेत्र में भूत-प्रेत का साया है। स्थानीय लोगों की इस कहानी को परखने के लिए दैनिक भास्कर की टीम सुरखी पहुंची। यहां शाम ढलते ही खंडहर हो चुके दो मंजिला पुलिस क्वार्टर के पास पहुंच गई। यह आवास सुरखी नगर से करीब एक किमी दूर और नेशनल हाईवे-44 से सटकर बने हुए हैं। वर्तमान में इसके पास एक वेयर हाउस बना है और आस-पास में खेत हैं। इस समय यहां फसल लहलहा रही है और किसान यहां रखवाली के लिए रात बिता रहे हैं।
जैसे-जैसे समय गुजरा अंधेरा गहराता गया। हाईवे से लगे होने से गाड़ियों के गुजरने की आवाजें तो आ रही थीं, लेकिन घुप अंधेरे के कारण अब पुलिस क्वार्टर डरावने लगने लगे थे। रात के 11 बजते-बजते पूरे इलाका अजीब से सन्नाटे में समा चुका था। भीतर जाने में डर लग रहा था।
मन में लोगों की कहानियां भी घूम रही थीं। हालांकि, भास्कर टीम ने रात बिताने के साथ ही घर के भीतर जाने का तय किया। अंधेरे को दूर करने के लिए मोबाइल की रोशनी का सहारा लिया। टीम पुलिस क्वार्टर के अंदर दाखिल हुई। रात के 12 बज चुके थे।
जिस डर को खोजने के लिए टीम यहां पहुंची थी, वह तो नजर नहीं आया, लेकिन जिस ओर देखो शराब की बोतलें और टूटे कांच बिखरे दिखे। दरवाजे, खिड़कियां और कांच के मानो निशां ही बचे हुए थे। बिजली बोर्ड उखड़े हुए थे। टूटी टाइल्स, दीवारों पर बनी अजीबोगरीब आकृतियां जरूर यहां डराने के लिए काफी थीं। साथ ही दीवारों में तरह-तरह के स्लोगन भी लिखे हुए थे।

खंडहर में तब्दील हुए क्वार्टर। खिड़की, बिजली बोर्ड तोड़े।
पहली मंजिल पर अंधेरा और खिड़कियां टूटी मिली
रात के करीब 2 बज चुके थे, लेकिन किसी प्रकार के साए की यहां आहट सुनाई नहीं दी। टीम पुलिस क्वार्टर की दूसरी मंजिल पर पहुंची। अंधेरे में अचानक मोबाइल की रोशनी देख कुछ पंछी उड़े, जिससे हल्की घबराहट हुई, लेकिन हिम्मत जुटाकर टीम कमरों के अंदर दाखिल हुए। यहां भी दरवाजे, खिड़की, टाइल्स, बिजली बोर्ड समेत दीवारों में टूट-फूट नजर आई। कमरों में गंदगी फैली हुई थी।
चारों तरफ शराब की बोतलों के टूटे कांच पड़े थे। दीवारों में असामाजिक तत्वों द्वारा आपत्तिजनक शब्द लिखे हुए थे। रातभर टीम पुलिस क्वार्टर में यहां-वहां घूमती रही, लेकिन किसी साए का अहसास नहीं हुआ और न ही कोई डर जैसा माहौल दिखा।
टीम को तो कोई शैतानी साया नहीं, सब यहां से यही समझकर बाहर निकली तो यह सिर्फ एक अंधविश्वास या फिर मन का वहम है। इन पुलिस क्वार्टरों के निर्माण और जगह चिंहित में लापरवाही का नतीजा है कि आज यह क्वार्टर खंडहर में तब्दील हो गए और एक भी पुलिसकर्मी रहने के लिए नहीं आया।


व्यवस्थाएं नहीं होने से रहने नहीं गए पुलिसकर्मी विभाग के लोग बताते हैं कि जिस समय सुरखी में इन पुलिस क्वार्टरों का निर्माण हुआ, उस समय सुरखी में विकास बहुत कम था। पुलिस क्वार्टर के आसपास खेत और सुनसान इलाका था। यहां न तो बिजली थी और न ही पीने के लिए पानी की व्यवस्था। इसके साथ ही सुनसान इलाके में रात के समय परिवार के साथ रहने में डर लगता था। मूलभूत व्यवस्थाएं नहीं होने के कारण पुलिसकर्मी इन क्वार्टरों में रहने के लिए नहीं गए थे।

सुरखी थाना के पुराने क्वार्टर क्षतिग्रस्त हालत में हैं, फिर भी पुलिसकर्मी उनमें निवास कर रहे हैं।
थाना परिसर में खस्ताहाल क्वार्टर में रहने मजबूर वर्तमान में सुरखी थाना में पदस्थ पुलिसकर्मी थाना परिसर में बने वर्षों पुराने जर्जर पुलिस आवास में रहने मजबूर हैं। आवासों की स्थिति यह है कि यह कभी भी धराशाही हो सकते हैं। खप्पर वाली छत से बारिश में पानी टपकता है। खप्परों पर घास लगी हुई है। जीव-जंतुओं का हमेशा खतरा बना रहता है। लेकिन अच्छे शासकीय आवास नहीं होने से मजबूरी में पुलिसकर्मी इन जर्जर क्वार्टर में रह रहे हैं। साथ ही इस और न तो पुलिस कप्तान का ध्यान है और न ही कोई जिम्मेदार इसकी सुध लेना चाहता है।
एडिशनल एसपी लोकेश सिन्हा से बात की गई तो उनका कहना था कि क्वार्टर पुराने हैं। फाइल देखकर और मौके का निरीक्षण करने के बाद ही कुछ कह पाऊंगा। अभी इस विषय पर कुछ नहीं कह सकता।