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bcci in action against gambhir बोर्ड नहीं चाहता कि ‘रैंक टर्नर’ का टैग गुवाहाटी के साथ जोड़ा जाए, क्योंकि यह उनका पहला टेस्ट मैच आयोजित कर रहा है. यही कारण है कि दूसरे दक्षिण अफ्रीका टेस्ट में गति और उछाल की उम्मीद की जा रही है. अगर गेंद स्पिन भी करती है, तो वह गति और उछाल के साथ होगी
नई दिल्ली. कोलकाता में मुंह जलने के बाद अब गंभीर एंड कंपनी गुवाहाटी में छाछ भी फूंक फूंक कर पीने का मन बना रही है. क्योंकि मनचाही पिच पर वो अपनी मुराद पूरी नही कर पाए तो अब वो करने जा रहे है जो सालों से तमाम क्रिकेट एक्सपर्ट्स उनको सलाह दे रहे है. ईडन गार्डन की पिच की आलोचना के बाद, बीसीसीआई ने गुवाहाटी में एक आदर्श पिच की माँग की है. भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका दूसरा टेस्ट 22 नवंबर से बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में शुरू हो रहा है, और उम्मीद है कि गुवाहाटी की पिच में गति और उछाल होगा.
सूत्रों के अनुसार, बारसापारा में लाल मिट्टी की पिच का इस्तेमाल किया जाएगा जिन्हें इसकी जानकारी नहीं है, उन्हें बता दें कि कोलकाता में इस्तेमाल की गई काली मिट्टी की पिच के विपरीत, लाल मिट्टी की पिचें लगातार उछाल देती हैं और जल्दी टूटती नहीं हैं. इसका मतलब है कि पहले टेस्ट के विपरीत, बाद में खेल में स्पिन आने की संभावना है.
बोर्ड ने कतरा गंभीर का ‘पर‘
बीसीसीआई आखिरकार एक्शन में आई और उन्होंने आशीष भौमिक, जो गुवाहाटी के मुख्य क्यूरेटर भी हैं, को अपनी आवश्यकता के बारे में सूचित कर दिया है. बोर्ड नहीं चाहता कि ‘रैंक टर्नर’ का टैग गुवाहाटी के साथ जोड़ा जाए, क्योंकि यह उनका पहला टेस्ट मैच आयोजित कर रहा है. यही कारण है कि दूसरे दक्षिण अफ्रीका टेस्ट में गति और उछाल की उम्मीद की जा रही है. अगर गेंद स्पिन भी करती है, तो वह गति और उछाल के साथ होगी. इससे भारतीय बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें आसान नहीं होंगी, लेकिन कोलकाता में जो हुआ उससे तो बेहतर ही है. बीसीसीआई यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि पहले दिन से ही कोई असमतल उछाल न हो.यह सर्वविदित है कि भारत में पिचें टूटती हैं और बल्लेबाज़ों को अनियमित उछाल के कारण संघर्ष करना पड़ता है. हालाँकि, ऐतिहासिक रूप से ऐसा तीसरे दिन से ही होता आया है. ईडन गार्डन्स में ऐसा नहीं हुआ. बोर्ड गुवाहाटी में कोलकाता जैसी घटना नहीं दोहराना चाहता.
लाल मिट्टी बचाएगी लाज
बरसापारा की पिच लाल मिट्टी से बनी है, जिससे तेज़ गति और उछाल मिलने की संभावना ज़्यादा होती है. भारतीय टीम ने घरेलू सीज़न से पहले ही अपनी माँगें स्पष्ट कर दी थीं. इसलिए, अगर पिच से टर्न मिलता है, तो वह तेज़ गति और उछाल के साथ टर्न लेगी.क्यूरेटर यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि कोई ख़ास उतार-चढ़ाव वाला उछाल न हो. घरेलू क्रिकेट में भी यहां की पिच पर सभी के लिए मौके देखने को मिले है ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि इंग्लैंड जैसी पिच पर सीरीज का दूसरा टेस्ट खेला जाएगा.