बालाघाट. बात 19 नवंबर की है, जब तीन राज्यों के सुरक्षाबल संयुक्त रूप से एंटी नक्सल ऑपरेशन पर थे. जवानों को पुख्ता जानकारी थी कि दर्जनभर नक्सली छत्तीसगढ़ के कुर्रेझर थाना क्षेत्र के बोर तालाब से 6 किलोमीटर अंदर जंगल में इलाके में छिपे हैं. ऐसे में आधी रात को ही तीन टीमें तैयार होती हैं और नक्सलियों को घेरने की तैयारी करती हैं, जिसमें एक टीम में तीन से चार डीएसपी रैंक के अधिकारी थे. एक टीम को लीड कर रहे थे इंस्पेक्टर आशीष शर्मा. सभी जवान सर्चिंग करते हुए जंगल की ओर जाते हैं लेकिन नक्सली पुलिस को नुकसान पहुंचाने की नीयत से अचानक फायरिंग शुरू करते हैं.
जवाबी कार्रवाई के बाद सामान छोड़ भागे नक्सली
मुठभेड़ के दौरान पुलिस की जवाबी फायरिंग के बाद नक्सली पस्त हो गए और अपना सामान छोड़ घने जंगल की ओर भाग गए. नक्सलियों के डेरे से भारी मात्रा में दैनिक उपयोग का सामान मिला है. इसके अलावा नक्सल साहित्य और पिट्ठू बैग पुलिस पार्टी ने जब्त किया है.
शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा एमपी के नरसिंहपुर जिले के बोहानी गांव के रहने वाले थे. वह साल 2016 में मध्य प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर पद पर भर्ती हुए थे. इंटेलीजेंस में आरक्षक के पद पर रहे. वह साल 2018 से हॉक फोर्स बालाघाट में पदस्थ थे. इस दौरान वह बैहर, गढ़ी और किन्हीं में अपनी सेवाएं दीं.
बखूबी पहचानते थे बालाघाट का जंगल
शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा भले ही बालाघाट के न हों लेकिन वह बालाघाट के जंगल को बखूबी पहचानने लगे थे. 18 दिसंबर 2022 को हर्राटोला में हुई मुठभेड़ में उन्होंने 14 लाख रुपये के इनामी नक्सली रूपेश उर्फ हुंगा डोडी को मार गिराने में सफलता हासिल की थी, जिसके लिए उन्हें पहला वीरता पदक मिला था. उन्हें 22 अप्रैल 2023 को कदला मुठभेड़ में 28 लाख रुपये के इनामी दो नक्सलियों सुनीता और सरिता को मार गिराने पर दूसरा वीरता पदक मिला था. इसके अलावा इसी साल 19 फरवरी को हुई मुठभेड़ में आशीष शर्मा ने नक्सली कमांडर आशा, एसीएम रंजीता, सरिता और लक्खे मरावी को मार गिराने में अहम भूमिका निभाई थी. इसके बाद उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिलता है और वह सब-इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर बन जाते हैं.
बालाघाट में निकली श्रद्धांजलि यात्रा
हॉक फोर्स इंस्पेक्टर आशीष शर्मा की श्रद्धांजलि यात्रा के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा और परिजन शहीद को याद करते हुए फूट-फूटकर रो पड़े. श्रद्धांजलि यात्रा सम्पन्न होने के बाद परिजन शहीद का पार्थिव शरीर लेकर नरसिंहपुर जिले के बोहानी गांव के लिए रवाना हो गए, जहां उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा. अंतिम संस्कार में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी उपस्थित रहेंगे और शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे.
जांबाज और निडर योद्धा
पुलिस लाइन में आयोजित शोक परेड के दौरान जवानों की आंखें नम थीं. शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा के करीबी दोस्त और साथी जवान बताते हैं कि आशीष सिर्फ एक अधिकारी नहीं बल्कि जांबाज और निडर योद्धा थे. वह नक्सल मोर्चों पर हमेशा सबसे आगे खड़े रहते. खतरा कितना भी बड़ा हो, पीछे हटना उन्होंने कभी सीखा ही नहीं. ऑपरेशन के दौरान उनका नेटवर्क, रणनीति और नेतृत्व पूरी टीम का हौसला बढ़ाता था.
जनवरी में होने वाली थी शादी
साथी जवानों ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार की डेडलाइन से पहले ही उन्होंने शादी का प्लान बनाया था. जनवरी 2026 में उनकी शादी होने वाली थी.
परिवार को हर संभव मदद
नक्सल ऑपरेशन के डीजी पंकज श्रीवास्तव ने मीडिया से बातचीत में जानकारी दी कि वह आशीष शर्मा के परिवार को हर संभव मदद करेंगे. इसमें आर्थिक सहायता, उनके परिवार के सदस्य को रोजगार दिया जाएगा. हालांकि इस नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती है लेकिन हर मदद की हर मुमकिन कोशिश की जाएगी.